'गेल नहीं ब्रेथवेट, फिर भी किया कमाल'

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वर्ल्ड कप टी-20 के ख़िताबी मुक़ाबले में वेस्टइंडीज़ की जीत का श्रेय कार्लोस ब्रेथवेट को देना होगा, क्योंकि जिस तरह से उन्होंने बेन स्टोक्स की पहली चार गेंदों पर छक्का लगाया वह बेहद शानदार था.

बेन स्टोक्स की बात करें तो वह कोई सामान्य गेंदबाज़ नहीं बल्कि वह बेहद तज़ुर्बेकार हैं. उन्होंने सेमीफ़ाइनल में भी बेहद चतुराई से ओवर किए थे.

मैं फिर कहूंगा कि पूरा श्रेय ब्रेथवेट को दिया जाना चाहिए. किसी के लिए भी एक ओवर में 18 रन बनाना आसान नहीं है, ख़ासतौर पर आख़िरी ओवर में.

ब्रेथवेट कोई क्रिस गेल या विव रिचर्ड नहीं हैं. बेशक भविष्य में वो ऐसे धुंआधार बल्लेबाज़ बन सकते हैं. लेकिन अभी उनका अनुभव बेहद कम है. यह मानना पड़ेगा कि कठिन लक्ष्य उनके सामने था. और उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.

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मार्लोन सैमुअल्स ने अच्छी पारी खेली. लेकिन ब्रेथवेट को जब स्ट्राइक मिली तो बहुत कम लोगों ने ऐसा सोचा होगा कि ये मैच वह ख़ुद अपने बल्ले से जिता सकते हैं. जिस तरह से उन्होंने यह दिलेरी दिखाई है, मैं मानता हूं कि उनकी पारी वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट के लिए प्रेरणा बनेगी.

मैं यह नहीं कहूंगा कि ब्रेथवेट को छक्के लगाने के लिए टेलर मेड गेंद मिली, क्योंकि जिस तरह टी20 गेम आगे बढ़ रही है और विकसित हो रही है, उससे एक चीज़ तो साफ़ है कि पावर हिटर्स बहुत ही असरदार बनते हैं.

हमने भारत के ख़िलाफ़ भी यह बात देखी थी कि किस तरह सेमीफ़ाइनल में आंद्रे रसेल और लेंडल सिमंस ने बल्लेबाज़ी की थी.

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लेकिन फ़ाइनल में क्रिस गेल जल्द आउट हो गए. आंद्रे रसेल कोई ख़ास रन नहीं बना पाए और न लेंडल सिमंस चल पाए. लेकिन मार्लोन सैमुअल्स ने अपनी जगह पकड़ ली और ड्वेन ब्रावो के साथ एक साझेदारी बनाई.

इसके बाद जिस पावर हिटिंग की ज़रूरत महसूस की जा रही थी वह ब्रेथवेट ने दिखाई.

मेरे ख़्याल में यह इस टूर्नामेंट की सबसे अच्छी विकेट थी, क्योंकि यहां पर बल्लेबाजों ने रन बनाए. लेकिन इस पिच से तेज़ गेंदबाजों और स्पिनर्स को भी अच्छी खासी मदद मिली.

जो रूट की बात करें तो वह इंग्लैंड के लिए एक चमत्कारी बल्लेबाज़ के तौर पर उभरे हैं. महज तीन साल के भीतर वह दुनिया के शीर्ष बल्लेबाज़ों में शामिल हो गए हैं.

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दुनिया के जिन चार बल्लेबाज़ों पर आने वाले दिनों में निगाहें होनी चाहिए, जो एक ही उम्र वर्ग के हैं उनमें विराट कोहली, विलियमसन, स्टीव स्मिथ और जो रूट शामिल हैं. ये चारों ही बेहद होनहार और अपनी टीम के दिग्गज खिलाड़ी हैं.

जो रूट ने तो कमाल कर दिया, पहले ही ओवर में दो विकेट भी झटक लिए. ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड एकतरफ़ा तरीक़े से मैच जीत जाएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

कहते हैं न कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है और इसमें कभी भी कुछ हो सकता है. इस बार भी ऐसा ही हुआ.

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अगर मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट रहे विराट कोहली की बात करें तो, उन्होंने जहां भी रन बनाए, उन्होंने अपनी टीम को जिताने की कोशिश की. लेकिन सेमीफ़ाइनल का मैच वह नहीं जिता सके लेकिन यह मैच भी 'वन मैन शो' हो गया था.

कितने रन बने और बल्लेबाज़ी की क्वॉलिटी क्या रही इस लिहाज से देखें तो विराट कोहली इस टूर्नामेंट के बेहतरीन बल्लेबाज़ थे.

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