क्या धोनी के पास कोई तुरुप का पत्ता नहीं

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ऑस्ट्रेलिया में ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर धराशाई हो गई.

मैच के चौथे ही दिन ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाज़ों ने तमाम भारतीय बल्लेबाज़ों को एक के बाद एक पैवेलियन की राह दिखाकर मैच जीतकर लिया.

अब कितने ही अगर-मगर किए जाएं लेकिन सच तो यह है कि पहले दिन को छोड़कर भारत इस मैच में कहीं नहीं था.

ऑस्ट्रलिया के सामने जीत के लिए 128 रनों का लक्ष्य था जो उसने छह विकेट खोकर हासिल कर लिया.

मिचेल का क़हर

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शनिवार को जैसे ही भारत ने एक विकेट के नुक़सान पर 71 रन से आगे खेलना शुरू किया तभी भारत के लिए बुरी ख़बर आई कि शिखर धवन अभ्यास करते हुए चोटिल हो गए हैं.

खेल शुरु होने से केवल 10 मिनट पहले विराट कोहली को बताया गया कि अब आपको मैदान पर जाना होगा. इस ख़बर ने भारतीय ड्रेसिंग रूम में खलबली मचा दी.

मिचेल जॉनसन ने आते ही विराट की गिल्लियां उड़ाई और अजिंक्य रहाणे को स्लिप में नाथन लियोन के हाथों कैच कराया. उनका क़हर रोहित शर्मा पर भी टूटा.

दो बार एकदिवसीय क्रिकेट में शतक लगाने वाले इस बल्लेबाज़ को उन्होंने दूसरी गेंद पर ही विकेटकीपर ब्रैड हैडिन के हाथों लपकवाया.

ऑस्ट्रेलियाई मंसूबे

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दूसरे छोर से जोश हैज़लवुड ने भी कमाल दिखाया और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पैवेलियन की राह दिखाई. अब भारत का स्कोर पांच विकेट पर 87 रन था.

विकेट गिरने का सिलसिला जारी था. ऐसे में शिखर धवन भी दर्दनिवारक दवाई लेकर मैदान में उतरे लेकिन तब तक ऑस्ट्रलिया अपने मंसूबो में कामयाब हो चुका था.

बकरे की अम्मा कब तक ख़ैर मनाती. आख़िरकार धवन 81 और चेतेश्वर पुजारा भी 43 रन बनाकर चलते बने.

कोई टीम के टेक्निकल डायरेक्टर रवि शास्त्री से पूछे कि ख़राब अभ्यास पिच पर धवन को खेलने की ज़रूरत ही क्या थी?

तुरुप का पत्ता

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Image caption महेंद्र सिंह धोनी और मुरली विजय (फाइल फोटो)

लगातार दो हार ने भारतीय गेंदबाज़ी की कलई खोल कर रख दी है. ईशांत शर्मा, उमेश यादव और वरूण एरोन ने पानी की तरह रन बहाए.

उनके बांउसर ने मिचेल जॉनसन को जैसे नींद से जगा दिया.

उन्होंने पहले तो इनकी बल्ले से जमकर ख़बर ली और उसके बाद अपनी गेंदों से सिखाया और दिखाया कि बांउसर किसे कहते हैं.

पहले टैस्ट मैच में विराट प्रदर्शन करने वाले कोहली भी ब्रिस्बेन में कुछ नहीं कर सके तो रोहित शर्मा का भार कप्तान धोनी कब तक उठाएंगे.

वैसे भी धोनी के सारे पत्ते एक से ही हैं, जिनमें कोई भी तुरुप का इक्का नहीं है. अब धोनी किस-किस को बदलें कि भारत की क़िस्मत भी बदले.

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