उठा लिया 160 किलो का हल

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बात जब ताक़त की हो तो दुनिया का शायद ही कोई ऐसा आदमी हो जिसको बल यानि ताक़त नहीं की चाहत न हो.

यही चाहत जुनून की हद तक देखने को मिला वाराणसी में, जब भारत सहित दुनिया भर से 18 बलवानों ने "वर्ल्ड सट्रांगमैन चैंपियनशिप" में अपना दमख़म दिखाया.

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इस विश्वस्तरीय चैम्पियनशिप का आयोजन "वर्ल्ड सट्रांगमैन फ़ेडेरेशन" ने किया. यह पहली बार है जब भारत में इसका आयोजन हुआ है.

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Image caption आयरलैण्ड के मक्वाय बच्चो के साथ पोज देते हुए

इस चैम्पियनशिप में इग्लैंड, बेलारूस, पोलेण्ड, नार्वे, मलेशिया, उज़्बेकिस्तान, इस्टोनिया, आयरलैण्ड, मलेशिया, लेटविया, रूस और भारत से बलशालियों ने शिरकत की. कुल 18 में से 13 खिलाड़ी इसके लिए क्वालिफ़ाई कर सके.

भारत के मुकेश कुमार को इसमें वाइल्ड कार्ड प्रवेश मिला.

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Image caption 'मेडले' प्रतियोगिता के दौरान पोलेण्ड के ज़ारोस्लाव नोवास्की के बांए हाँथ की उंगली चोटिल हो गई और खून निकल आया.

चैम्पियनशिप की शुरूआत "लाॅगलिफ्ट" प्रतियोगिता से हुई जिसमें रूस के मिखेल ने 12 रिपिटिशिन किए और अव्वल रहे.

वहीं "बस पुलिंग" प्रतियोगिता में यूके के मार्क फ्लिक ने बाज़ी मारी.

शनिवार को अंतिम "मेडले" प्रतियोगिता इस्टोनिया के टर्मोंमिट के नाम रही, जिन्होने 1.18 मिनट में 125 किलो का एटलस स्टोन, 175 किलो का शिप एंकर, 156 किलो का एन्विल और 160 किलो लोहे के हल को उठाया.

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