युवराज बनेंगे देल्ही डेयरडेविल्स का चेहरा!

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सोमवार को मौजूदा विश्वकप क्रिकेट टूर्नामेंट में आयरलैंड के हाथों वेस्टइंडीज़ पर छह विकेट की जीत चर्चा में रही, वहीं भारत में युवराज सिंह ख़बरों में रहे.

युवराज के पिता पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह ने आरोप लगाया कि धोनी की राजनीति के कारण उन्हेंं विश्व कप में जगह नहीं मिली.

हालांकि बाद में युवराज सिंह ने अपने पिता की बात को भावुकता में कहा गया बताया.

दिन बीतते-बीतते युवराज सिंह के लिए अच्छा समाचार आया.

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उन्हें सोमवार को आईपीएल के आठवें सीज़न के लिए खिलाड़ियों की बोली में देल्ही डेयरडेविल्स ने 16 करोड़ रुपए में खरीदा.

देल्ही डेयरडेविल्स ने श्रीलंका के एंजेलो मैथ्यूज़ को 7.50 करोड़ में, अमित मिश्रा को 3.50 करोड़ रुपए में, श्रेयस अय्यर को 2.60 करोड़ रुपए में और ज़हीर खान को चार करोड़ रुपए में अपने नाम किया.

युवराज सिंह सोमवार को सबसे महँगे बिके पर देल्ही डेयरडेविल्स को युवराज पर इतने रुपए खर्च करने की क्या सूझी.

इसे लेकर भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ और आईपीएल में कोलकाता नाइटराइडर्स के सहायक कोच विजय दहिया कहते हैं, "दरअसल देल्ही की टीम को एक चेहरे की तलाश थी."

भारतीय चेहरा

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उन्होंने कहा, "पिछले कुछ समय से टीम खेल ज़रूर रही थी लेकिन उनके पास ऐसा खिलाड़ी नहीं था जिसके इर्द-गिर्द टीम रह सके. ऐसे में भारतीय चेहरा होना बेहद ज़रूरी है. इसलिए उन्होंने इतने अधिक पैसे के साथ युवराज पर अपना दांव खेला. वैसे भी इस नीलामी में सबसे भारी बटुआ देल्ही डेयरडेविल्स का ही था. उनके पास 39.75 करोड़़ रुपए थे."

श्रीलंका के एंजेलो मैथ्यूज़ पर भी देल्ही ने 7.50 करोड़़ रुपए लगाए. इसे लेकर विजय दहिया मानते हैं कि अब शायद उन्हें ही टीम का कप्तान भी बनाया जाएगा.

दाहिया कहते हैं, ''दरअसल उन्हें टीम की मज़बूती के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कप्तान भी चाहिए. वह मध्यम क्रम में बेहतरीन बल्लेबाज़ी कर सकते हैं."

बेहद शानदार!

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Image caption लेग स्पिनर अमित मिश्रा

लेग स्पिनर अमित मिश्रा भी देल्ही के हो गए. उन्हें लेकर विजय दहिया कहते हैं कि पिछले पांच-छह साल में जिन खिलाड़ियों को देल्ही ने छोड़ा है, वो हर टीम के लिए शानदार साबित हुए.

दहिया बताते हैं, "अब अगर ज़हीर खान की बात करें तो उन्हें एक करोड़ रुपए के लिए छोड़ दिया पर बाद में बोली में उनकी लड़ाई मुंबई इंडियंस से हुई, जो चार करोड़ पर जाकर रुकी."

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उनके मुताबिक़ "ऐसा सिर्फ़ इसलिए हुआ क्योंकि इनके पास सबसे अधिक पैसा था. देल्ही की सोच इस बार इस साल के लिए ऐसी है कि चाहे जो भी कुछ हो जाए हमें अच्छा खेलना है."

वहीं श्रीलंका के कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने नहीं बिके. इसे लेकर विजय दहिया कहते हैं कि जयवर्धने को लेकर टीमों को लगा कि अब वह पहले जैसे प्रभावशाली नहीं रह गए और उन्हें चार विदेशी खिलाड़ियों में रखा जाए.

"कुमार संगकारा ने पिछले साल ख़ुद को नीलामी से दूर रखा था. विश्वकप के बाद वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलेंगे पर उन्होंने जिस तरह का प्रदर्शन पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया, उससे वे अहम खिलाड़ी हो सकते थे."

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