'ज़िम्बाब्वे का आना पाक के लिए बड़ा मौक़ा'

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ज़िम्बाब्वे की टीम का क्रिकेट खेलने के लिए यहाँ पहुंचना पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक बड़ा मौक़ा है क्योंकि छह साल से पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बिलकुल नहीं हो रहा था.

पाकिस्तान की टीम अपनी होम सिरीज़ पाकिस्तान से बाहर यूएई में खेलने के लिए मजबूर थी.

ये यादगार मौक़ा है क्योंकि ज़िम्बाब्वे के पाकिस्तान आने से दूसरी टीमों के भी पाकिस्तान आने की उम्मीद बंधी है.

कड़े सुरक्षा इंतज़ाम

सुरक्षा इंतेज़ाम बेहद कड़े किए गए हैं. छह साल पहले श्रीलंका की टीम पर हुए हमले से पाकिस्तान का नाम बहुत ख़राब हुआ था.

पाकिस्तान चाहता है कि टीमें आएं और खेलें इसलिए बोर्ड नहीं चाहेगा कि बेहतर हो रहे हालात फिर ख़राब हों.

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सुरक्षा में पूरी ताक़त झोंकी गई है और ये पाकिस्तान पंजाब और केंद्र सरकार के लिए एक इम्तेहान की घड़ी भी है.

आईसीसी से सहयोग नहीं

सुरक्षा के पूरे भरोसे के बावजूद भी आईसीसी ने अपने अधिकारियों को सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान नहीं भेजा है.

ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अकेले ही प्रयास कर रहा है.

आईसीसी से पीसीबी को कोई सहयोग नहीं मिल रहा है.

पाकिस्तान के लोगों में भी इस सिरीज़ को लेकर ख़ासा जोश है. उन्होंने छह साल से अपने देश में कोई मैच नहीं देखा है.

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Image caption पिछले छह सालों से पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं हुआ है.

जिन लोगों के पास पैसा है वो तो देश के बाहर जाकर मैच देख लेते थे लेकिन अब आम दर्शक भी अपने देश में हो रहे ये मैच देख सकेंगे.

आर्थिक नुक़सान

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को देश में मैच ना होने से बड़ा आर्थिक नुक़सान हुआ है.

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Image caption लाहौर में होने वाले पहले मैच के लिए सभी टिकट बिक चुके हैं.

देश में खेले जाने वाले मैचों का पैसा बोर्ड के पास रहता है लेकिन यूएई में मैच कराना काफ़ी महंगा था.

पैसा कम होने की वजह से बोर्ड नए खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर भी पैसा नहीं लगा पाया.

जब घर में मैच होते हैं तो नए खिलाड़ियों को भी मौक़ा मिलता है. अभ्यास मैचों में नए टेलेंट को भी मौक़े मिलते हैं इसलिए इस सिरीज़ से पाकिस्तान क्रिकेट को निश्चित रूप से बल मिलेगा.

(बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी से बातचीत पर आधारित)

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