जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम: बुलंदी की सीढ़ियां

  • 14 जनवरी 2015
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पिछले महीने दिसंबर में भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने घरेलू टूर्नामेंट में कुछ ऐसा किया, जो इतिहास बन गया.

परवेज़ रसूल के नेतृत्व में खेल रही इस टीम ने 40 बार की रणजी चैंपियन मुंबई को उसके ही घर में हराकर सबको चौंका दिया था.

मुंबई के ख़िलाफ़ ये जीत तुक्का थी, ऐसा नहीं है. अपने ग्रुप में अंक तालिका में अभी राज्य की टीम चौथे नंबर पर है. टीम ने कुछ मैच जीते हैं तो कुछ हारे लेकिन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रही है.

मुश्किल हालात में सफलता

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ख़ास बात ये है कि इस टीम में बड़े-बड़े स्टार नहीं हैं, बल्कि इस कामयाबी के पीछे पूरी टीम की मेहनत रही.

वो भी विकट हालात में. सितंबर में जम्मू-कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ ने क्रिकेट मैदानों को भी नहीं बख्शा था.

जम्मू-कश्मीर की टीम एक महीने से भी ज़्यादा समय तक अच्छी तरह से अभ्यास नहीं कर सकी.

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Image caption राम दयाल ने कई अच्छी पारियां भी खेली हैं

कप्तान परवेज़ रसूल कहते हैं, “टीम ने अपने हुनर की बुनियाद और कोच के दिशा-निर्देश में कामयाबी हासिल की है.”

उन्होंने कहा, “मैं शुरू से ही खिलाड़ियों से कहता रहा हूं कि हर कोई अपने पूरे दमखम से खेले और टीम ने दिखाया कि जम्मू-कश्मीर की टीम किसी से कम नहीं है.”

टीम गेम

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25 साल के गेंदबाज़ राम दयाल कहते हैं, “हमारी टीम ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसमें सभी खिलाड़ियों का योगदान है.”

राम दयाल ने रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में चार मैचों में 16 विकेट चटकाए हैं.

दयाल बताते हैं, “बाढ़ के कारण राज्य के क्रिकेट मैदान ख़राब हो गए थे, लेकिन बाढ़ हमारा रास्ता नहीं रोक पाई. हम ये सोचकर घर से निकले थे कि बड़े मैदान पर खेलने जा रहे हैं और कुछ अच्छा करना है.”

गेंदबाज़ उमर नज़ीर का टूर्नामेंट में अब तक अच्छा प्रदर्शन रहा है. उमर कहते हैं, “हम जिस पृष्ठभूमि से आए हैं, वो ज़्यादा मज़बूत नहीं है. राज्य में खेल का ढाँचा भी बेहतर नहीं है.”

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बहरहाल, कोच सुनील जोशी जम्मू-कश्मीर के अब तक के प्रदर्शन से गदगद हैं.

सुनील कहते हैं, “टीम में कई खिलाड़ी प्रतिभाशाली और मेहनती हैं. बाकी हार-जीत तो खेल का हिस्सा है.”

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