पाकिस्तान भी खेल गया तो क्या बिगड़ गया

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रविवार को वेस्ट इंडीज़ ने इंग्लैंड को चार विकेट से हराकर टी-20 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट का ख़िताब दूसरी बार अपने नाम किया.

लेकिन अब वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाड़ियों और उनके क्रिकेट बोर्ड के बीच तनातनी की ख़बरें छाई हुई है.

भुगतान के मसले को लेकर एक बार तो वेस्ट इंडीज़ टीम भारत आना ही नहीं चाहती थी.

इससे पहले वो एक बार भारत आकर निर्धारित दौरा पूरा किए बिना वापस वेस्ट इंडीज़ लौटने की ग़लती कर चुकी है.

साल 2014 में वेस्ट इंडीज़ की टीम पांच एकदिवसीय अंतराष्ट्रीय मैचों की सिरीज़ के तीन मैच खेलकर ही वापस लौट गई. दो टेस्ट मैच भी होने थे.

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दूसरी तरफ पाकिस्तान की टीम विश्व कप शुरू होने से पहले लगातार चर्चा में थी.

टीम आएगी या नहीं, इसपर तमाम मीडिया से लेकर दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड, खिलाड़ी, आईसीसी के पदाधिकारी और भारत-पाक मैच की मेज़बानी करने जा रहे धर्मशाला के स्थानीय नेता, हिमाचल सरकार सब बेहद सक्रिय थे.

यहां तक कि जब हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सुरक्षा का सवाल उठाया तो पाकिस्तानी जांच दल भी भारत पहुंच गया.

उसने सब कुछ ठीक-ठाक पाया लेकिन पाकिस्तान सरकार ने अड़ंगा लगा दिया.

आखिरकार मैच कोलकाता में हुआ.

भारत पहुंचते ही पाकिस्तान के कप्तान शाहिद आफ़रीदी का दिल बाग़-बाग़ हो गया.

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उन्होंने कहा इतना प्यार तो अपने देश पाकिस्तान में भी नहीं मिला.

इस बात का बतंगड़ बना और पाकिस्तान में तो जैसे भूचाल आ गया.

वहां चारों तरफ आफ़रीदी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठने लगी.

जब दोनों देशों के बीच मैच हुआ तो भारत ने पाकिस्तान को 6 विकेट से हरा दिया.

जब शाहिद आफ़रीदी प्रेजेंटेशन सेरेमनी में पहुंचे तो वहां उन्हें और भी हैरानी हुई.

चारों तरफ शाहिद आफ़रीदी का नाम गूंज रहा था और लोग ताली पर ताली बजा रहे थे.

खचाखच भरे स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर से लेकर अमिताभ बच्चन तिरंगा लहरा रहे थे.

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पाकिस्तान की टीम ने अपना आखिरी मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेला और वह 21 रन से हार गई.

इसी दौरान लगातार ख़बरें आती रहीं कि पाकिस्तान की हार के बाद वहां टेलीविज़न तोड़े जा रहे हैं, खिलाड़ियों को चैनलों पर जमकर लताड़ा जा रहा है.

दूसरी तरफ भारत में कहीं से भी पाकिस्तान के विरोध की कोई आवाज़ सुनाई नहीं दी. ख़ुद पाकिस्तानी खिलाड़ी हैरान थे.

आखिरकार जाते-जाते पाकिस्तान के कप्तान शाहिद आफ़रीदी से फिर किसी ने पूछा अब आप अपने पुराने ब्यान पर क्या कहेंगे.

इस बार तो जवाब के साथ आफ़रीदी ने एक बार फिर भारतीयों का दिल जीत लिया.

उन्होनें कहा कि वह बात तो पढ़े-लिखों के लिए थी, वरना सभी चाहते हैं कि दोनों मुल्क आपस में खेलें.

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मैदान में खड़े शोएब अख्तर और वसीम अकरम पाकिस्तान के गिरते क्रिकेट स्तर पर चर्चा कर रहे थे और मुझे याद आ रहा था साल 1978 का जब भारत ने पाकिस्तान का दौरा किया.

सुनील गावस्कर, चेतन चौहान, गुंडप्पा विश्वनाथ, कपिल देव, किरमानी के अलावा पाकिस्तान के ज़हीर अब्बास, जावेद मियांदाद, इमरान ख़ान, सरफ़राज़ खान, मुश्ताक़ मोहम्मद और आसिफ़ इक़बाल के नाम उन सब लोगों को याद थे जो दिन भर खचेड़ू चाय वाले की दुकान पर टंगे रेडियों से पीपल के पेड़ की मुंडेर पर बैठकर कमेंट्री सुना करते थे.

तब मोहल्ले में गिने-चुने टेलीविज़न ही होते थे.

इसके अलावा चेतन शर्मा की आखिरी गेंद पर जावेद मियांदाद के छक्के को कौन भूल सकता है.

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ऐसे दर्जनों उदाहरण हैं जिनके दम पर पाकिस्तान के खिलाड़ी आज भी भारतीय खेल प्रेमियों के दिलों पर राज करते हैं.

आख़िरकार इस बार भी पाकिस्तान आकर खेल गया तो क्या बिगड़ गया?

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