टी-20 से ज़ाहिर हुईं टीम इंडिया की ये 10 बातें

  • 4 अप्रैल 2016
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रविवार को वेस्ट इंडीज़ की ख़िताबी जीत के साथ ही भारत में आयोजित विश्व कप टी-20 टूर्नामेंट समाप्त हो गया.

एक तरफ जहां टी-20 विश्व कप टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले भारत को संभावित विजेता के तौर पर देखा जा रहा था, वहीं उसका अभियान सेमीफ़ाइनल में ही वेस्ट इंडीज़ के हाथों 7 विकेट से हार के साथ समाप्त हो गया. डालते हैं एक नज़र कि भारत ने इस विश्व कप में क्या खोया और क्या पाया.

पांच बातें जो सकारात्मक रूप से भारत के पक्ष में उभरीं.

1. विराट कोहली नम्बर एक खिलाड़ी बनकर उभरे. उन्होंने पूरे विश्व कप में पांच मैचों में 273 रन बनाए.

उन्होंने सेमीफ़ाइनल में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ नाबाद 89 रन बनाए. ग्रुप मैचों में कोहली ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ नाबाद 82 रन बनाए, जिसे ख़ुद उन्होंने भी अपने करियर की बेहतरीन पारियों में से एक माना.

इसके अलावा कोहली ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भी नाबाद 55 रन बनाए.

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2. महेंद्र सिंह धोनी ने सेमीफ़ाइनल में वेस्ट इंडीज़ से हार के बाद अपनी कप्तानी और क्रिकेट करियर पर उठ रहे सवालों का बहादुरी से जवाब दिया.

उन्होंने एक विदेशी पत्रकार को समझाया कि वह कितने फ़िट हैं और अगला विश्व कप भी खेलना चाहते हैं.

इस विश्व कप में ग्रुप मैच में जिस न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ पूरी भारतीय टीम केवल 79 रन पर ढेर हो गई थी, उसमें धोनी ने ही सर्वाधिक 30 रन बनाए थे.

धोनी ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अंतिम ओवर में जो रणनीति अपनाई, वह उन्हें दूसरे कप्तानों से अलग कर गई.

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3. हार्दिक पांड्या ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अंतिम तीन गेंदों पर दो विकेट लिए, वह लम्हा यादगार था.

अगर यह करिश्मा नहीं होता, तो शायद भारत सेमीफ़ाइनल में भी नहीं पहुंच पाता.

पांड्या अभी तक 16 अंतराष्ट्रीय टी-20 मैचों में 15 विकेट ले चुके हैं.

आईपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलने वाले हार्दिक पांड्या, समय के साथ और निखरते जा रहे हैं.

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4. जसप्रीत बुमराह ने सेमीफ़ाइनल में क्रिस गेल को अपनी पहली ही गेंद पर बोल्ड कर दिखा दिया कि वो बेहद दबाव में भी सयंमित रहकर गेंद कर सकते है.

उन्होंने भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी की कमी महसूस नहीं होने दी. बुमराह अभी तक 16 अंतर्राष्ट्रीय टी-20 मैचों में 19 विकेट ले चुके हैं.

उनका साइड आर्म एक्शन बल्लेबाज़ों में भ्रम पैदा करता है.

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5. इसी महीने 29 तारीख़ को 37 साल के होने जा रहे आशीष नेहरा का चयन ऑस्ट्रेलिया के लिए हुआ तो सबको हैरत हुई, लेकिन वो उम्मीदों पर खरा उतरे.

वापसी के बाद उन्हें विकेट तो कम मिले हैं, लेकिन वह बेहद कंजूस गेंदबाज़ साबित हुए हैं. शुरुआती ओवर हो या पारी का अंतिम ओवर, नेहरा अभी भी लाजवाब हैं.

अब उन पांच बातों पर भी एक नज़र डाल लेते हैं, जो निराश कर गईं.

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1. इस विश्व कप में सलामी जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा एक भी मैच में बेहतर शुरुआत नहीं दे सके.

रोहित शर्मा ने सेमीफ़ाइनल मे वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ 43 रन बनाकर अपनी चमक ज़रूर दिखाई, लेकिन पांच मैचों में केवल 88 रन उनकी प्रतिभा से न्याय नहीं करता.

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2. शिखर धवन इस विश्व में चार मैचों में केवल 43 रन बना सके. वो शॉर्ट पिच गेंदों पर परेशान दिखे.

उन्हें सेमीफ़ाइनल से बाहर भी रखा गया, जबकि इससे पहले ऑस्ट्रेलिया में वो जमकर चले थे.

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3. सुरेश रैना ने भी इस विश्व कप में बेहद निराश किया.

कभी मैच जिताऊ पारियां खेलने वाले रैना इस विश्व कप में पांच मैचों में केवल 41 रन बना सके.

उछाल लेती गेंदों पर सर्कल में आसान कैच देकर आउट होना, उनकी सबसे बड़ी कमज़ोरी साबित हुई.

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4. गेंदबाज़ी में महेंद्र सिंह धोनी के सबसे बड़े हथियार आर. अश्विन सेमीफ़ाइनल तक कप्तान का भरोसा खो चुके थे.

वेस्ट इंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ तो उन्हें केवल 2-2 ओवर करने का मौक़ा मिला.

हालांकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उन्होनें चार ओवर में केवल 12 रन दिए.

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5. युवराज सिंह ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ज़रूर जानदार 24 रन बनाए.

इसके बाद भी वो चार पारियों में केवल 52 रन बना सके.

युवराज चोटिल होने के कारण सेमीफ़ाइनल नहीं खेल सके, लेकिन न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 4 और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 3 रन बनाना उनकी नाकामी दिखाता है.

इसके अलावा इस विश्व कप में भारत की फ़िल्डिंग का स्तर भी काफ़ी नीचा था, ऊपर से सेमीफ़ाइनल में गेंदबाज़ों की 'नो बॉल' टीम को ले डूबी.

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