कभी ट्रेनिंग के पैसे न थे, अब नाथू करोड़ों में..

  • 16 फरवरी 2016
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असल ज़िंदगी की कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सपनों पर यक़ीन करना सिखाती हैं. राजस्थान के सीकर ज़िले से 20 साल के क्रिकेटर नाथू सिंह की कहानी भी ऐसी ही है.

वायर फ़ैक्ट्री में एक कामगार भरत सिंह के बेटे नाथू के लिए आसान नहीं था कि वह क्रिकेटर बनने का ख़्वाब भी देखते. टीवी पर क्रिकेट देखकर क्रिकेटर बनने का शौक सवार हुआ.

टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने से शुरुआत हुई. जमकर गली क्रिकेट खेला और कभी ये ख़्वाहिश धुंधली पड़ने नहीं दी कि एक दिन राष्ट्रीय टीम में जगह बनानी है.

चंद फ़र्स्ट क्लास मैच खेलने वाले नाथू सिंह फ़िलहाल आईपीएल की मुंबई इंडियंस टीम में साल 2016 के सीज़न के लिए अपनी जगह पक्की कर चुके हैं.

टीम ने उनपर तीन करोड़ बीस लाख ख़र्च किए जबकि उनका बेस प्राइस 10 लाख था. उधर मार्टिन गप्टिल और हाशिम अमला जैसे खिलाड़ियों को ख़रीदने वाला कोई न था.

बचपन के खिलंदड़े दिनों को याद करते हुए नाथू कहते हैं, ''मम्मी-पापा दोनों डांटते थे खेलने पर, लेकिन सुबह से लेकर शाम तक खेलता रहता था."

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"पढ़ाई-लिखाई में दिलचस्पी नहीं थी मेरी, सिर्फ़ क्रिकेट खेलता था दिनभर...सुबह सात बजे घर से निकलता था और पांच बजे घर में घुसता था.''

बारहवीं पास करते करते नाथू को ये बात समझ आ गई कि उनकी ज़िंदगी किताबों से नहीं, क्रिकेट से बनेगी. अब क्रिकेट गिल्ली डंडा नहीं कि उसमें ट्रेनिंग की ज़रूरत न हो, और गली में खेल कर काम बन जाए.

मां-बाप मान भी गए कि बेटे को क्रिकेट खेलना है, लेकिन एक फ़ैक्ट्री में काम करने वाले पिता के पास ट्रेनिंग अकेडमी के लिए पैसा कहां से आएगा.

तो क्या किया नाथू सिंह के पिता ने?

नाथू बताते हैं कि ''शुरूआत में उन्हें बहुत दिक़्क़त हुई. मेरे पापा ने सोलह घंटों तक शिफ़्ट करके जो भी पैसा कमाया उन्होंने मेरी ट्रेनिंग में लगाया. उन्होंने मुझे साफ़ कहा कि हमारी इतनी हैसियत नहीं है. पांच-छह महीने से ज़्यादा का ख़र्च नहीं उठा पाएंगे. उसके बाद तुम्हें अपना ख़र्च ख़ुद उठाना होगा और मैं साल भर भी ऐकेडमी में पूरा नहीं कर सका."

"बाद में जब मैं मैच खेलने लगा तो थोड़े पैसे आने लगे. आज भी मैं ट्रेनिंग के लिए ऐेकेडमी नहीं जाता, जब तक कोई मुझे ऐसे ही प्रैक्टिस करने की इजाज़त न दे दे.''

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नाथू को अपने हुनर पर भरोसा है और वह कहते हैं कि वह 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से बॉलिंग कर सकते हैं. लेकिन उस स्पीड को और आगे ले जाकर दुनिया के सबसे तेज़ बॉलर बनने का ख़्वाब देखते हैं.

अब तक उन्हें हर क़दम पर मदद करने वाले मिलते रहे हैं. राहुल द्रविड़ ने राजस्थान क्रिकेट प्रशासन को उनका ख़्याल रखने की बात कही और युवराज सिंह ने भी उनका हौसला बढ़ाया.

लेकिन क्रिकेट में भ्रष्टाचार की बातें क्या भारतीय टीम में खेलने के उनके सपने को क़मज़ोर नहीं करतीं.

नाथू कहते हैं, ''भ्रष्टाचार की बातें तो मैंने भी सुनी हैं लेकिन मैं नहीं मानता. मुझे तो हमेशा मदद करने वाले लोग मिले हैं और मैं इंडिया के लिए खेलूंगा और ज़रूर खेलूंगा.''

शोएब अख़्तर से बेहद प्रभावित नाथू सिंह दुनिया का सबसे तेज़ गेंदबाज़ बनने के लक्ष्य पर नज़रें टिकाए हुए हैं, लेकिन शोएब अख़्तर की किस ख़ासियत के वह कायल हैं?

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"वह बहुत आक्रामक हैं. जब वह गेंद फेंकते हैं तो बल्लेबाज़ को निशाने पर रखते हैं. मैं भी वही करता हूं. मुझे उनके खेलने का ये स्टाइल बहुत पसंद है."

वैसे चीफ़ नेशनल सिलेक्टर संदीप पाटिल ने उन्हें दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ बोर्ड इलेवन में खेलने का मौक़ा दिया यानी सिलेक्टर्स की नज़र में वह पहले से हैं.

चंद महीनों के अंदर ही नाथू के साथ बहुत कुछ सकारात्मक हुआ है- रणजी डेब्यू, बोर्ड इलेवन में खेलने का मौक़ा और आईपीएल में आग़ाज़ का मौक़ा.

कामयाबी की ओर बढ़ते क़दम क्या ज़मीन पर रहने देंगे?

नाथू कहते हैं, "कोई चांस नहीं है. मेरी नज़र पैसे पर न कल थी, न आज है और न होगी. जब पैसे की तरफ़ देख ही नहीं रहा हूं, तो उसका असर कैसे होगा."

आईपीएल में तीन करोड़ से ज़्यादा की क़ीमत पर लिए गए नाथू सिंह फ़िलहाल उस पैसे से अपने मां-बाप के लिए एक घर बनाने का इरादा रखते हैं ताकि वे उसमें सुख से रह सकें.

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