..तो बीसीसीआई पर बरसते रहेंगे करोड़ों

  • 12 दिसंबर 2015
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पिछले दिनों बीसीसीआई ने आईपीएल के आगामी दो सीज़न के लिए दो नई टीमों पुणे और राजकोट- का ऐलान किया है.

असल में इसी साल आईपीएल-6 में कथित रूप से सट्टेबाज़ी और स्पॉट फ़िक्सिंग से जुड़े विवादों के कारण चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया था.

आईपीएल पर विवाद कोई नई बात नहीं, शुरू से ही इसका नाता विवादों से रहा है.

ग्लैमर और लोकप्रिय खेल क्रिकेट के संगम की बात भारत के एक निजी समूह ने कुछ साल पहले सोची थी और भारतीय क्रिकेट लीग को जन्म दिया.

तब बीसीसीआई का माथा ठनका और इस कुबेर के ख़जाने को किसी और के हाथों में जाने से रोकने की क़वायद शुरू हुई.

फिर क्या था बॉलीवुड की चमक-धमक और क्रिकेट की आतिशबाज़ी के पीछे दीवानी दुनिया के सामने बीसीसीआई ने ऐसी थाली परोसकर सजाई जिसमें चौकों छक्कों की बरसात तो थी ही मैच देखते-देखते खाने-पीने, खासकर पीने और मशहूर गानों की धुनों पर थिरकती चियर गर्ल्स भी थीं.

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2007 में टी20 विश्वकप में भारत को मिली जीत ने लोकप्रियता के इस अचूक फॉमूले को अपनाने का रास्ता साफ़ किया और सपना साकार करने की भूमिका सौंप दी गई ललित मोदी को, जो खुद इसके सूत्रधार भी थे.

2008 में शुरू हुई लीग ने देखते-देखते एक ऐसे ब्रांड का रूप ले लिया जिसकी क़ीमत 2014 में 7.2 अरब डॉलर आंकी गई.

महानगरों के नाम पर आठ टीमें बनीं. दुनिया भर के खिलाडि़यों की बोली लगी. कॉर्पोरेट जगत के नामी-गिरामी लोगों के साथ बॉलीवुड से जुड़ी हस्तियों ने भी लीग में छिपे टकसाल को देखा और मैदान में कूद पड़े.

भारतीय राष्ट्रीयता के प्रतीक बने किक्रेट का नया रंग देखने को मिला जिसमें विदेशी खिलाड़ियों को देशी टीम के समर्थकों ने अपने दिलो-दिमाग़ में प्यार से बिठाया.

शेन वार्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स पहले आईपीएल विजेता बनी और चेन्नई सुपर किंग्स को दूसरा स्थान मिला.

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मगर तय हो गया कि आईपीएल न सिर्फ़ भारतीय बाज़ार को लुभाने वाला फ़ॉर्मूला है बल्कि दुनिया भर में तहलका मचाने वाला ऐसा जादू है जिसे आईसीसी ने भी अपनाने में देर नहीं की और अपने कैलेन्डर में आईपीएल को भी बड़ी सफ़ाई से जगह दे दी.

2009 में संसदीय चुनाव होने थे मगर आईपीएल की मेजबानी की पेशकश करने वालों की भला कहां कमी थी.

इंद्रधनुषी देश दक्षिण अफ़्रीका में आईपीएल-2 का आयोजन हुआ और दक्षिण अफ़्रीका के लोगों ने भी इसका ज़बर्दस्त लुत्फ उठाया.

एडम गिलक्रिस्ट की कप्तानी में डेक्कन चार्जर्स को मिली जीत. आईपीएल का तीसरा संस्करण भारत लौटा और यू-ट्यूब के साथ-साथ सिनेमाघरों में भी लाइव प्रसारण हुआ, जिसकी लोकप्रियता बढ़ती रही.

चौथे संस्करण में आठ टीमों में दो और टीमें जुड़ीं, पुणे वारियर्स और कोच्चि टस्कर्स. 37 करोड़ डॉलर में पुणे की टीम और 33.3 करोड़ में कोच्ची की टीम बेची गई.

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मगर अब इस मसालेदार मनोरंजन के खेल में एक और अध्याय जुड़ा. हेराफेरी और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बीच राजनीति ने भी इसे और मसालेदार बनाया.

ललित मोदी को आईपीएल की अध्यक्षता से निकाला गया और शशि थरूर को भी केंद्रीय मंत्री पद छोड़ना पड़ा.

चौथे संस्करण में धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स को जीत मिली और पांचवें में कोलकाता नाईट राइडर्स को. तभी आईपीएल में सट्टेबाजी और फ़िक्सिंग के क़िस्सों का तड़का लगा.

पांच खिलाड़ी एक स्टिंग ऑपरेशन में कथित स्पॉट फ़िक्सिंग के मामले में पकड़े गए.

मशहूर गेंदबाज़ श्रीसंत पर भी कलंक का टीका लगा और कई टीमों के मालिक भी सट्टेबाज़ी के मायाजाल से नहीं बच पाए.

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जब सर्वोच्च न्यायालय ने सट्टेबाज़ी के साथ हितों के टकराव पर छानबीन की तो बीसीसीआई अध्यक्ष के दामाद के साथ-साथ कई और मशहूर चेहरों पर भी सवाल उठे.

इस बीच पुणे और कोच्ची की टीमें निकल गईं थीं और हैदराबाद टीम का मालिक बदल गया था.

मगर ग्रहण न सिर्फ चेन्नई टीम पर लगा बल्कि राजस्थान रॉयल्स के मालिक पर भी सट्टेबाज़ी के आरोप साबित हुए.

आईपीएल ब्रैन्ड की साख को ज़बर्दस्त झटका लगा. मगर मनोरंजन के इस फॉर्मूले की पकड़ इतनी मज़बूत हो चुकी है कि अब चेन्नई और राजस्थान टीमों पर दो-दो साल के प्रतिबंध के बाद भी इन्हीं दो वर्षों के लिए जब नई टीम के चयन के लिए बोली लगी तो चेन्नई और राजस्थान की जगह पुणे और राजकोट को शामिल किया गया.

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शर्त ये रखी गई कि दोनों को बीसीसीआई से एक पैसा भी नहीं मिलेगा, बल्कि दोनों बीसीसीआई को ही करोड़ों देंगे.

अनुमान है कि बीसीसीआई के मुनाफ़े में 300 करोड़ रुपए का इज़ाफा होगा.

तो जारी रहेगा दंगल और मनोरंजन की दुनिया में लगते रहेंगे चार चांद, आईपीएल की बदौलत और बीसीसीआई के खज़ाने में होती रहेगी पैसों की बरसात.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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