क्या धोनी की कप्तानी का समय गया?

महेंद्र सिंह धोनी,विराट कोहली इमेज कॉपीरइट AFP

पहले बांग्लादेश के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़, फिर घर में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ में शिकस्त और कानपुर वनडे में जीत की दहलीज़ पर पहुँचने के बाद मिली हार.

क्या वाक़ई बेहतरीन दांव लगाने के लिए जाने जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी अब चूकने लगे हैं. या टेस्ट या वनडे टीमों के लिए अलग-अलग कप्तान बनाने की थ्योरी भारतीय टीम को रास नहीं आ रही है?

क्रिकेट विशेषज्ञों और इस खेल के दीवानों के बीच अब ये चर्चा आम हो गया है.

भारत के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरूद्दीन ने भी कहा है कि अगर धोनी अच्छा प्रदर्शन नही करते तो चयनकर्ताओं को सोचना चाहिए. कुछ ऐसा ही मानना भारत के पूर्व आलराउंडर अजित अगरकर का भी कहा.

तो क्या अब समय आ गया है कि वनडे टीम की कमान भी टेस्ट कप्तान विराट कोहली को सौंप दी जाए.

समय आ गया है विराट का दौर!

इमेज कॉपीरइट AFP

क्रिकेट समीक्षक प्रदीप मैगज़ीन मानते हैं कि विराट कोहली टेस्ट टीम के कप्तान तो हैं ही, अब समय आ गया है कि उन्हें ही एकदिवसीय क्रिकेट की कमान भी सौंप देनी चाहिए.

महेंद्र सिंह धोनी वैसे भी अब अधिक क्रिकेट खेलने वाले नहीं हैं. अब दो प्रारूप में अलग-अलग कप्तान बनाए रखने से कोई लाभ नही हैं.

उनका मानना है कि विराट कोहली को तो कप्तान बनना ही है. इसके अलावा धोनी की उम्र भी बढ़ रही है और वह फ़ॉर्म में भी नहीं हैं.

हालाँकि प्रदीप मैगज़ीन मानते हैं कि एक विकेटकीपर के रूप में धोनी अभी टीम में बने रह सकते हैं क्योंकि उनका कोई विकल्प फ़िलहाल नहीं है.

बैटिंग में नंबर गेम

इमेज कॉपीरइट PTI

बल्लेबाज़ी क्रम को लेकर भी खींच-तान देखने को मिल रही है.

अजिंक्य रहाणे को नंबर तीन और विराट कोहली को नंबर चार पर खिलाने की धोनी की रणनीति को लेकर प्रदीप मैगज़ीन का मानना है कि अगर टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री यह सोच रहे हैं कि टेस्ट मैच में कोई भी कहीं भी खेल सकता है तो फिर विराट कोहली को क्यों तकलीफ़ हो रही है.

मैगज़ीन सवाल करते हैं कि विराट ने पहले कहा कि रोहित शर्मा टेस्ट में नंबर तीन पर खेलेंगे, फिर उन्हें टीम में बनाए रखने के लिए नंबर पांच पर भेज सकते हैं तो धोनी रहाणे को नंबर तीन पर क्यों नही भेज सकते?

हालाँकि प्रदीप मैगज़ीन कहते हैं कि धोनी की कप्तानी को लेकर चर्चा करना अभी जल्दबाज़ी है क्योंकि अगर भारत कानपुर में जीत जाता तो शायद यह सवाल भी नहीं उठता.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार