यहाँ माइकल क्लार्क थे सेल्समैन !

किंग्सरोव स्पोर्ट्स सेंटर

सिडनी के एक पुराने उपनगर किंग्सग्रोव में खेल के साज़ो सामान का मशहूर शोरूम किंग्सरोव स्पोर्ट्स सेंटर है लेकिन इस क्रिकेट प्रेमी शहर के कई लोग ये नहीं जानते कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ, उनके भाई मार्क वॉ और मौजूदा कप्तान माइकल क्लार्क तक यहां सेल्समैन की नौकरी कर चुके हैं.

खेल के सामान की इस दुकान के मालिक श्रीलंका मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैरिस सॉलोमन हैं. उन्होंने 39 वर्ष पहले इस शोरूम की स्थापना की थी.

स्टीव और मार्क वॉ रहे सेल्समैन

जुड़वा भाई स्टीव और मार्क वॉ सिडनी में पले-बढ़े और राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने से पहले उन्होंने करीब पांच वर्ष तक इस शोरूम में नौकरी की.

क्लार्क ने भी की नौकरी

ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा कप्तान माइकल क्लार्क भी सिडनी शहर के लिवरपूल इलाके के रहने वाले हैं.

उन्होंने क्रिकेट खेलने के लिए स्कूल बीच में ही छोड़ दिया था.

जब हैरिस सॉलोमन को इस बात का पता चला कि एक नौजवान नौकरी के साथ-साथ क्रिकेट ट्रेनिंग की सुविधा की तलाश में हैं तो उन्होंने माइकल क्लार्क को नौकरी पर रख लिया.

किंग्सरोव स्पोर्ट्स सेंटर की खासियत है इसके पीछे के हिस्से में बनी दो इंडोर पिचें, जिन पर खिलाड़ी जम कर प्रैक्टिस कर सकते हैं.

स्टीव वॉ, मार्क वॉ और माइकल क्लार्क जब क्रिकेट में अपने पैर जमा रहे थे तब नौकरी ख़त्म होने के बाद यहाँ घंटों अभ्यास किया करते थे.

रोहित के बल्ले की मरम्मत

स्टोर के क्रिकेट मैनेजर स्टुअर्ट इले ने बताया कि उनके यहाँ से क्रिकेट का सामान खरीदने और बैट की मरम्मत कराने दुनिया के सभी नामचीन क्रिकेटर आते हैं.

इले ने कहा, "रोहित शर्मा कुछ दिन पहले आए थे. विश्व कप के दौरान ही पाकिस्तान के पूर्व कप्तान यूनुस ख़ान के कुछ बल्लों की मरम्मत हमने की थी. इस समय हमारे कारखाने में स्टीव स्मिथ के तीन बैटों की मरम्मत चल रही है."

बॉर्डर-रिचर्ड्स को किया स्पॉन्सर

इस स्टोर के मालिक हैरिस सॉलोमन ने वर्षों पहले साइमंड्स नाम के एक मशहूर भारतीय ब्रांड की फ्रैंचाईज़ ली थी जिसके तहत ऐलन बॉर्डर, विवियन रिचर्ड्स और गॉर्डन ग्रीनिज जैसे नामचीन क्रिकेटरों को उन्होंने स्पॉन्सर भी किया था.

स्टोर में काम करने वाले मौजूदा कर्मचारियों को इस बात पर गर्व है कि यहाँ काम करने वाले कुछ लोगों ने दुनिया भर में नाम कमाया.

चलने के पहले मुझे किंग्सरोव स्पोर्ट्स सेंटर के निजी संग्रहालय में एक बैट भी दिख गया जिस पर 1983 का विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के ऑटोग्राफ़ थे.

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