फ़ीफ़ा रिश्वतकांड: एक करोड़ डॉलर का क्या किया?

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बीबीसी ने ऐसे दस्तावेज़ देखे हैं जिनसे पता चलता है कि फ़ीफ़ा के पूर्व उपाध्यक्ष जैक वार्नर ने रिश्वत के रूप में मिली एक करोड़ डॉलर की धनराशि का कैसे इस्तेमाल किया.

दक्षिण अफ़्रीका की ओर से भेजे गए इन पैसों का इस्तेमाल 'कैरेबियन डायास्पोरा लेगेसी प्रोग्राम' के लिए होना था.

लेकिन दस्तावेज़ो के मुताबिक़ वार्नर ने नकद निकासी, व्यक्तिगत लोन और काले धन को सफ़ेद बनाने में इसका इस्तेमाल किया था.

अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने 72 साल के वार्नर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है लेकिन उनका दावा है कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है.

लेनदेन

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बीबीसी ने जो दस्तावेज़ देखे हैं उनमें फ़ीफ़ा ने तीन बार पैसों का लेन-देन किया है.

चार जनवरी़, एक फ़रवरी और दस मार्च 2008 को कुल एक करोड़ डॉलर फ़ीफ़ा के खातों से कोनाकाफ़ के खातों में भेजे गए जिसका नियंत्रण वार्नर के हाथों में था.

उस समय वार्नर कोनाकाफ़ के कर्ताधर्ता थे जो उत्तर और मध्य अमरीका तथा कैरेबियाई देशों में फ़ुटबॉल का संचालन करता है.

दस्तावेज़ों के मुताबिक़ फ़ीफ़ा के खातों से त्रिनिदाद में जेटीए सुपरमार्केट्स को 48 लाख 60 हज़ार डॉलर भेजे गए.

आरोप

अमरीकी अभियोजकों का कहना है कि इसमें से अधिकांश पैसा स्थानीय मुद्रा में वार्नर को वापस कर दिया गया.

बीबीसी की जांच में यह बात भी सामने आई है कि वार्नर से जुड़े लोगों ने फ़ीफ़ा के खातों से तीन लाख 60 हज़ार डॉलर निकाले.

क़रीब 16 लाख डॉलर का भुगतान वार्नर के क्रेडिट कार्डों और पर्सनल लोन के लिए किया गया.

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वार्नर उन 14 लोगों में शामिल हैं जिन पर अमरीकी अभियोजकों ने फ़ीफ़ा में हुए भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया है.

इन लोगों पर 24 साल के दौरान 15 करोड़ डॉलर से अधिक रिश्वत लेने का आरोप है.

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