कभी पानी से डरते थे, अब चलाएँगे ओलंपिक में चप्पू !

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‘साल 2007 से 2009 तक मैं अपने पिता के साथ खेती करता था और कुआं खोदने में उनकी मदद करता था.’

ये कहना है 24 साल के भारतीय रोवर दत्तू भोकानल का जिन्होंने भारत के लिए ओलंपिक में रोइंग में जगह बनाई.

जानिए दत्तू के बारे में 10 ख़ास बातें.

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1. बचपन से ही दत्तू का जीवन काफ़ी मुश्किल रहा. उन्होंने पांचवी कक्षा से ही काम में अपने पिता का हाथ बंटाना शुरु कर दिया. दत्तू के पिता गांव में कुएं खोदने का काम करते थे.

2. साल 2011 में अपने पिता के निधन के बाद दत्तू ने अपने गांव से 12 किलोमीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर काम किया जहां वो चार से पांच हज़ार रुपए महीना कमाते थे.

3. दत्तू ने बचपन में एक भी खेल नहीं खेला और वो ग्याहरवीं कक्षा तक पढ़े हैं.

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4. दत्तू तालेगांव से हैं जो नासिक में है और गंभीर रूप से सूखे से प्रभावित है.

5. साल 2012 में दत्तू फ़ौज में भरती हुए और अभी वो 111 इंजीनियरिंग रेजिमेंट में हवलदार हैं.

6. दत्तू, 6 फुट 4 इंच लंबे हैं और इसी की वजह से उन्हें रोइंग में चुना गया. दत्तू ने अपनी ज़िंदगी में सबसे बड़ा जलाशय आर्मी के पुणे स्थित कैंप में देखा.

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7. 24 साल की उम्र के ओलंपिक क्वालिफ़ायर को पानी से डर लगता था और इन्हें तैराकी भी नहीं आती थी. ये सब उन्होंने आर्मी में सीखा. वो डूबने से बचने के लिए किनारों पर चलते थे.

8. दत्तू को तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद चप्पू चलाना आया और एक साल बाद पूरी तरह रोइंग करना सीख गए.

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9. दत्तू के दो भाई हैं और दत्तू सबसे बड़े हैं. बीच वाला भाई खेती करता है और सबसे छोटा आर्मी में आना चाहता है और रोइंग करना चाहता है.

10. एक जादू की छड़ी मिलने पर दत्तू क्या उससे ओलंपिक मेडल हासिल करना चाहेंगे? दत्तू ने कहा, "मैं बस अपने गांव के लिए पानी मांगूंगा."

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