जब किरमानी ने कपिल से कहा, मारकर मरेंगे

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भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ सैयद किरमानी का कहना है कि 1983 में विश्व कप जीतना उनकी ज़िंदगी का सबसे यादगार लम्हा है.

बीसीसीआई ने इस साल के सीके नायडू लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड के लिए किरमानी को चुना है.

इस मौक़े पर किरमानी ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में अपने क्रिकेट जीवन से जुडे कई यादगार क़िस्से याद किए.

किरमानी ने अपना पहला टेस्ट मैच साल 1976 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ ऑकलैंड में खेला था.

दूसरा टेस्ट मैच क्राइस्टचर्च में खेला गया जहां किरमानी ने न्यूज़ीलैंड की पहली पारी में 6 कैच लपककर उस समय के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की थी.

ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले वह तब केवल चौथे विकेटकीपर थे.

Image caption किरमानी 1983 में विश्व कप विजेता टीम में शामिल थे.

किरमानी साल 1983 में इंग्लैंड में हुए विश्व कप में टीम इंडिया का हिस्सा थे.

उस विश्व कप में ज़िम्बॉब्वे के ख़िलाफ़ टीम के कप्तान कपिल देव के साथ उन्होने नौवें विकेट के लिए नाबाद 126 रनों की साझेदारी निभाई.

कपिल देव ने उस मैच में 175 और किरमानी ने 24 रन बनाए. एक समय तो उस मैच में भारत के 5 विकेट केवल 17 रन पर गिर चुके थे.

इनमें सुनील गावस्कर, श्रीकांत, मोहिंदर अमरनाथ, संदीप पाटिल और यशपाल शर्मा के विकेट शामिल थे.

किरमानी ने बताया कि जब वह विकेट पर पहुंचे तो कप्तान कपिल देव ने कहा कि अब किसी तरह से 60 ओवर तक मैदान में टिकना हैं.

तब किरमानी ने कपिल देव का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि 'आप दुनिया के धुरंधर बल्लेबाज़ हैं, मैं एक गेंद खेलूंगा, बाक़ी पांच गेंद आप खेलेंगे'.

तब कपिल देव 50 रन बनाकर खेल रहे थे. किरमानी ने कपिल से कहा कि 'अब करो या मरो जैसी हालत है और हमें मारकर मरना है'.

उसके बाद की कहानी इतिहास है. किरमानी कहते हैं कि ऐसे हालात में उन्होंने किसी भी आलराउंडर को ऐसी बल्लेबाज़ी करते नहीं देखा.

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किरमानी को उस विश्व कप में सबसे बेहतरीन विकेटकीपर का पुरस्कार मिला.

तब उन्हें चांदी के दस्तानों में चांदी की गेंद जड़ा स्मृति चिह्न मिला था.

किरमानी अपने कैचों में 1983 के विश्व कप में ही वेस्टइंडीज़ के फउद बैकस का कैच सबसे यादगार मानते हैं.

इसके अलावा 1979 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मद्रास टेस्ट मैच में कपिल देव की गेंद पर लैग ग्लांस करते हुए मुदस्सर नज़र का कैच भी उन्हें यादगार लगता है.

किरमानी 88 टेस्ट मैचों में विकेट के पीछे 160 कैच और 38 स्टंप किए. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दो शतकों की मदद से 2759 रन भी बनाए.

इसके अलावा उन्होंने 49 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में 27 कैच और 9 स्टंप के अलावा 373 रन भी बनाए.

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