फ़िक्सिंग, दर्शक और पैसा पीएसएल की चुनौती?

  • 9 फरवरी 2016
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पाकिस्तान सुपर लीग दो बार स्थगित होने के बाद आख़िरकार हक़ीक़त बनने में सफल हो गई.

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इससे बहुत ख़ुश है कि उसने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद इस लीग को विदेशी क्रिकेटरों से सजा लिया है.

लीग के कर्ताधर्ता नजम सेठी को यक़ीन है कि भारत की इंडियन प्रीमियर लीग के बाद ये दूसरी सबसे महत्वपूर्ण लीग साबित होगी.

टी-20 की लोकप्रियता ने टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले लगभग सभी देशों को इस बात के लिए मजबूर कर रखा है कि वे वाणिज्यिक आधार पर लीग आयोजित करें. हालाँकि इनमें से केवल आईपीएल ही एकमात्र लीग है जो कई विवादों और समस्याओं में घिरे रहने के बावजूद अभी तक क़दम जमाए हुए है.

आईपीएल में कई फ्रेंचाइज़ी की ख़राब माली हालत की सूचनाएं आती रहती हैं और स्पॉट फ़िक्सिंग स्कैंडल से भी उसका दामन दाग़दार हुआ है.

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दूसरी ओर, श्रीलंकाई लीग केवल एक बार आयोजित हुई और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई.

बांग्लादेश ने इस साल अपनी लीग शुरू ज़रूर की, लेकिन अतीत में मैच फ़िक्सिंग के कारण उसका भी दामन साफ़ नहीं रहा है.

इस परिस्थितियों में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और पाकिस्तान सुपर लीग के कर्ताधर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह पाकिस्तान की पहली लीग को किसी भी तरह के विवाद में न फंसने दे, क्योंकि पाकिस्तानी क्रिकेट अब भ्रष्टाचार के किसी भी विवाद को बर्दाश्त नहीं कर सकती.

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पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान सुपर लीग के बारे में साफ़ तौर पर कह दिया है कि अभी तुरंत इस लीग के लाभ की उम्मीद नहीं रखी जानी चाहिए.

पाकिस्तान क्रिकेट लीग की असली परीक्षा ये होगी कि इसकी फ्रेंचाइज़ी कैसे और कब तक घाटा सहन पर पाएंगी. इस लीग के लिए टीवी के प्रसारण अधिकारों का कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका जिससे इन पाँच फ्रेंचाइजी को बड़ी राशि मिल सके.

पाकिस्तान क्रिकेट लीग की एक और बड़ी चुनौती दुबई और शारजाह के मैदानों को दर्शकों से भरने की होगी.

संयुक्त अरब अमीरात में जारी बीते ज़माने के दिग्गज खिलाड़ियों की लीग मास्टर्स चैंपियन में ब्रायन लारा, जैक्स कैलिस, एडम गिलक्रिस्ट, मुरलीधरन और कुमार संगकारा का आकर्षण भी दर्शकों को अपनी ओर नहीं खींच सका है, ऐसे हालात में पाकिस्तान सुपर लीग में दर्शकों की असाधारण रुचि भी आयोजकों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

पाकिस्तान सुपर लीग में बहुमत पाकिस्तानी क्रिकेटरों का है और इसमें कुछ ही बड़े विदेशी नाम शामिल हैं.

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हालाँकि इस लीग के टिकट महंगे नहीं हैं, लेकिन ये बात सभी अच्छी तरह जानते हैं कि संयुक्त अरब अमीरात में एशियाई लोगों की बड़ी संख्या नौकरीपेशा है और वे सिर्फ़ छुट्टी के दिनों में ही मैच देखने मैदान तक पहुँच पाते हैं.

पाकिस्तान सुपर लीग के बारे में हर कोई यही बात कहता हुए दिखाई देता है कि ये पाकिस्तान क्रिकेट की नई दिशा तय करेगी, लेकिन यह सवाल भी अपनी जगह महत्वपूर्ण है कि क्या देश से बाहर होने वाली ये लीग पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट दोबारा शुरू करने के लिए दुनिया को राज़ी कर सकेगी?

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