क्या सेप ब्लैटर डर गए हैं?

  • 3 जून 2015
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हाल ही में पाँचवी बार फ़ीफ़ा अध्यक्ष चुने गए सेप ब्लैटर ने फ़ीफ़ा अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा की है.

बीते सप्ताह भ्रष्टाचार के आरोपों में फ़ीफ़ा अधिकारियों की गिरफ़्तारी के बाद ये विश्व फ़ुटबॉल जगत को हिलाने वाली दूसरी बड़ी घटना है.

फ़ीफ़ा विश्व में फ़ुटबॉल स्पर्धाएं आयोजित कराने वाली नियामक संस्था है और ब्लैटर लंबे समय से इसका चेहरा थे.

ब्लैटर ने इस्तीफ़ा क्यों दिया ये अभी स्पष्ट नहीं है. हो सकता है कि उन्होंने जाँच एजेंसियों के दवाब में इस्तीफ़ा दिया हो.

हो सकता है जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है उन्होने भी उनके ख़िलाफ कुछ बाते की हो. अब इसका विश्व फुटबॉल पर बहुत बुरा असर पडेगा.

डर कर भागे?

ब्लैटर को अगर इस्तीफ़ा देना था तो पहले ही अपनी उम्र का हवाला देते हुए शालीनता से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था.

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वह अभी चार दिन पहले ही अध्यक्ष चुने गए, अब वह छोड रहे है. अब सब यही कहेंगे कि ब्लैटर भ्रष्टाचार से डर कर भाग गए.

भ्रष्टाचार स्कैंडल में फँसे फ़ीफ़ा के लिए ये मुश्किल दौर है. अब एकदम से नई ईमानदार टीम चुनना भी इतना आसान नही है. अब तो पूरे बदलाव या पूरी क्रांति की ज़रूरत है.

अब किसी भी आदमी पर भरोसा नही किया जा सकता, कोई भी लालच का शिकार हो सकता है.

अफ़्रीका-एशिया को बढ़ावा

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Image caption एफ़बीआई पिछले फ़ीफ़ा में पिछले दो दशकों के भ्रष्टाचार की जाँच कर रही है.

अब तो इस तरह के नियम बनने चाहिए, क़ानून बनना चाहिए कि दोबारा ऐसा हो ही नही सके तभी सुधार आएगा, केवल चेहरा बदलने से कुछ नही होगा.

ब्लैटर ने एशियाई और अफ़्रीकी देशों में फ़ुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए काफ़ी ख़र्च किया था और इसके लिए उनकी तारीफ़ भी हुई थी. भारत में भी फ़ुटबॉल में बहुत सुधार देखने को मिले.

कई अफ़्रीकी देशों को मैदान मिले लेकिन यही पैसा भ्रष्टाचार लेकर भी आया. इन सभी लोगो ने पैसे का पूरा लाभ नही उठाया.

ब्लैटर का मंतव्य बुरा नही था, लेकिन सभी चीज़ो की निगरानी नही हुई. यहां तक कि किसी को नही पता कि भारत में जो पैसा आता है उसका इस्तेमाल कैसे होता है.

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फ़ुटबॉल मुश्किल में

जब तक नए नियम-क़ानून नही बनेगें कुछ नही होगा. यह विश्व फुटबॉल की छवि के लिए बहुत खराब स्थिति है. अब तो डर लग रहा है कि कही प्रायोजक भी आना ना छोड दे.

इससे पहले चुनाव के दौरान ही फुटबॉल दो खेमों में बंट गया था. ब्लैटर एशिया और अफ्रीकन देशों और कहा जा रहा है कि यूरोप में रूस और स्पेन के सहयोग से जीते.

इसके बावजूद भ्रष्टाचार तो था ही. इसके अलावा चुनाव जीतते ही ब्लैटर ने अपरिपक्व बयान दिया कि अमरीका को दुख हो रहा है कि क़तर को विश्व कप क्यों मिला.

अब तो हालात यह है कि क़तर और रूस को मिले विश्व कप पर भी खतरा मंडरा रहा है.

शनिवार तक लग रहा था कि फ़ीफ़ा अपने निर्णय को बदलती नही है क्योंकि इससे एक ग़लत संदेश जाएगा कि दबाव डालो और निर्णय बदलो, और अगर ऐसा हुआ तो और भी बुरा होगा.

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भारत पर असर

ब्लैटर का निर्णय सही था कि विश्व कप एक नई जगह जा रहा है क्योंकि विश्व कप इससे पहले यूरोप में तो कई जगह हो ही चुका है.

अब डर लग रहा है कि इस पर भी तलवार लटक सकती है.

अब फ़ीफ़ा को नए चुनाव भी जल्दी ही कराने होंगे.

इससे अब जो नए फ़ीफ़ा अधिकारी आएंगे वह भारत को कोई बड़ी मेज़बानी नही देंगे. ब्लैटर से अधिक जुडाव से भारत के फुटबॉल से जुड़े बडे सपने अब पूरे नही होंगे.

(खेल पत्रकार आदेश कुमार गुप्त से बातचीत पर आधारित. ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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