टेस्ट कप्तानी की नई डगर पर कोहली

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मंगलवार से सिडनी में चौथा और आख़िरी टेस्ट खेला जाएगा.

महेंद्र सिंह धोनी के अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के एलान के बाद अब कप्तानी का भार पहली बार पूरी तरह से विराट कोहली के कंधों पर होगा.

अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 विश्व कप दिलाने के अलावा ज़िम्बाब्वे और श्रीलंका को एकदिवसीय सिरीज़ में एकतरफ़ा अंदाज सें 5-0 से हराने वाले विराट की असली परीक्षा अब शुरू होगी.

पढ़े पूरा विश्लेषण

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भारत के पूर्व आलराउंडर मदन लाल कहते हैं कि विराट के जिस आक्रामक अंदाज़ या व्यक्तित्व की बात की जाती हैं अब उसमें सुधार आता जाएगा.

अब उन्हें टीम के बाक़ी खिलाड़ियों का भी ध्यान रखना होगा और संतुलन बनाकर प्रदर्शन करना होगा.

क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन मानते हैं कि अब विराट को लंबे समय तक टेस्ट कप्तान के रूप में अपनी क्षमता दिखानी होगी.

वह कहते हैं, "विराट को समझना होगा कि ग़ुस्सा हद से बाहर नहीं निकले. हो सकता है कि बोर्ड भी उन्हें समझाए कि कप्तान की ज़िम्मेदारी अलग तरह की और बेहद महत्वपूर्ण होती है."

कंधो पर ज़िम्मेदारी

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विराट को मैगज़ीन नसीहत देते हैं, "उनको अक्खड़पन, गर्व और आक्रामकता के बीच की बारीक़ रेखा के फ़र्क को समझना होगा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी उन्हें बिगड़ैल बच्चा तक कह चुके हैं."

विराट के कोच राजकुमार शर्मा मानते हैं कि वह एक आक्रामक कप्तान हैं. वह अपने कंधों पर ज़िम्मेदारी लेते हैं और युवा खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरते हैं.

वैसे तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विराट ने अपने जीवट का कई बार परिचय दिया है और घरेलू स्तर पर भी वह इसकी मिसाल पेश कर चुके हैं.

संकटमोचक!

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साल 2006 में दिल्ली अपने घरेलू मैदान फिरोज़शाह कोटला पर कर्नाटक के ख़िलाफ़ रणजी ट्रॉफी मैच खेल रही थी.

दिल्ली के पांच विकेट 59 रन पर गिर चुके थे और उस पर फॉलोआन का खतरा मंडरा रहा था. कर्नाटक ने पहली पारी में 446 रन बनाए थे.

मैच के तीसरे दिन रात के समय उनके पिता प्रेम कोहली का निधन हो गया. इसके बावजूद विराट सुबह मैदान में उतरे और 90 रन बनाकर अपनी टीम को संकट से निकाला.

टीम की कमान

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विराट को ऐसे समय टीम की कमान मिली है जब बल्लेबाज़ी में वही टीम का आधार हैं और टीम कमज़ोर गेंदबाज़ी से जूझ रही है.

अकेले दम पर अनेक एकदिवसीय मैच भारत को जिता चुके विराट के लिए टेस्ट क्रिकेट में भारत को मजबूती प्रदान करना सबसे बड़ी चुनौती है.

विराट अभी तक 32 टेस्टों में नौ शतकों और 10 अर्द्धशतकों की मदद से 2,354 रन बना चुके हैं.

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