भारतीय बॉक्सिंग हो गई बर्बाद: विजेंद्र

अमरीका के फ़्लॉयड मेवैदर, फ़िलीपींस के मैनी पैकियाओ इमेज कॉपीरइट Reuters

पिछले दिनों पूरी दुनिया ने 'सदी का सबसे बड़ा' कहे जाने वाला और सबसे महंगा मुक्केबाज़ी मुक़ाबला देखा.

इस महामुक़ाबले में अमरीका के फ़्लॉयड मेवैदर ने फ़िलीपींस के मैनी पैकियाओ को मात दी.

इस महामुक़ाबले को देखने वालों में बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले भारत के जाने-माने मुक्केबाज़ विजेंद्र सिंह भी थे.

उन्होने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि उनका सपना भी प्रोफेशनल मुक्केबाज़ बनना है.

अफ़सोस

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विजेंद्र सिंह को मलाल है कि इन दिनों भारतीय मुक्केबाज़ी की दुनिया फेडरेशन के आपसी झगड़ो के कारण लगभग बर्बाद है.

एक समय अखिल कुमार, जितेंद्र, दिनेश कुमार, ए लाकड़ा और विजेंद्र दुनिया भर के मुक्केबाज़ों में खौफ पैदा करते थे.

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विजेंद्र मानते हैं कि कभी भारतीय ओलंपिक संघ और कभी मुक्केबाज़ी संघ के निलंबित होने से भारतीय मुक्केबाज़ अंतराष्ट्रीय स्तर पर पिछडते चले गए.

वो कहते हैं, "लंदन ओलंपिक में भारत के सात मुक्केबाज़ों ने अपनी जगह बनाई थी. अब इनमें से किसी को नहीं पता कि कल क्या होगा. महिला मुक्केबाज़ों की हालत भी यही है. मुक्केबाज़ी संघ में नीचे की लॉबी वोट बैंक की राजनीति करती हैं जिससे सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा है."

बॉक्सिंग लीग

भारतीय मुक्केबाज़ों की कामयाबी के बाद साल 2010 में भारत में भी बॉक्सिंग लीग के सपने देखे गए थे लेकिन आज भी वह सपने-सपने ही है.

विजेंद्र सिंह का मानना है कि उन दिनों एकाध फाइट नाइट भी हुई थी. बाद में हर कोई इसे बिज़नेस की तरह लेने लगा जबकि इसमें पहले प्रमोटर की ज़रूरत होती है.

विजेंद्र सिंह कहते हैं, "अखिल कुमार और मेरे जैसे दूसरे कामयाब मुक्केबाज़ों की कतार के बावजूद भारतीय मुक्केबाज़ों को चार साल में एक बार होने वाले ओलंपिक में ही मुख्य रूप से खेलने का अवसर मिला और धीरे-धीरे समय के साथ उम्र भी निकल गई."

अब मुक्केबाज़ी संघ की हालत तो यह है कि बीते रविवार को उसके अध्यक्ष संदीप जाजोदिया के ख़िलाफ ही आम सभा की विशेष बैठक में भारी बहुमत से अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया.

हालांकि जाजोदिया ने इसे ग़ैरक़ानूनी कहा है.

जब संघ के अधिकारी ही ऐसे लड़ेंगे तो भारतीय मुक्केबाज़ों की सुध कौन लेगा ? विजेंद्र मानते हैं कि बॉक्सिंग रिंग में विरोधियों को पस्त करने की क्षमता रखने वाले भारतीय मुक्केबाज़ अपने ही भविष्य को लेकर संशय में हैं.

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