कुंबले की ज़िंदगी के चार 'दिलचस्प' वाक़ये

  • 24 जून 2016
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भारत के पूर्व स्पिन गेंदबाज़ और पूर्व कप्तान अनिल कुंबले को बीसीसीआई ने भारतीय क्रिकेट टीम का नया हेड कोच नियुक्त किया है.

वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली बता रहे हैं कुंबले के खेल जीवन के कुछ दिलचस्प वाक़ये-

टूटे जबड़े के साथ लारा का विकेट लिया

अनिल कुंबले को एंटिगा में जबड़े पर गेंद लगी थी, इसके बावजूद वो खेलने के लिए मैदान पर आए थे. उस वक्त उनका जबड़ा टूट गया था.

एक भारतीय डॉक्टर उस मैच के दौरान वहां स्टेडियम में मौजूद थे और मैच देख रहे थे. उन्हें बड़ी मुश्किल से ढूंढा गया. उन्होंने कुंबले के जबड़े को एक पट्टी से बांध दिया था. सबको लग रहा था कि कुंबले आराम करेंगे.

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लेकिन यह कुंबले का जज़्बा ही था कि वे गेंदबाज़ी करने के लिए मैदान में उतर गए. टूटे हुए जबड़े के साथ गेंदबाज़ी करते हुए उन्होंने ब्रायन लारा का विकेट लिया. वाकई में यह एक यादगार लम्हा था.

नहीं खेलने के बावजूद जीत की तस्वीर ली

त्रिनिदाद एंड टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में भारत का मैच हो रहा था. उस वक्त जॉन राइट भारतीय क्रिकेट टीम के कोच और सौरव गांगुली कप्तान थे.

कुंबले को पहले कहा गया कि वो मैच में खेल रहे हैं, फिर कहा गया कि वो नहीं खेल रहे हैं, फिर दोबारा से कहा गया कि खेल रहे हैं.

वो जिंक का पेंट लगाकर मैदान का चक्कर काट रहे थे. आख़िरकार जब टीम की घोषणा हुई तो उसमें कुंबले का नाम नहीं था.

एक सीनियर खिलाड़ी के साथ इस तरह का बर्ताव हुआ, लेकिन जब भारत टेस्ट मैच जीत गया तो सबसे अधिक खुश जो खिलाड़ी था वो थे अनिल कुंबले.

उस वक्त वो अपने कैमरे से पूरी टीम की खुशी मनाते हुए फोटो खींच रहे थे.

कभी मैच रेफ़री ने बुलाया नहीं
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जब एक बार कुंबले की कप्तानी में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर थी उस वक्त भारी विवाद हुआ था. उस वक्त उन्होंने कहा था कि 'एक ही टीम क्रिकेट खेल रही है.'

उनका मतलब था कि ऑस्ट्रेलिया जिस तरह के पैंतरे अपना रही है वो खेल भावना के ख़िलाफ़ हैं. उस वक्त भारत ने जबरदस्त तरीके से सिरीज़ में वापसी की थी. उसमें कुंबले की बड़ी भूमिका थी.

कुंबले बहुत अनुशासन के साथ क्रिकेट खेलते थे. मुझे याद नहीं कि कुंबले को कभी किसी मैच रेफ़री ने अपने पास बुलाया हो.

हिम्मत नहीं हुई ख़राब खेलने को कहने की

मैच फिक्सिंग के दौर में कुंबले ने अपने क्रिकेट जीवन का बेस्ट परफॉर्मेंस दिया है. शायद लगता था कि वो इसे एक चुनौती के तौर पर देखते हो.

उन्हें लगता था कि वे मैच जिता कर आरोप लगाने वालों को चुप करा सकते हैं.

उनका चरित्र इतना मजबूत है कि मुझे नहीं लगता कि किसी की हिम्मत हुई होगी कि वो कुंबले के पास जाकर ख़राब खेलने के लिए कह सकें.

(वरिष्ठ खेल पत्रकार विजय लोकपल्ली से बीबीसी के लिए रजत चानना की गई बातचीत पर आधारित)

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