गर्भ के दौरान दौड़ना कितना सुरक्षित?

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अधिकांश महिला खिलाड़ी प्रेग्नेंसी के दौरान भी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जारी रखती हैं.

हाल ही में इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) द्वारा कराए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि इसके उतने ख़तरे नहीं हैं जितना लोग सोचते हैं.

20 मार्च 1983 में नार्वे की एक लंबी दौड़ की धाविका इनग्रिड क्रिस्टियानसेन ने ब्रिटेन में वर्ल्ड क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और 35वें स्थान पर रहीं.

इससे कुछ हफ़्ते पहले से वो काफ़ी थकावट महसूस कर रही थीं. हालांकि कुछ माह पहले वो ह्यूस्टन मैराथन में पहले स्थान पर आई थीं.

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Image caption अपनी पीढ़ी की सबसे मजबूत महिला एथलीटों में से एक क्रिस्टियानसेन ने दिखाया कि मांएं भी रिकॉर्ड बना सकती हैं.

कुछ ही दिनों में पता चला कि वो पांच महीने के गर्भ से हैं. मतलब वो ह्यूस्टन मैराथन के दौरान भी प्रेग्नेंट थीं.

अक्सर महिला एथलीट की माहवारी अनियमित होती है, इसलिए प्रेग्नेंसी का पता न चल पाना सामान्य बात है.

अभी तक 17 महिला खिलाड़ी प्रेग्नेंसी की हालत में ओलंपिक में हिस्सा ले चुकी हैं.

इन्हीं में हैं 2012 के लंदन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली मलेशियाई शूटर नूर सुरयानी ताइनी. इनकी वो तस्वीर बहुत चर्चित रही, जिसमें वो आठ महीने प्रेग्नेंट थी फिर भी हाथ में एयर राइफ़ल लिए हुए थीं.

छह बार की ओलंपिक चैंपियन स्कीयर मारिज जोर्गेन पर पिछले साल लोगों का ध्यान तब गया जब वो स्कैंडिनाविया में एक ट्रेनिंग कैंप में थीं, उस समय वो प्रेग्नेंट थीं.

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जून 2014 में अमरीकी मीडिया में एलिसिया मोंटानों की एक तस्वीर बहुत चर्चित हुई.

अमरीका की फ़ील्ड चैंपियनशिप और यूएस ट्रैक के लिए वो 800 मीटर के क्वार्टरफ़ाइनल्स में हिस्सा ले रही थीं.

सवाल ये है कि प्रेग्नेंसी के दौरान प्रतियोगिता में हिस्सा लेना कितना सुरक्षित है?

आईओसी के अध्ययन को ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ स्पोर्ट्स मेडिसिन में पांच हिस्सों में प्रकाशित किया गया है.

शोधपत्र लिखने वाले विशेषज्ञ नार्वेजियन स्कूल ऑफ़ स्पोर्ट्स साइंस के प्रोफ़ेसर कारी बो का संदेश बिल्कुल साधारण है, "ऐसा लगता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक श्रम का नाकारात्मक असर नहीं होता है."

हालांकि बो कहती हैं कि एथलीटों को गर्भावस्था के समय आने वाली दिक्कतों का ख़तरा नहीं होता लेकिन ऐसा होता है तो लोग ग़लत धारणा बना लेते हैं.

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लेकिन इसके साथ ही इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि प्रेग्नेंसी या जन्म देते समय एथलीटों को कम परेशानी होती है.

प्राचीन काल से ही गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली सलाहों को शारीरिक श्रम से जोड़ दिया जाता रहा है. लेकिन यह अवैज्ञानिक है.

1980 के दशक में शोधकर्ताओं ने ये तर्क देना शुरू किया कि शारीरिक श्रम की तरह ही भ्रूण को ऑक्सीजन, रक्त संचार, पोषण और तापमान की ज़रूरत होती है. इसलिए इन डॉक्टरों का सुझाव था कि अगर महिला श्रम करती है तो गर्भ को मिलने वाले पोषण में रुकावट आएगी.

हालांकि बो कहती हैं, "लेकिन एथलीट के शरीर में रक्त संचार बहुत अच्छा होता है और इससे एक क़िस्म की भरपाई के रूप में भ्रूण को पर्याप्त पोषण मिल जाता है."

प्रेग्नेंट महिलाओं में तापमान नियमन, दिल की गतिविधि बेहतर होती है. हार्मोन में बदलाव के कारण उनके जोड़ अधिक लचीले हो जाते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है, यानी वो अपने शरीर में अधिक ऑक्सीजन रख सकती हैं.

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Image caption डिलीवरी के कुछ दिनों पहले ही ईवा नाइस्ट्रॉम ने स्कीइंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था.

अध्ययन से पता चलता है कि जो एथलीट एथलीट प्रेग्नेंसी के दौरान और इसके बाद ट्रेनिंग लेती हैं, उनमें जन्म देने के बाद के महीनों में 5-10 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन की खपत होती है.

ऐसी महिलाओं को क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस बारे में बो का सीधा संदेश है, "अपने शरीर की सुनो. अगर कुछ गड़बड़ महसूस हो रहा है तो इसका शायद सबसे बेहतर तरीक़ा है कि उसे बंद कर दो."

प्रेग्नेंसी के दौरान ट्रेनिंग के चार टिप्स

1-प्रेग्नेंसी के पहले 12 हफ़्ते में अधिक तापमान से बचना चाहिए. हल्के कपड़े पहनने चाहिए, एयरकंडिशन में व्यायाम करना चाहिए. अधिक गर्मी के दिनों में मेहनत करने से बचना चाहिए.

2-महिला वेट लिफ़्टर को कम वजऩ उठाना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और यह गर्भ को जाने वाले रक्त को बंद कर देता है. इसके अलावा कूल्हे पर तनाव बढ़ जाता है.

3-प्रेग्नेंसी के दौरान स्कूबा डाइविंग की सलाह नहीं दी जा सकती. फ़ुटबॉल, हॉकी जैसे गिरने या टक्कर लगने वाले खेलों में ऐसी महिलाओं को शामिल नहीं होना चाहिए जो अपनी प्रेग्नेंसी के अंतिम चरण में हैं.

4-ओलंपिक एथलीट्स को लेकर हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि जब मां ऐसा व्यायाम करती है जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक ऑक्सीजन की खपत होती है तो भ्रूण को रक्त की आपूर्ति घट जाती है. यानी ट्रेनिंग के दौरान सामान्य व्यायाम बेहतर रहता है और उन्हें ट्रेनिंग के दौरान अधिकतम मेहनत से बचना चाहिए.

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Image caption डिलीवरी के छह महीने बाद ही ईवा नाइस्ट्रॉम ने ट्राइथेलान में हिस्सा लिया. वो ब्रेक के बीच अपने बेटे साइमन ख्याल रखती थीं.

आईओसी का नया शोध आम लोगों को भी आजकल दी जाने वाली सलाहों से मेल खाता है.

अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ ऑब्सटीट्रिशियन्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स का सुझाव है गर्भवती महिलाओं को एरोबिक और ताक़त देने वाले व्यायाम में हिस्सा लेना चाहिए. इससे डायबिटीज़ और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है. ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह भी लेनी चाहिए.

अधिक व्यायाम इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने फ़िट हैं और इससे पहले कितनी मेहनत करते थे.

स्विडिश एथलीट इवा नाइस्ट्रॉम सात या आठ सप्ताह की प्रेग्नेंसी के दौरान ही स्विडिश नेशनल डुएथेलान में पहले स्थान पर रहीं. इसमें 10 किलोमीटर की दौड़, 40 किलोमीटिर की साइकिल रेस और 5 किलोमीटर की दौड़ शामिल थी.

जन्म देने के बाद महिलाओं को परम्परागत रूप से छह सप्ताह तक आराम करने की सलाह दी जाती है.

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Image caption लंदन ओलंपिक के दौरान नूर सुरयानी ताइनी ने काफी लोगों का ध्यान आकर्षित किया. हालांकि वो कोई मेडल हासिल करने में कामयाब नहीं रहीं.

लेकिन कारी बो का कहना है कि ऐसी एथलीटों ने एक या दो सप्ताह बाद ही व्यायाम शुरू कर दिया था.

इनग्रिड क्रिस्टियानसेन ने तो 1983 में बेटे को जन्म देने के चार दिन बाद ही व्यायाम शुरू कर दिया था.

वो एक महीने बाद ही वो अंतरदेशीय प्रतियोगितायों में भाग लेने लगी थीं और ह्यूस्टन मैराथन में उन्होंने एक साल पुराना अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया.

असल में डिलिवरी के बाद क्रिस्टिआनसेन के करियर का बेहतरीन दौर शुरू हुआ, उन्होंने 10,000 और 5,000 मीटर के मैराथन में रिकॉर्ड बनाया.

इवा नाइस्ट्रॉम का भी अनुभव कुछ ऐसा ही रहा. डिलीवरी के बाद अच्छा प्रदर्शन करने वाली उभरती एथलीटों ब्रिट्स पाउला रैडक्लिफ़, जो पावे और जेसिका एनिस हिल के साथ उनका नाम शुमार किया जाने लगा.

हालांकि आईओसी द्वारा कराए गए अध्ययन प्रेग्नेंट एथलीटों को प्रोत्साहित करने वाला है लेकिन कारी बो का कहना है कि वो ख़ुद मानती हैं कि महिला एथलीटों को थोड़ा संभलकर व्यायाम करने की ज़रूरत है.

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