कौन होगा कोच, देसी या विदेशी?

  • 23 जून 2016

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रमुख अनुराग ठाकुर ने कहा है कि भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच की घोषणा गुरुवार शाम तक हो सकती है.

भारत में जहाँ टीम इंडिया की हर जीत-हार का पोस्टमार्टम होता है, वहाँ नई नियुक्ति को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं.

साथ ही ये बहस भी छिड़ी है कि जिताऊ कोच कौन बेहतर होगा देसी या विदेशी?

अप्रैल में वर्ल्ड टी20 टूर्नामेंट के बाद टीम डायरेक्टर के रूप में रवि शास्त्री का कार्यकाल ख़त्म हो गया था.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नए कोच की नियुक्ति के लिए एक जून से अर्जियां मंगाई थीं और आवेदन करने की आखिरी तारीख 10 जून तय की थी.

बोर्ड को कोच के आवेदन के लिए कुल 57 आवेदन मिले, बोर्ड ने इस सूची में से 21 लोगों को इंटरव्यू के लिए चुना.

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कोलकाता में सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और संजय जगदाले की सलाहकार समिति ने मुख्य कोच का चयन किया और अपनी पसंद की सूचना बीसीसीआई के सचिव अजय शिर्के को दी है.

दरअसल 2001 में पहली बार बीसीसीआई ने विदेशी कोच पर दांव लगाया था. तब न्यूज़ीलैंड के जॉन राइट को कोच की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.

इससे पहले, बोर्ड कोच के लिए उसकी दक्षता के बजाय खिलाड़ी की छवि को तरजीह देता था.

आधिकारिक तौर पर अजित वाडेकर भारतीय टीम के पहले कोच थे. इसके बाद बोर्ड ने संदीप पाटिल, अंशुमान गायकवाड़ और कपिल देव को कोच नियुक्त किया.

राइट के कार्यकाल के बाद ग्रेग चैपल ने मुख्य कोच की ज़िम्मेदारी संभाली. फिर दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन के कार्यकाल में भारतीय टीम ने कई टूर्नामेंट जीते और अपनी ज़मीन पर विश्व कप भी जीता.

कर्स्टन के बाद डंकन फ्लेचर ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन उनका कार्यकाल कर्स्टन की तरह सफल नहीं रहा.

अटकलें हैं कि बीसीसीआई इस बार देसी कोच पर ही दांव खेलने की तैयारी में है. अगर ऐसा हुआ तो रवि शास्त्री और अनिल कुंबले का दावा मज़बूत होगा.

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