खेलों में 2014 के पांच यादगार पल

फ़ुटबॉल विश्वकप इमेज कॉपीरइट Getty

फ़ुटबॉल विश्व कप के इतिहास का यह सबसे मनोरंजक साल रहा, लेकिन 2014 के साथ दुखद घटनाएं और विवाद भी जुड़े रहे.

बीबीसी स्पोर्ट के स्टीफ़न फ़ोट्रेल ने 2014 के पांच यादगार पलों को चुना जिनमें कुछ तो बीबीसी की लोकप्रिय ख़बरें भी रहीं और सोशल मीडिया पर भी बहुत चर्चित रहीं.

ब्राज़ील की शर्मनाक हार

इमेज कॉपीरइट Getty

विश्व कप फ़ुटबॉल में जर्मनी की जीत और खुशी से सराबोर टीम की बर्लिन वापसी, बीबीसी मुंडो और बीबीसी ब्रासील के पाठकों समेत सोशल मीडिया में सबसे अधिक साझा की जाने वाली ख़बरों में शुमार रही.

2014 के विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में चैंपियन जर्मनी के हाथों, मेजबान टीम की अपमानजनक हार लंबे समय तक याद की जाएगी.

जर्मनी के हाथों 1-7 से बुरी तरह हारने के बाद शोक में डूबे घरेलू दर्शकों के सामने आंखों में आंसू लिए निराश और मायूस खड़े ब्राज़ीली खिलाड़ियों का मंजर, इस साल की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक रहेगी.

अधिकांश ब्राज़ीली इस बात से डरे हुए थे कि उनकी कमज़ोर टीम अंततः टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी, लेकिन उन्हें फिर भी उम्मीद थी कि दर्शकों के भरपूर समर्थन और टीम के पक्ष में भावनाओं की लहर उन्हें फ़ाइनल तक पहुंचा ही देगी.

हालांकि, इस बात के लिए वे कतई तैयार नहीं थे कि लुईस फ़ेलिप स्कोलारी की टीम के हाथों ब्राज़ील को विश्व कप के इतिहास की सबसे शर्मनाक हार झेलनी पड़ेगी.

सुआरेज पर प्रतिबंध

इमेज कॉपीरइट AP

ब्राज़ील फ़ुटबॉल विश्वकप में एक और स्तब्ध कर देने वाली घटना हुई. उरुग्वे के स्ट्राइकर लुई सुआरेज़ ने इटली के मिडफ़ील्डर जॉर्जियो किएलीनी को काट खाया.

यह ख़बर बीबीसी स्पोर्ट वेबसाइट और बीबीसी इंडोनेशिया के पाठकों के बीच काफ़ी चर्चित रही. इसी तरह की गतिविधियों के लिए इससे पहले भी सुआरेज़ पर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन फ़ुटबॉल की दुनिया के सबसे बड़े मंच पर तीसरी बार ऐसा करने पर बहुत से प्रशंसक निराश हुए.

पूरे टूर्नामेंट के दौरान सोशल मीडिया पर भी इस पर बहुत चर्चा हुई और ट्विटर के इतिहास का यह सबसे लोकप्रिय टूर्नामेंट बन गया. ये फ़ेसबुक के भी टॉप ट्रेंड में शुमार हुआ. इसके बाद सुआरेज़ पर चार महीने के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया.

इस दौरान वो 7.5 करोड़ पाउंड (743.4 करोड़ रुपए) के लिए लिवरपूल को छोड़ कर बर्सिलोना टीम में शामिल हो गए, जहां उन्हें अक्तूबर के अंत तक इंतज़ार करना पड़ा.

बाउंसर से ह्यूज़ की मौत

इमेज कॉपीरइट EPA

क्रिकेट प्रशंसकों के लिए वो एक प्रतिभावान आस्ट्रेलियाई बल्लेबाज थे, जिनकी अपने सबसे पसंदीदा खेल को खेलते हुए मौत हो गई.

जबकि अन्य लोगों के लिए वो इस खेल की सकारात्मक और नकारात्मक बातों की नज़ीर बन गए.

सिडनी में साउथ ऑस्ट्रेलिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच एक घरेलू मैच के दौरान गर्दन के ऊपर एक बाउंसर लगने से वे घायल हो गए थे.

25 वर्षीय ह्यूज़ बाउंसर लगने के बाद मैदान पर गिर गए और फिर कभी नहीं उठे.

इसके बाद टीम के साथियों व देशवासियों के साथ-साथ विश्व क्रिकेट बिरादरी और खेल समुदाय की ओर से जिस पैमाने पर शोक संवेदनाओं की बाढ़ आई, उसने ऑस्ट्रेलिया और अन्य लोगों को बहुत प्रभावित किया.

सोशल मीडिया पर हैशटैग #putyourbatsout से अभियान चला जिसके बाद लोगों ने इस बल्लेबाज़ को श्रद्धांजलि देने के लिए इंस्टाग्राम, ट्विटर और फ़ेसबुक पर भारी संख्या में तस्वीरें पोस्ट कीं.

स्टेफ़नी रोश की यू-ट्यूब सनसनी

इमेज कॉपीरइट AFP

फ़ीफ़ा गोल ऑफ़ दि ईयर पुरस्कार के संभावित उम्मीदवारों की जब घोषणा की गई, तो उम्मीद की जा रही थी कि इसमें रोबिन वान पर्सी और जेम्स रोड्रिगेज़ जैसे दिग्गज पुरुष खिलाड़ियों के नाम शामिल होंगे.

हालांकि, इसमें बहुत अनजान सा स्टेफ़नी रोश का नाम सामने आया. आयरिश वूमन्स क्लब पैरामाउंट यूनाइटेड के खेल में उनके धुआंधार गोल को यू-ट्यूब पर 30 लाख बार देखा गया. रोश के इस प्रदर्शन ने उन्हें फ्रांस में पेशेवर अनुबंध भी दिलाया.

इस प्रदर्शन को विश्व कप में वान पर्सी और कोलम्बियाई खिलाड़ी रोड्रिगेज़ के गोल के साथ अंतिम तीन नामों में शामिल किया गया.

हालांकि यह प्रदर्शन वर्ष 2013 का था. लेकिन अंतिम नामों में एकमात्र महिला के रूप में रोश की उपलब्धि को शामिल किया जाना, इस साल खेलों में सबसे यादगार पल रहा.

आगामी 12 जनवरी को ज्यूरिख़ में इस पुरस्कार की घोषणा होनी है और रोशे के समर्थन में सोशल मीडिया पर अभियान भी चल रहा है.

निश्चित ही, रोश इस पुरस्कार को जीतने की उम्मीद कर रही होंगी.

भारतीय बॉक्सर सरिता देवी का इनकार

इमेज कॉपीरइट Getty

भारतीय मुक्केबाज़ सरिता देवी का एशियाई खेलों में पदक लेने से इनकार करना ख़ासा विवादित रहा. बीबीसी हिंदी और बीबीसी तमिल पाठकों समेत दक्षिण एशिया में इस साल खेल की ये सबसे बड़ी ख़बर थी.

सितम्बर और अक्तूबर में दक्षिण कोरिया के इंचियोन में हुए खेलों में भी यह सबसे अनोखा पल था.

लाइटवेट सेमीफ़ाइनल मैच में दक्षिण कोरिया की पार्क जी-ना के हाथों विवादास्पद हार के बाद उन्होंने विरोध जताते हुए कांस्य पदक लेने से मना कर दिया था.

इस फ़ैसले पर भारतीय मीडिया में बहुत हंगामा हुआ और इस निर्णय को 'पक्षपातपूर्ण' और 'ग़लत' बताकर इसकी आलोचना की गई.

हालांकि, सरिता देवा ने बाद में माफ़ी मांग ली और पदक स्वीकार कर लिया. इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (एआईबीए) ने सरिता देवी पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार