ब्लैटर और प्लैटिनी पर 8-8 साल की पाबंदी

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एथिक्स कमेटी की जांच के बाद फ़ुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय संस्था फ़ीफ़ा के पूर्व प्रमुख सेप ब्लैटर और यूईफ़ा के प्रमुख मिशेल प्लैटिनी पर आठ साल की पाबंदी लगा दी गई है.

सेप ब्लैटर पहले ही फ़ीफ़ा के प्रमुख पद से बर्ख़ास्त किए जा चुके हैं.

इन दोनों को 20 लाख डॉलर यानी लगभग 13 करोड़ 20 लाख रुपए के ग़लत भुगतान का दोषी पाया गया है. फ़ीफ़ की ओर से प्लैटिनी को 2011 में ये रक़म दी गई थी.

लेकिन जांच कमेटी ने पाया कि ये रक़म ग़लत तरीक़े से दी गई थी.

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दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते हुए इसके ख़िलाफ़ अपील करने का फ़ैसला किया है.

इस नई पाबंदी के बाद सेप ब्लैटर और प्लैटिनी आठ साल तक फ़ुटबॉल से जुड़ी किसी भी गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे. तत्काल प्रभाव ने उन दोनों पर पाबंदी लगा दी गई है.

इस पाबंदी के बाद फ़ीफ़ा में ब्लैटर का एक लंबा करियर ख़त्म हो गया है. वो 1998 से फ़ीफ़ा के अध्यक्ष बने हुए थे हालांकि उन्होंने पहली ही ये घोषणा कर दी थी कि फ़रवरी 2016 में फ़ीफ़ा के अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव में वो हिस्सा नहीं लेंगे.

60 साल के प्लैटिनी के बारे में कहा जा रहा था कि वो ब्लैटर की जगह लेंगे. प्लैटिनी तीन बार यूरोपियन फ़ुटबॉलर ऑफ़ द ईयर चुने जा चुके हैं. इसके अलावा वो फ़ांस की फ़ुटबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं.

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वो 2007 से यूईफ़ा के अध्यक्ष बने हुए थे.

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