अफ़ग़ानिस्तान में ग़म भुलाकर जीत का जश्न

क्रिकेट का जश्न

दशकों से घरेलू हिंसा और ज़बरदस्त ख़ून ख़राबे के बाद अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए गुरुवार का दिन बड़ा मुबारक रहा. इसने विश्व कप क्रिकेट में पहली बार जीत का स्वाद चखा है.

गुरुवार को विश्व कप क्रिकेट के पूल 'ए' के एक मैच में स्कॉटलैंड पर मिली रोमांचक जीत के बाद पूरा देश जीत के जश्न में डूब गया.

दक्षिणी प्रांत कंधार में लोग जीत की खुशी में राष्ट्रीय झंडा लेकर सड़कों पर उतर आए.

दशकों बाद शायद पहली बार ऐसा हुआ कि अफ़ग़ानिस्तान के तमाम लोगों ने धार्मिक और क़बायली भावनाओं से ऊपर उठ कर जीत की खुशियां मनाईं.

लोग मोटर साइकिलों और कारों पर सवार होकर सड़कों पर जुलूस निकाल रहे थे.

क्रिकेट पंडितों का मानना है कि वर्तमान विश्वकप का यह सबसे रोमांचक मैच था.

किसी को उम्मीद नहीं थी कि अपेक्षाकृत कमज़ोर मानी जानी वाली अफ़ग़ान टीम स्कॉटलैंड कों हरा पाएगी.

लेकिन, नौ विकेट खोने के बाद अफ़ग़ानिस्तान की टीम ने स्कॉटलैंड के 211 रनों के लक्ष्य को तीन गेंद रहते ही हासिल कर लिया.

इस जीत के हीरो रहे समीउल्लाह शेनवारी, जिन्होंने 96 रनों की शानदार पारी खेली और मैन ऑफ़ द मैच का ख़िताब हासिल किया.

अफ़गानिस्तान ने एक समय 132 रनों पर आठ विकेट गंवा दिए थे, लेकिन शेनवारी ने पारी को संभाला और जीत दिलाई.

इससे पहले स्कॉटलैंड की टीम 50 ओवरों में कुल 210 रनों पर ढेर हो गई थी.

जीत के जश्न मनाते लोग ढोल नगाड़े समेत गाड़ियों में निकल पड़े.

लोगों ने मुख्य बाज़ार और चौक से होकर जुलूस निकाला.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक़, वर्ष 2009 से लेकर अब तक अफ़ग़ानिस्तान में हुई हिंसा में 18 हज़ार से ज़्यादा सामान्य नागरिक मारे जा चुके हैं और 30 हज़ार से अधिक घायल हुए हैं.

अमरीकी अगुवाई वाली गठबंधन की फ़ौज पिछले दिसम्बर में वापस चली गई. देश का सुरक्षा तंत्र अब अफ़़ग़ानिस्तान की पुलिस के हाथों में है, जिनकी मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय सैन्य बल सीमित संख्या में देश में मौजूद हैं.

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