ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी होने की 5 वजहें

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भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच विश्व कप के सेमी फ़ाइनल को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है.

भारत ने अभी तक इस विश्व कप में एक भी मैच नहीं गंवाया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया को ग्रुप मैच में एक हार का सामना करना पड़ा था.

इसके बावजूद चार बार की विश्व चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी है. आइए जानते हैं वह पांच कारण जिनकी वजह से ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत को मुश्किल में डाल सकती है.

वो पांच कारण जानें

1. होम ग्रराउंड

ये विश्व कप ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में संयुक्त रूप से आयोजित कराया गया है.

ऑस्ट्रेलिया ने ग्रुप मुक़ाबले में सिर्फ़ एक मैच न्यूज़ीलैंड में खेला था. भारत के ख़िलाफ़ सेमी फ़ाइनल मुक़ाबला सिडनी में हो रहा है. ज़ाहिर है ऑस्ट्रेलिया को अपने देश में खेलने का फ़ायदा ज़रूर मिलेगा.

अगर रिकॉर्ड की बात करें, सिडनी में भारत के ख़िलाफ़ 13 एक दिवसीय मैचों में से भी सिर्फ़ एक में ही ऑस्ट्रेलिया को हार मिली है.

2. मनोवैज्ञानिक बढ़त

विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट और त्रिकोणीय वनडे सिरीज़ में भारत ऑस्ट्रेलिया से एक भी मैच नहीं जीत पाया था.

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इसी मनोवैज्ञानिक बढ़त की चर्चा ग्लेन मैक्सवेल भी कर चुके हैं. वे भारत से कह चुके हैं कि उसे पिछली सिरीज़ का नतीजा इतनी जल्दी नहीं भूलना चाहिए.

आईसीसी की वनडे रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया इस समय नंबर वन टीम है और चार बार की विश्व चैम्पियन भी है. जबकि भारत की टीम सिर्फ़ दो बार ही ख़िताब जीत पाई है.

3. भरोसेमंद बल्लेबाज़ी

हालांकि इस विश्व कप में भारत ने भी बल्ले का ख़ूब दम दिखाया है, लेकिन अब भी अनुभव और संकट के समय परीक्षा के मामले में ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ भरोसेमंद नज़र आते हैं.

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एरॉन फिंच, स्टीवेन स्मिथ, शेन वॉटसन, डेविड वॉर्नर, माइकल क्लार्क और ग्लेन मैक्सवेल... अगर भारतीय गेंदबाज़ों ने इन पर नकेल नहीं कसी, तो ये बल्लेबाज़ी किसी भी विपक्षी टीम को पस्त कर सकती है.

इनमें से कई खिलाड़ी आईपीएल का हिस्सा हैं. उन्हें भारतीय गेंदबाज़ी का पूरा आभास है. ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ी को कम आंकना किसी भी टीम के लिए दुस्वप्न साबित हो सकता है.

4. पेस बैटरी

इस विश्व कप से पहले भारतीय गेंदबाज़ी को उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी माना जा रहा था. लेकिन उमेश यादव, मोहम्मद शमी और मोहित शर्मा की तिकड़ी ने इस विश्व कप में सबको प्रभावित किया है.

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लेकिन भारतीय तिकड़ी ऑस्ट्रेलियाई पेस आक्रमण के सामने अभी कम अनुभवी है. मिचेल जॉनसन, जेम्स फॉकनर और मिचेल स्टार्क किसी भी बल्लेबाज़ी क्रम को ध्वस्त कर सकते हैं.

विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया के तेज़ आक्रमण के सामने जिस तरह भारतीय टीम की एक नहीं चली थी, उसका फ़ायदा ऑस्ट्रेलियाई टीम को ज़रूर मिलेगा.

5. आक्रामक रुख़

सेमी फ़ाइनल मैच से पहले ही ऑस्ट्रेलिया के कई खिलाड़ियों ने बयानबाज़ी शुरू कर दी है, जिसका भारतीय भी जवाब दे रहे हैं.

लेकिन मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का रुख़ बहुत आक्रामक होता है.

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वे किसी भी तरह की रणनीति में अपने आक्रामक रुख़ को भी एक जगह देते हैं. कई बाद मैदान पर उनका व्यवहार विवाद का विषय रहा है.

भज्जी-साइमंड्स विवाद ने तो एक बार क्रिकेट की दुनिया को संकट में डाल दिया था.

सेमी फ़ाइनल जैसे मौक़े पर मैदान पर दोनों टीमें कितनी आक्रामक होंगी, इसका भी फ़ायदा उन्हें मिलेगा. और इस मामले में ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा ज़रूर भारी लगता है.

लेकिन ये विश्व कप है

तो ये रही ऑस्ट्रेलिया के पक्ष की पांच बातें, लेकिन यह विश्व कप है.

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सभी तरह की मनोवैज्ञानिक बढ़त और मज़बूती के बावजूद उस ख़ास दिन कोई टीम कैसा प्रदर्शन करती है, इसी पर मैच का नतीजा निर्भर करेगा.

और भारत ने भी विश्व कप के पहले की तमाम कमज़ोरियों से पार पाकर बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

तो आप भी तैयार हो जाइए विश्व कप फ़ाइनल से पहले दो दिग्गज टीमों के टकराव के लिए.

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