डोपिंग: 'आईआईएएफ़ रिपोर्ट दबा रहा है'

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अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईआईएएफ़) पर एक ऐसे अध्ययन को दबाने का आरोप लगा है जिसमें दुनिया के एक तिहाई शीर्ष एथलीटों ने ड्रग कानूनों का उल्लंघन करने की बात स्वीकार की है.

'संडे टाइम्स' अख़बार और जर्मन ब्रॉडकास्टर एआरडी के मुताबिक़ चार साल पहले हुए अध्ययन में सैकड़ों एथलीटों ने गुप्त रूप से अध्ययनकर्ताओं के समक्ष यह बात मानी थी कि उन्होंने प्रदर्शन बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल किया था.

आईआईएएफ़ का कहना है कि इस बात पर अभी चर्चा चल रही है कि इस अध्ययन के आंकड़ों को प्रकाशित किया जाए या नहीं.

'संडे टाइम्स' ने कुछ दिन पहले अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सबूतों के आधार पर विशेषज्ञों ने शक जताया है कि 2001 से 2012 के बीच हुए ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में मेडल जीतने वाले एक तिहाई एथलीटों ने प्रतिबंधित दवाओं या फिर प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन किया था.

5000 एथलीटों के 12,000 रक्त जाँच नमूनों के नतीजों पर आधारित इस रिपोर्ट के बाद 800 एथलीट शक़ के घेरे में हैं.

प्रकाशन में बाधा

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जर्मनी के टबिनगन विश्वविद्यालय का कहना है कि आईएएएफ़ इस रिपोर्ट के प्रकाशन में बाधाएँ डाल रहा है.

'संडे टाइम्स' ने विश्वविद्यालय के हवाले से कहा है कि यह अध्ययन को एक स्वतंत्र वैज्ञानिक अनुसंधान परियोजना के रूप में शुरू किया गया था और इसे आईएएएफ़ ने कमीशन नहीं किया था.

विश्वविद्यालय का कहना है कि बिना वजह आईएएएफ़ रिपोर्ट के प्रकाशन में देरी कर रहा है जो प्रकाशन की स्वतंत्रता का हनन है.

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