वर्ल्ड कप: इधर मैच, उधर टैक्सियां ग़ायब

टैक्सियों की कमी

ऑस्ट्रेलिया में चल रहे विश्व कप को देखने आए क्रिकेट प्रेमियों को जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा दिक्क़त हुई, वह है टैक्सियों की कमी.

प्रतियोगिता के दौरान जब भी बड़े मैच हुए, सड़कों से टैक्सियां नदारद हो गईं. इसकी वजह टैक्सी ड्राइवरों के बीच क्रिकेट का दीवानापन है.

दक्षिण एशियाई मूल के ड्राइवर

बड़ी वजह ये भी है कि ऑस्ट्रेलिया के लगभग सभी बड़े शहरों में ज़्यादातर टैक्सी ड्राइवर दक्षिण एशियाई मूल के हैं और उन्होंने मैचों के टिकट महीनों पहले ख़रीद रखे थे.

एडिलेड में भारत और पाकिस्तान के बीच जब 15 फ़रवरी को मुक़ाबला हुआ था तो मेलबर्न और सिडनी तक की सड़कों पर टैक्सियों की कमीं हो गई थी.

टैक्सी चलाने वाले भारतीय और पाकिस्तानी मूल के लोग एक दिन पहले ही एडिलेड पहुंच चुके थे.

कराची से पांच वर्ष पहले ऑस्ट्रेलिया आए सरफ़राज़ ने बताया, "क्रिकेट के आगे हमारे लिए सब कुछ बंद हो जाता है और उस पर यह तो विश्व कप है".

भारतीय मूल के ड्राइवर ज़्यादा

अब चार में से सिर्फ एक एशियाई टीम, भारत ही प्रतियोगिता में बची है. पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका की टीमें अपने देश लौट चुकी हैं.

लेकिन अभी भी मेलबर्न या सिडनी में भारतीय मूल के उन लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है जो टैक्सी चलाते हैं.

स्थानीय लोगों के अनुमान के मुताबिक़, मेलबर्न में रोज़मर्रा चलने वाली क़रीब 4,000 टैक्सियों में क़रीब 50 फ़ीसदी ड्राइवर भारतीय मूल के हैं. सिडनी में इनकी संख्या लगभग 35 फ़ीसदी है.

घाना में जन्में और पिछले 20 वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में टैक्सी चलाने वाले घोमला को लगता है कि अगर यही रफ़्तार रही तो दस वर्षों में टैक्सी ड्राइवर की नौकरी सिर्फ दक्षिण एशियाई मूल के लोग ही करते दिखेंगे.

उन्होंने कहा, "ग़नीमत है अब प्रतियोगिता में सिर्फ़ भारतीय टीम बची है. सड़कों से टैक्सियां ग़ायब सी हो गईं थीं. लेकिन भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमी-फ़ाइनल के दिन सिडनी में एक बार फिर बहुत दिक़्क़त होने वाली है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार