फिर दौड़ पाएंगी भारत की स्टार धाविका?

  • 24 मार्च 2015
dutee chand-ap इमेज कॉपीरइट AP
Image caption भारत की स्टार धाविका दुती चांद, जिन्हें ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में भाग नहीं लेने दिया गया था.

भारत की सितारा धाविका, दुती चांद की खेलों में पुन: वापसी के अधिकार को लेकर लोज़ान, स्विट्ज़रलैंड में सुनवाई शुरू हो गई है.

उनके शरीर में पुरुष हार्मोन की अधिकता की वजह से उन्हें खेलों से निष्कासित कर दिया गया था.

ओडिशा की दुती को इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडेरेशन्स (आईएएएफ) के नियमों के आधार पर ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा नहीं लेने दिया गया था.

उनके शरीर में अधिक एंड्रोजन होने के कारण उन्हें प्रतियोगिता से ठीक पहले हिस्सा लेने से इनकार कर दिया गया था. उन्हें इसकी सूचना फ़ोन पर ओडिशा के खेल मंत्री ने दी थी.

क्या है हाइपरएंड्रोजेनिज़्म?

इमेज कॉपीरइट DUTEE CHAND

हाइपरएंड्रोजेनिज़्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें औरत के शरीर में पुरुष हॉर्मोन की मात्रा अधिक हो जाती है.

खेलों का संचालन करनेवाली आईएएएफ के 2011 में लागू नियमों के अनुसार, दुती में पुरुष हार्मोन की मात्रा अधिक पाई गई थी.

इसे ठीक करने के लिए जो उपाय आईएएएफ ने सुझाए उसमें हॉर्मोन बदलने के लिए दवाइयां और ऑपरेशन शामिल हैं. पर दुती इसके लिए तैयार नहीं हैं.

दुती ने 2014 में बीबीसी से बात करते हुए कहा था "हर मनुष्य का शरीर अलग होता है और हमें यह स्वीकार करना चाहिए न कि इसके लिए किसी को खेलने से रोकना चाहिए."

जारी है लड़ाई

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption दुती का कहना है कि हर मनुष्य का शरीर अलग होता है और हमें यह स्वीकार करना चाहिए.

दुती चांद, भारतीय खेल प्राधिकरण में जेंडर और खेल के मामलों की सलाहकार, डॉ पयोशिनी मिश्रा के साथ इस मामले की सुनवाई के लिए स्विट्ज़रलैंड में हैं. बीबीसी से ईमेल पर हुई बातचीत में मिश्रा ने इस विषय पर बात की.

वे कहती हैं "मुझे ख़ुशी है कि ख़ेल मंत्रालय ने उस प्रक्रिया को वापस ले लिया है जिसके तहत भारत में ऐसी महिला खिलाड़ियों की पहचान की जाती थी जिन्हें हाइपरएंड्रोजेनिज़्म है और उनकी परीक्षा की जाती थी."

खेल प्राधिकरण ने मिश्रा को इस मामले में पैरवी करने और सलाह देने के लिए नियुक्त किया है.

दुती को सुधार के लिए सुझाए गए मेडिकल सर्जरी के ख़िलाफ दलील के बारे में वे कहती हैं कि "चूंकि दुती का मामला अभी विचाराधीन है, अभी इस मामले में मैं कुछ नहीं कह सकती. पर इस तरह के उपाय विवादास्पद होते हैं."

इस तरह के उपाय आक्रामक हो सकते हैं

इमेज कॉपीरइट afp getty
Image caption दस साल की उम्र से खेलों में हिस्सा ले रहीं दुती ने देश के लिए अनेक मेडल जीते हैं.

मिश्रा कहती हैं, "वैज्ञानिकों के मुताबिक़ इस प्रकार के उपाय आक्रामक हो सकते हैं और ये दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं. और तो और, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि प्राकृतिक रूप से बन रहे एंड्रोजन से महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर कोई प्रभाव पड़ता है."

मिश्रा का कहना है कि दुती के मामले में हम ख़ेलों में सम्मिलित करने और निष्पक्षता को ऩए मायनों में पुन: निर्धारित करने की बात करते हैं. "इससे खेल जगत पहले से बेहतर और उदार हो सकेगा."

दुती 10 वर्ष की आयु से ख़ेलों में हिस्सा ले रही हें और जब उन्हें कॉमनवेल्थ में खेलने से मना किया गया, वो 18 वर्ष की थीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार