'... तो शायद क्रिकेट का नाम बदलना पड़े'

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यह सही है कि साल 2015 लिएंडर पेस, सानिया मिर्ज़ा और सुमित नागल के विंबलडन में ऐतिहासिक प्रदर्शन के लिए याद रखा जाएगा.

लेकिन यह भी सच है कि जिस देश में क्रिकेट दीवानगी की सीमा पार कर जाता है वहां आईपीएल घोटाला भारतीय खेलों की दुनिया की सबसे बड़ी घटना मानी जाएगी.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व में फुटबॉल को चलाने वाली संस्था फ़ीफ़ा में हुई घूसखोरी और घोटाले ने भी सबको चकित कर दिया.

समानता

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अगर ध्यान से देखा जाए तो फ़ीफ़ा और आईपीएल घोटाले में बहुत समानता है.

अगर फुटबॉल विश्व में सबसे लोकप्रिय खेल है तो भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता का कोई सानी नहीं है.

दोनों में ही पैसा बोलता है और दोनों के ही अधिकारियों को समाज का ठेकेदार माना जाता है.

जहां भारतीय क्रिकेट बोर्ड भारत का सबसे अमीर खेल संघ है तो वहीं विश्व में भी उसका अच्छा दबदबा है.

फ़ीफ़ा तो विश्व का सबसे अमीर खेल संघ है ही और शायद इसलिए दोनों घोटालों में पैसे का मुख्य किरदार रहा है.

'मुनाफ़ा अहम'

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खेल अब महज़ खेल ना रह कर एक उद्योग बन गया है और जिस तरह कारोबार में अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लिए कई दफ़ा गलत तरीके अपनाए जाते हैं उसी तरह खेल में भी हो रहा है.

फ़ीफ़ा और उसके अध्यक्ष सेप ब्लैटर पर हेराफेरी और घपले के आरोप काफी समय से लगते रहे थे.

लेकिन जब साल 2001 में फ़ीफ़ा ने अपनी ही संस्था इंटरनेशनल स्पोर्ट्स एंड लेज़र को दीवालिया घोषित किया तो सबके कान खड़े हो गए.

इन गड़बड़ियों पर कई किताबें छपीं और डॉक्यूमेंट्री भी बनी. जब उम्मीद के खिलाफ रूस को 2018 और क़तर को 2022 के विश्व कप की मेज़बानी मिली तो सबके सब्र का बांध टूट गया.

मीडिया और यहां तक कि अमरीका की पुलिस की लगातार छानबीन के बाद एक के बाद एक परत खुलती गईं और दोनों मेज़बानी के पीछे पैसे का हाथ होने के आरोप लगे.

लेकिन मज़े की बात यह है कि इतना कुछ हो जाने के बाद भी फ़ीफ़ा के अध्यक्ष ब्लेटर अपनी गद्दी पर डटे रहे.

गिरफ़्तारी

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इस वर्ष मई के महीने में छानबीन की सरगर्मी के बाद फ़ीफ़ा के नौ उच्च स्तरीय अधिकारियों को पुलिस ने गिरफ़्तार भी किया लेकिन ब्लैटर का बाल भी बांका नहीं हुआ.

गिरफ्तार होने वालों में राफेल इस्क़ुवेल (वेनेज़ुएला), यूजीनओ फिगुरेला (उरुग्वे), निकोलस लीओज़ (पेराग्वे), एडुआर्ड ली (कोस्टा रिका), होज़े मरीआ (ब्राज़ील), जुलिओ लोपेज़ (निकारागुआ), एस्टोस तकास (केमैन आइलैंड), जेफ्री वेब (केमैन आइलैंड), जेफ्री वेब्ब (केमैन आइलैंड) और कार्लोस चावेज़ (बोलीविया) शामिल हैं.

ब्लैटर ही की तरह भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष श्रीनिवासन के ऊपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई जबकि आईपीएल की दो टीमों के साथ उनके मालिकों का भी क्रिकेट से बहिष्कार कर दिया गया.

संकट

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फ़ीफ़ा की ही तरह भारतीय क्रिकेट बोर्ड पर भी पिछले कुछ समय से धांधली और हेराफेरी के आरोप लगते रहे हैं.

लेकिन बड़ी मछली अब भी जाल से बाहर है.

क्रिकेट को अमूमन जेंटलमैन्स गेम कहा जाता है और किसी भी क्षेत्र में अगर कोई गलत बात दिखे तो लोग अक्सर कह देते हैं 'दिस इज़ नॉट क्रिकेट' लेकिन मौजूदा हालात को देखकर लगता है कि यह सोच जल्द बदल जाएगी.

और 'ब्यूटीफुल गेम' कहे जाने वाले फुटबॉल के लिए भी शायद कोई नया नाम ढूंढना पड़े!

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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