इतने अक्खड़ और रुखे क्यों हैं भारतीय क्रिकेटर

  • 4 मार्च 2015
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ऑस्ट्रेलिया में खेले जा रहे क्रिकेट विश्व कप में जितना ध्यान खेल पर है उससे ज़्यादा खिलाड़ियों की दिनचर्या पर भी.

कभी अख़बारों में ऑस्ट्रेलियाई टीम कोच डैरेन लीमन और पूर्व स्पिनर शेन वॉर्न के बीच कप्तान माइकल क्लार्क को लेकर चल रही 'कोल्ड वार' पर चर्चा होती है और कभी क्रिस गेल की कथित 'गर्लफ्रेंड्स' पर.

लेकिन भारतीय उप-कप्तान विराट कोहली ने जब से एक वरिष्ठ भारतीय पत्रकार को बिना किसी वजह के भद्दी गालियां दी है तब से नया मुद्दा छिड़ गया है. हालाँकि मामले के अगले दिन भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने सफ़ाई में कहा, "विराट ने उस व्यक्ति से बात कर ली थी और मामला वहीँ समाप्त हो गया".

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मैं उस दिन भारतीय टीम के नेट प्रैक्टिस के समय मर्डोक क्रिकेट ग्राऊँड के पास ही था.

करीब घंटे भर पहले मेरी भारतीय राष्ट्रीय दैनिक के इस पत्रकार से खेल पर बातचीत भी हुई थी लेकिन बाद में जो हुआ उससे सभी स्तब्ध हैं. लेकिन मेरी स्तब्धता का स्तर बहुत कम है.

समर्थकों के प्रति उदासीन रवैया

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पिछले 20 दिनों से भी ज़्यादा से मैं लगभग हर दूसरे या तीसरे दिन भारतीय क्रिकेटरों को या तो अभ्यास करते देख पाता हूँ और या आराम फरमाते.

लेकिन इस प्रतिभाशाली और युवा टीम के अपने समर्थकों के प्रति रवैए से न सिर्फ़ अफ़सोस होता है बल्कि हैरानी भी बढ़ती है.

मिसाल के तौर पर उन सैंकड़ों भारतीय मूल के समर्थकों की निराशा का अंदाज़ा लगाइए जो ऑस्ट्रेलिया के शहरों में अपनी टीम को अभ्यास करते देखने आते हैं.

भारतीय क्रिकेटर अपने कानों में इयरफोन्स पहन कर अभ्यास कर रहे होते हैं और आमतौर पर फैन्स की तरफ हाथ हिलाकर इशारा भी नहीं करते.

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विश्व कप में भाग ले रहीं लगभग सभी टीमों के साथ उनके देश के स्थानीय पत्रकार सफ़र करते हैं और खिलाडियों के साक्षात्कार लेते रहते हैं.

'ये किसी से बात ही नहीं करते'

मिसाल के तौर पर पाकिस्तान और इंग्लैंड टीम के मैच बीबीसी उर्दू और बीबीसी रेडियो फ़ाइव लाइव के सहयोगी कवर करते हैं और उनकी खिलाड़ियों से बात होती रहती है.

लेकिन भारतीय क्रिकेटर या तो नामचीन कमेंटेटर्स से बात करते दिखते हैं और या तो मैच ब्रॉडकास्ट करने वाले चैनल से.

मेलबर्न में मुझे एक भारतीय विद्यार्थी मिला जो पिछले तीन महीने से सिर्फ़ किसी एक भारतीय खिलाड़ी का ऑटोग्राफ़ लेने की असफल कोशिश कर रहा था.

हर प्रैक्टिस में जाता था लेकिन खिलाड़ी उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे थे.

एडिलेड में पाकिस्तान से मैच के दौरान भारतीय टीम इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में थी लेकिन रिसेप्शन पर काम करने वाले एक भारतीय ने बताया, "ये तो किसी से बात ही नहीं करते".

न फ़ोटो खींचने दी, न सेल्फ़ी

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कम से कम मैंने जब भी कपिल देव, दिलीप वेंगसरकर, मोहम्मद अज़हरुद्दीन, सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली या राहुल द्रविड़ को मैदान पर खेलते या अभ्यास करते देखा है वे अपने समर्थकों से मुखातिब ज़रूर होते थे.

इसी मंगलवार की बात है, पर्थ के हेयसिटी मॉल के एक रेस्टॉरेंट में मैं देर रात खाना खाने पहुंचा. वेटर भारत का था और उसका चेहरा उतरा हुआ था.

पूछने पर बताया, "आधे घंटे पहले दो नामचीन भारतीय क्रिकेटर खाना खाकर गए हैं. लेकिन न तो फ़ोटो खींचने दी और न ही सेल्फ़ी. मैं बेकार में ही चहक उठा था."

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