ट्रेनिंग कैंप असुरक्षित होते हैं: अंजु बॉबी जॉर्ज

  • 7 मई 2015
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केरल के अलपुज्ज़ा में चार महिला एथलीट ने आत्महत्या की कोशिश की और उनमें से एक की मौत हो गई है.

भारतीय खेल प्राधिकरण के निदेशक ने कहा है कि लड़कियों के पास से सुसाइड नोट मिला है.

ये मामला प्राधिकरण के एक हॉस्टल में हुआ और कहा जा रहा है कि लड़कियां कथित तौर पर सीनियर्स के उत्पीड़न से तंग थीं जिसकी वजह से उन्होंने ऐसा क़दम उठाया.

इस मामले पर बीबीसी ने बात की भारत की दो अहम पूर्व खिलाड़ियों से.

अंजू बाबी जॉर्ज

मेरे समय में मैंने कभी ऐसा नहीं देखा और न ही मेरे साथ कभी ऐसा हुआ.

ये बहुत ही चौंकाने वाली ख़बर है कि 15 साल की लड़की की मृत्यु हो गई है और तीन अभी अस्पताल में भर्ती हैं. ऐसा पहली बार हुआ है और ये बहुत ही बुरी ख़बर है.

इस मामले के बारे में बहुत सारी ख़बरें आ रहीं हैं, कोई कह रहा है कि सीनियर खिलाड़ी उनकी रैगिंग ले रहे थे, कोई कह रहा है कि कोच उनका उत्पीड़न कर रहा था पर अभी साफ़ तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है.

बैंगलोर में जहां हम ट्रेनिंग करते हैं वो जगह बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है.

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हम साल 2003 से डायरेक्टर जेनरल ऑफ़ स्पोर्ट्स को खत़ लिखते रहे हैं कि जहां हम प्रैक्टिस करते हैं वो जगह बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है.

वहां कॉलेज के स्टूडेंट्स और स्थानीय लोग इक्कठा हो जाते हैं और हमें काफ़ी असुरक्षित महसूस होता है. कई बार हमें उनके साथ झगड़ना पड़ता है. सिक्योरिटी भी उन्हें डर के मारे नहीं रोक पाती है. काफ़ी सारे एथलीट्स के मोबाइल फ़ोन और पर्स भी चोरी हुए हैं.

अश्वनि नचप्पा

ये हादसा वाक़ई दिल दहला देने वाला है क्योंकि इस तरह का क़दम पहले किसी ने नहीं उठाया है.

उस लड़की की मृत्यु के बारे में मैं अभी कुछ नहीं कहूंगी. मैं पोस्ट मोर्टेम की रिपोर्ट का इंतज़ार करूंगी. अभी सबसे ज़रूरी है कि उन तीन लड़कियों की जान बचाई जाए जो इस वक़्त अस्पताल में भर्ती हैं.

मेरे साथ कभी ऐसा नहीं हुआ है और तभी मुझे इस बात से इतना धक्का लगा. मैं अभी भी कहूंगी कि कैम्प्स बहुत सुरक्षित होते हैं. चाहे जूनियर्स हों या फिर सीनियर्स कैंप हों ज़रूरी एहतियात बरती जाती है.

हर कैंप में वार्डेंस रहते हैं तो इतने बड़े क़दम की मुझे कोई वजह नहीं दिखती.

अगर ऐसा कुछ होता है तो सबसे पहले आप अपने कोच को जाकर कंप्लेंट करेंगे या फिर आप वार्डन से शिकायत कर सकते हैं. मुझे नहीं लगता कि हर एक कैंप में ऐसी व्यवस्था है जो इस तरह के मामलों में फ़ैसले ले सके. स्पोर्ट्स अथॉरिटी को इस चीज़ को समझना चाहिए.

आज मीडिया में पारदर्शिता है और अगर किसी अथॉरिटी के ऊपर कोई आरोप लगता है तो वो उसे खुले में आकर सबके सामने बताना चाहेगी.

पर मैं ये भी मानती हूं कि इसे दबाया भी जा सकता है.

हालांकि ये उन मामलों में से नहीं है जिसे दबाया जाना चाहिए.

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