कोलंबो टेस्टः भारतीय टीम पर चौतरफा दबाव

  • 20 अगस्त 2015
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Image caption भारतीय कप्तान विराट कोहली और श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज़.

भारत और श्रीलंका के बीच गुरुवार से कोलंबो में मौजूदा टेस्ट सिरीज़ की दूसरा टेस्ट मैच शुरू हो रहा है.

दुनिया के महान विकेटकीपर बल्लेबाज़ कुमार संगकारा का यह आखिरी टेस्ट मैच है.

एकदिवसीय और ट्वेन्टी-ट्वेन्टी क्रिकेट को वह पहले ही अलविदा कह चुके हैं.

ज़ाहिर है कि कोलंबो में श्रीलंकाई टीम भावनात्मक उफ़ान पर होगी, दूसरी तरफ पहला टेस्ट मैच 63 रन से गंवाने वाली भारतीय टीम के सामने तो सिरीज़ बचाने का दबाव होगा.

तीन टेस्ट मैचों की सिरीज़ में रोमांच भी तभी बचेगा जब भारतीय टीम हार से बचेगी.

भारत के कप्तान विराट कोहली पहले टेस्ट मैच में हार के बाद भी निराश नहीं हैं.

हिचकिचाहट

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विराट ने माना कि कई बार टीम हिचकिचाहट से खेलती है और खिलाड़ी खुलकर बोल नहीं पाते कि उनके दिमाग़ में क्या चल रहा था.

पिछले मैच के बाद खिलाड़ियों में बातचीत हुई और अगर मैच में पहले जैसी परिस्थिति बनती है तो वह अपने अनुभव से उसका सामना कर सकते हैं.

अब यह तो मैदान से बाहर की बात हुई जबकि सच्चाई यह है कि पहले टेस्ट मैच में भारत को, फॉर्म में चल रहे सलामी बल्लेबाज़ मुरली विजय का टीम से बाहर होना महंगा पड़ा.

धवन बाहर

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बिलकुल वैसी स्थिति कोलंबो में भी है क्योंकि अब पिछले मैच में शतक जमाने वाले सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन चोटिल होकर बाहर हैं.

मुरली विजय तेज़ी से फिट हो रहे हैं. इसके बावजूद के एल राहुल और रोहित शर्मा का बल्ला अगर नहीं चला तो टीम की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

ऐसा लगता है कि विराट कोहली कोलंबो में बल्लेबाज़ी को मज़बूत करने के लिए टीम में आलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी को हरभजन सिंह की जगह शामिल कर सकते हैं.

ऐसे में चेतेश्वर पुजारा एक बार फिर टीम से बाहर रहेंगे.

दूसरी तरफ पहले टेस्ट मैच में जीत के बाद श्रीलंका के हौसले बुलंद हैं.

कुमार संगकारा

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श्रीलंकाई कप्तान एंजेलो मैथ्यूज़ का कहना है कि श्रीलंका क्रिकेट का महान क्रिकेटर, महान सेवक और महान इंसान क्रिकेट को अलविदा कह रहा है.

उन्होंने जो कुछ किया उसका उचित आभार व्यक्त नहीं कर सकते. ज़ाहिर है कि कोलंबो में श्रीलंकाई दर्शकों और टीम के खिलाड़ियों का मनोबल और मैचों से अलग होगा.

श्रीलंकाई बल्लेबाज़ों ने पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में शानदार बल्लेबाज़ी कर भारतीय गेंदबाज़ों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया और गेंदबाज़ों ने भारतीय बल्लेबाज़ों को आइना दिखा दिया है कि उनमें दबाव में खेलने की कुव्वत नहीं है.

ऐसे में भारतीय कप्तान विराट कोहली कुछ भी कहें लेकिन दबाव निश्चित रूप से भारत पर ही होगा.

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