'पेशेवर मुक्केबाज़ी में कामयाबी आसान नहीं'

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पेशेवर होने जा रहे भारतीय मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह मानते हैं कि यहां कामयाब होना उनके लिए आसान नहीं होगा.

10 अक्तूबर को मैनचेस्टर में विजेंदर अपने पहला पेशेवर मुक़ाबला सोनी व्हीटिंग के ख़िलाफ़ खेलेंगे.

मुक़ाबले के पहले मैनचेस्टर की रिंग में पसीना बहाते हुए भारतीय स्टार ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में अपनी चिंता ज़ाहिर की.

विजेंदर के मुताबिक़, भारत के मुक्केबाज़ उनके पहले भी प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में हाथ आज़मा चुके हैं. लेकिन किसी को ज़्यादा क़ामयाबी हासिल नहीं हुई.

'ऐसिड टेस्ट'

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इससे विजेंदर के हौसलों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा है. उन्हें उम्मीद है कि वे पेशेवर मुक्केबाज़ी में भी ख़ुद को साबित ज़रूर करेंगे. विजेंदर पूरी तैयारी के साथ रिंग में उतरना चाहते हैं.

विजेंदर ब्रिटेन में मिल रहे समर्थन से काफ़ी उत्साहित हैं.

विजेंदर कहते हैं, "मैनचेस्टर में भारतीय और एशियाई मूल के लोगों का समर्थन पाने से मेरे हौसले और बुलंद हैं. फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी उन्हें काफी समर्थन मिल रहा है."

तीन ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके और कई खिताब अपने नाम कर चुके विजेंदर के लिए एक बार फिर ख़ुद को साबित करने की चुनौती होगी.

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