फ़िक्सिंग में बैन होने वाले भारतीय खिलाड़ी

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क्रिकेट में मैच फ़िक्सिंग और स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोपों की शुरुआत 90 के दशक में हुई थी और इसमें दिग्गज भारतीय क्रिकेटरों का नाम सामने आया था.

इनमें से कई क्रिकेटरों पर प्रतिबंध भी लगे.

लेकिन मई 2013 में आईपीएल-6 के दौरान जब दिल्ली पुलिस ने श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजीत चंडीला के साथ 16 सटोरियों को गिरफ़्तार किया तो यह फिर से सुर्खियों में आ गया.

आइए, उन भारतीय खिलाड़ियों पर एक नज़र डालें, जिनका करियर फ़िक्सिंग के कारण असमय ही ख़त्म हो गया.

कैसे होती है 'स्पॉट फ़िक्सिंग'?

मोहम्मद अज़हरुद्दीन

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एकदिवसीय क्रिकेट में भी वे भारत के सफलतम कप्तानों में से एक रहे हैं क्योंकि उनके नेतृत्व में टीम ने 103 मैच जीते थे.

लेकिन हैंसी क्रोनिए के इक़बालिया बयान में अज़हरुद्दीन का नाम आया जिसमे उन पर क्रोनिए को सट्टेबाज़ों से मिलवाने के आरोप लगे.

सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की. हालांकि अज़हरुद्दीन ने बाद में कुछ भी क़ुबूल करने से इनकार किया था लेकिन भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने वर्ष 2000 में उन पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था.

अजय जडेजा

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अजय जडेजा अपने ज़माने में एकदिवसीय क्रिकेट के सबसे बेहतरीन खिलाडियों मे से एक थे.

सीबीआई जांच के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उन पर भी पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था जिसे जडेजा ने बाद में चुनौती भी दी.

हालांकि बाद में उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने की इजाज़त मिल गई थी और उन्होंने दिल्ली और राजस्थान की टीमों की कप्तानी भी की.

इन दिनों वो एक सफल क्रिकेट विश्लेषक हैं.

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अजय शर्मा

साल 2000 में भारतीय क्रिकेटर अजय शर्मा पर मैच फ़िक्सिंग का आरोप लगा और बीसीसीआई की अनुशासन समिति ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया.

लेकिन 2014 में दिल्ली की एक कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया.

उन्होंने बीसीसीआई की ओर से जांच के लिए के माधवन की नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी थी.

शर्मा ने 1988 से 1993 के बीच एक टेस्ट और 31 एक दिवसीय मैच खेले और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कुल 129 मैचों में 67.46 के औसत से 10,120 रन उनके नाम हैं.

मनोज प्रभाकर

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1990 के दशक में मनोज प्रभाकर भारतीय क्रिकेट टीम का अभिन्न अंग थे. वे भारतीय गेंदबाजी की शुरुआत करते थे और कम रन देने के लिए मशहूर थे.

लेकिन 1995-96 में टीम से बाहर किए जाने के बाद ही उन्होंने अपने संन्यास की घोषणा कर सभी को सकते में ला दिया था.

बाद में उन्होंने कपिल देव समेत कई भारतीय खिलाड़ियों पर मैचफ़िक्सिंग के गंभीर आरोप लगाए थे जिनसे उनकी खुद की जांच भी हुई थी.

जांच के बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने उन पर भी पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया था.

बैन ख़त्म होने के कुछ साल बाद मनोज प्रभाकर ने राजनीति में एक असफल पारी खेली और फिर क्रिकेट कोचिंग में तल्लीन हो गए.

श्रीसंत

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आईपीएल-6 के दौरान स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप में 16 मई 2013 को गेंदबाज़ श्रीसंत को अन्य खिलाड़ियों और सटोरियों के साथ गिरफ़्तार कर लिया गया था.

पुलिस ने उनपर 420 और 120बी के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया.

मामले की जांच हुई और इसके इसे बीबीसीआई की अनुशासन समिति को सौंप दिया गया.

बीसीसीआई की अनुशासन समिति ने सितंबर 2013 में श्रीसंत पर क्रिकेट खेलने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया.

गिरफ़्तार होने से पहले वो राजस्थान रॉयल्स की ओर से आईपीएल में खेल रहे थे. अपने क्रिकेट कैरियर में उन्होंने 92 मैच खेले जिनमें उन्होंने कुल 169 विकेट लिए.

अंकीत चाव्हाण

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आईपीएल-6 के दौरान स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप में जिस दूसरे खिलाड़ी पर क्रिकेट खेलने से आजीवन प्रतिबंध लगाया गया वो थे गेंदबाज़ अंकीत चाव्हाण.

अंकीत भी राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल चुके हैं.

फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट के 18 मैचों में उन्होंने 53 विकेट लिए थे जबकि ट्वेंटी 20 के 26 मैचों में उनके नाम 19 विकेट हैं.

अमित सिंह

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मैच फ़िक्सिंग को लेकर बीसीसीआई की अनुशासन समिति ने क्रिकेटर अमित सिंह को पांच साल का प्रतिबंध लगाया था.

राजस्थान रॉयल्स की टीम के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ अमित सिंह ने ट्वेंटी 20 क्रिकेट फॉर्मेट में कुल 30 मैच खेले जिनमें उनके नाम 34 विकेट हैं. जबकि फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 20 मैच खेले और 52 विकेट लिए.

अमित सिंह ने 2012-13 में रणजी ट्राफ़ी में गुजरात की ओर खेला था और 2009 से 2012 के बीच राजस्थान रॉयल्स की टीम में रहे और इस दौरान उन्होंने 23 मैच खेले थे.

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