'ऐसे तो ख़त्म हो जाएगा टेस्ट क्रिकेट'

  • 3 जून 2015
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भारतीय टीम आने वाले दिनों में बांग्लादेश का दौरा करेगी जहां वह केवल एक टेस्ट मैच और तीन एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय मैच खेलेगी.

इसके अलावा हाल ही में न्यूज़ीलैंड ने इंग्लैंड के ख़िलाफ दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ खेली.

जब पूरे क्रिकेट जगत में टेस्ट क्रिकेट को जीवित रखने को लेकर चर्चा हो रही तो क्या एक या दो टेस्ट मैचों की सिरीज़ से उसमें जान फूंकी जा सकेगी?

टेस्ट के दर्शक नहीं

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क्रिकेट समीक्षक विजय लोकपल्ली कहते हैं, "बांग्लादेश ने अपना पहला टेस्ट मैच भारत के ही ख़िलाफ साल 2000-01 में खेला था लेकिन भारत ने आज तक बांग्लादेश को कभी भी अपने यहां टेस्ट मैच खेलने नहीं बुलाया. इसी से पता चला जाता है कि भारत बांग्लादेश को टेस्ट क्रिकेट में कैसे आंकता है."

वह कहते हैं कि अब टेस्ट क्रिकेट को लेकर दुनिया भर में मुश्किल हो रही है. शायद क्रिकेट के प्रशासक ही अब इसे नहीं चाहते क्योंकि टेस्ट क्रिकेट देखने अधिक लोग नहीं आ रहे.

अगर एशेज़ (इंग्लैड-ऑस्ट्रेलिया) की बात की जाए तो वहां पांच में से पहले तीन दिन तो भारी भीड़ जुटती है. दक्षिण अफ्रीका की टीम जब अपने घर में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया से खेलती है तब भी भीड़ जुटती है.

वहीं भारत-पाकिस्तान टेस्ट सिरीज़ में दर्शक नहीं आते. भारत के पिछले दो पाकिस्तान दौरों में स्टेडियम खाली नज़र आए. उसका मुक़ाबला एशेज़ से नही हो सकता क्योंकि एशेज़ एक परंपरा है जिसका पालन शुरू से अब तक होता आया है.

प्रोत्साहन नहीं

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किसी समय एशिया के ब्रैडमैन के नाम से मशहूर रहे पाकिस्तान के पूर्व कप्तान ज़हीर अब्बास कहते हैं, "आजकल दर्शकों के पास अधिक समय नही है इसलिए एकदिवसीय और ट्वेंटी-ट्वेंटी अधिक लोकप्रिय है. क्रिकेट आक्रामक हो गया है और टेस्ट क्रिकेट में तीन-चार दिन में परिणाम आ रहे हैं."

"इसके बावजूद अगर विश्वस्तरीय अच्छे युवा खिलाड़ी तैयार करने हैं तो एशिया में अधिक से अधिक टेस्ट क्रिकेट होना चाहिए."

विजय लोकपल्ली के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में भीड़ आती है चाहे वहां भारत खेले, क्योंकि वहां आकर्षक क्रिकेट खेला जाता है. इसका कारण कई बार अच्छी पिच और कई बार मौसम होता है.

अगर क्रिकेट को अनिश्चितता का खेल कहा जाता है तो वह इंग्लैंड जैसे माहौल की वजह से भी होता है, लेकिन भारत में ऐसा नही होता. यहां आम दर्शक को टेस्ट क्रिकेट देखने के लिए कभी प्रोत्साहित नहीं किया जाता.

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टेस्ट क्रिकेट सभी आराम से घर में टेलिविजन पर देख लेते हैं. लोग क्यों मंहगे टिकट खरीदें या भारत में स्टेडियमों में जाकर परेशान हो, जैसा अकसर होता है.

भारत क्या करे ?

ज़हीर अब्बास कहते है कि ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड को छोडें, बड़ा भाई होने के नाते भारत ख़ुद टेस्ट क्रिकेट का साथ दे.

"वह पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश से खेले क्योंकि अगर यह आपस में ही नही खेलेंगे तो बहुत मुश्किल हो जाएगी. अब पूरी दुनिया में दूसरे टूर्नामेंट बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे तो टेस्ट क्रिकेट ख़त्म ही हो जाएगा."

विजय लोकपल्ली कहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट को ज़िंदा रखने के लिए भारत को इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से अधिक से अधिक टेस्ट मैच खेलने चाहिए.

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"पाकिस्तान के साथ टेस्ट सिरीज़ न होने का नुकसान पाकिस्तान को ही हो रहा है क्योंकि भारतीय खिलाड़ी दूसरी अन्य टीमों के ख़िलाफ खेल ही रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान को भी भारत में आमंत्रित करना चाहिए."

"ज़रूरी नहीं कि पांच टेस्ट मैच की सिरीज़ हो तीन टेस्ट मैच ही काफी हैं. बांग्लादेश को भी घर में बुलाएं चाहे एक टेस्ट मैच ही खेले."

अब देखना है कि भारत इस दिशा में क्या करता है.

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