क्या भारत क्लीन स्वीप से बच पाएगा?

  • 22 जनवरी 2016
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ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ लगातार चार मैच हारने वाली भारतीय क्रिकेट टीम शनिवार को सिडनी में मौजूदा एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय क्रिकेट सिरीज़ का पांचवां और आख़िरी मैच खेलेगी.

अब इस सिरीज़ में दिलचस्पी केवल इतनी बची है कि क्या भारत सिडनी में क्लीन स्वीप होने से बचा पाएगा या नहीं.

भारत के पास पिछले मैच में जीतने का सुनहरा अवसर था, लेकिन केवल 46 रनों के भीतर नौ विकेट गंवाने से उसे शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा.

भारत के सामने जीत के लिए 349 रनों जैसा बड़ा लक्ष्य था लेकिन भारत का दूसरा विकेट 277 रन पर गिरा. तब शायद किसी ने ही सोचा हो कि ऑस्ट्रेलिया मैच में वापसी कर सकता है.

इसके बाद की कहानी पर सब आश्चर्यचकित हैं.

37.3 ओवर में दो विकेट पर 277 रन बनाने वाली पूरी भारतीय टीम 49.2 ओवर में 323 रनों पर लुढ़क गई. इसके साथ ही शिखर धवन की 126 और विराट कोहली की 106 रनों की शतकीय पारी पर पानी फिर गया.

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कमाल की बात है कि इसके बाद भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि नए और युवा खिलाड़ियों के लिए अंतराष्ट्रीय स्तर पर मैदान में जाते ही ऐसे हालात में रन बनाना आसान नहीं होता.

अब भला ख़ुद धोनी और रविंद्र जडेजा और अजिंक्य रहाणे कौन से नए खिलाड़ी हैं, हालांकि रहाणे चोटिल थे.

वैसे धोनी ने हार की ज़िम्मेदारी ईमानदारी से अपने सिर ली.

इस बार ऑस्ट्रेलिया में जिस तरह के विकेट देखने को मिले, उसकी उम्मीद भी शायद ही किसी ने की हो.

अभी तक खेली गई आठ पारियों में केवल एक बार भारतीय टीम पिछले मैच में ऑल आउट हुई.

तीन सौ या तीन सौ से अधिक रन भी लगातार बन रहे हैं.

ऐसा नहीं कि भारतीय गेंदबाज़ ही पिट रहे हैं, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ भी त्राहि-माम, त्राहि-माम कर रहे हैं.

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वह तो ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की फ़ील्डिंग का स्तर बहुत ऊंचा है, जिसकी वजह से कम से कम 30-40 रन का फ़र्क पड़ रहा है.

दूसरी तरफ़ इतनी ख़राब भारतीय फ़ील्डिंग पिछली एकदिवसीय सिरीज़ में भी शायद ही देखी गई हो.

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर, आरोन फिंच, कप्तान स्टीव स्मिथ, ग्लेन मैक्सवैल और जॉर्ज बेली की विकेट के बीच दौड और भारतीय फ़ील्डर्स के हाथों के नीचे से रन चुराने का अंदाज़ निराला है.

अभी तक खेले गए चार मैचों में विकेट बल्लेबाज़ों के लिए स्वर्ग और गेंदबाज़ों के लिए बुरी ही साबित हुई है.

भारत के विराट कोहली अभी तक दो शतक और एक अर्धशतक की मदद से 373, रोहित शर्मा भी दो शतक की मदद से 342, शिखर धवन एक शतक की मदद से 209 रन बना चुके हैं.

दूसरी तरफं ऑस्ट्रेलिया के कप्तान स्टीव स्मिथ एक शतक और एक अर्धशतक की मदद से 287, जॉर्ज बेली एक शतक और एक अर्धशतक के सहारे 206, ऑरोन फिंच एक शतक और एक अर्धशतक की मदद से 222 रन बना चुके हैं.

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गेंदबाज़ी में भारत के उमेश यादव ने अभी तक 39.5 ओवर में 263 रन देकर छह, रविंद्र जडेजा ने 38 ओवर में 211 रन देकर तीन और ईशांत शर्मा ने 30 ओवर में 190 रन देकर छह विकेट लिए हैं.

भुवनेश्वर कुमार को तो 17 ओवर में 111 रन खर्च करने के बाद भी कोई विकेट नहीं मिला.

आर अश्विन को भी दो विकेटों के लिए 19 ओवर में 128 रन देने पड़े. यह आंकड़े गेंदबाज़ों को रुलाने वाले हैं.

अब ऑस्ट्रेलिया क्योंकि जीत के रथ पर सवार है तो उसकी गेंदबाज़ी पर पर्दा डल गया है.

वैसे जेम्स फ़ॉकनर ने 37 ओवर में 235 रन देकर पांच, केन रिचर्डसन ने 28 ओवर में 177 रन देकर छह, हेस्टिंग्स ने 28 ओवर में 154 रन देकर सात विकेट लिए हैं.

ग्लेन मैक्सवैल को तो 19 ओवर में 111 रन देकर भी एक विकेट नहीं मिला तो स्कॉट बोलैंड ने भी एक विकेट के लिए 29 ओवर में 201 रन खर्च किए हैं.

अपनी ज़मीन पर लगातार 19 मैच जीत चुकी ऑस्ट्रेलिया से सिडनी में अगर भारत जीत जाता है, तो शायद इससे इसके बाद होने वाली टी-ट्वंटी सिरीज़ के लिए टीम के हौंसले बढ़ सकते हैं.

वैसे यह भी सच है कि भले ही अभी तक सभी मैचों का नतीजा आखिरी ओवर या उसके आसपास निकला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया कभी भी दबाव में नज़र नहीं आया.

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