BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
शनिवार, 11 मार्च, 2006 को 15:03 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
बनारस में ना होता तो शाहिद ना होता
 

 
 
मोहम्मद शाहिद
मोहम्मद शाहिद वाराणसी स्थित डीज़ल इंजिन कारख़ाने में स्पोर्ट्स ऑफ़िसर हैं
बनारस ने जहाँ कला संगीत जगत को बिस्मिल्लाह ख़ान, किशन महाराज और गिरिजा देवी जैसी हस्तियाँ दी ही हैं, वहीं उसने भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी को भी एक ऐसा सितारा दिया है जिसने हॉकी स्टिक पर अपनी पकड़ से भारत का नाम रोशन किया.

तीन ओलंपिक, दो विश्व कप और दो एशियाई खेलों में भारत की ओर से खेल चुके शाहिद 1980 में अंतिम बार मास्को में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतनेवाली टीम का हिस्सा रह चुके हैं.

विपक्षी खिलाड़ी को छकाकर आगे बढ़ने यानी ड्रिब्लिंग के मास्टर कहे जानेवाले शाहिद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रह चुके हैं.

 जिसने भी ये किया वह इंसान नहीं हो सकता और ख़ुदा को भी ऐसे लोगों पर शर्म कर रहा होगा कि उसने ऐसे लोगों को क्यों बनाया
 

शाहिद बनारस में ही जन्मे और वहीं अर्दली बाज़ार में पले-बढ़े. और अंतरराष्ट्रीय हॉकी को अलविदा कहने के बाद शाहिद अभी बनारस में ही रहते हैं.

बनारस में पिछले दिनों हुए धमाके ने शाहिद को बहुत आहत किया है और वे कहते हैं कि उनके 45 साल के जीवन में बनारस में पहली बार ऐसा हुआ है.

शाहिद ने बीबीसी से कहा,"जिसने भी ये किया वह इंसान नहीं हो सकता और ख़ुदा को भी ऐसे लोगों पर शर्म कर रहा होगा कि उसने ऐसे लोगों को क्यों बनाया".

खेल ही मज़हब

मोहम्मद शाहिद
मोहम्मद शाहिद

शाहिद बताते हैं कि उन्होंने अपने-आप को कभी हिंदू-मुसलमान-सिख-ईसाई नहीं समझा.

उन्होंने कहा,"मैं तो सारी दुनिया से कहता हूँ कि मैं तो एक खिलाड़ी हूँ और एक खिलाड़ी के ही रूप में ख़त्म होना चाहता हूँ."

"हमारा सबसे बड़ा मंदिर हमारा मैदान है चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान".

"सभी एक साथ खेलते हैं, खाते हैं, एक गिलास में पानी पीते हैं, हम केवल खिलाड़ी हैं और भारत के सच्चे नागरिक हैं".

हिंदुओं से दोस्ती

 किसी ने मुझसे कहा था कि शाहिद भाई अगर आप बनारस में नहीं होते तो और आगे जाते, तो मैंने उससे कहा कि भाई अगर मैं बनारस में ना होता तो शाहिद नहीं होता
 
मोहम्मद शाहिद

शाहिद ने बताया कि बनारस में सभी मज़हबों के लोग रहते हैं और संयोगवश उनके अधिकतर दोस्त हिंदू हैं.

उन्होंने कहा," 1992 में जब बाबरी मस्जिद तोड़ी गई तो मैं तब दिल्ली में खेल रहा था और तब मैंने अपने एक दोस्त रामजी यादव को फ़ोन किया कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए इसलिए तुम घर चले जाना...वो मेरे घर गए और फिर बताया कि सबकुछ ठीक है."

शाहिद कहते हैं,"ये तो केवल राजनीति है...बाबरी मस्जिद टूट गई तो उससे मुझे क्या फ़र्क पड़ता है, लेकिन उसके पीछे जो जानें गईं उसे तो नहीं भुलाया जा सकता ना."

 मेरे जितने अच्छे दोस्त हैं सब हिंदू हैं और ख़ुदा ना ख़ास्ता कहीं अगर दंगा भी हो जाए तो मैं उन्हीं के पास दौड़ूँगा
 

"आपको आश्चर्य होगा जानकर कि मेरे जितने अच्छे दोस्त हैं सब हिंदू हैं और ख़ुदा ना ख़ास्ता कहीं अगर दंगा भी हो जाए तो मैं उन्हीं के पास दौड़ूँगा क्योंकि मुझे उनपर बड़ा भरोसा है."

शाहिद याद करते हैं कि जब वे दिल्ली में खेलते थे तो उनकी छोटी बिटिया बीमार पड़ गई थी और तब बनारस से लेकर दिल्ली तक के लोग धर्म-जाति को भुलाकर उनके साथ खड़े हो गए थे.

उनको अपने बनारस पर पूरा भरोसा है जिसे वे एक ज़िंदादिल शहर मानते हैं और कहते हैं कि धमाकों से बेख़ौफ़ उनका बनारस फिर वैसे ही चल पड़ेगा.

बनारस से अपने प्यार को शाहिद ऐसे बयां करते हैं,"किसी ने मुझसे कहा था कि शाहिद भाई अगर आप बनारस में नहीं होते तो और आगे जाते, तो मैंने उससे कहा कि भाई अगर मैं बनारस में ना होता तो शाहिद नहीं होता".

 
 
काशीनाथ सिंहकाशी का काशी
काशीनाथ सिंह बताते हैं कि बनारस में दहशत और भय के लिए कोई जगह नहीं है.
 
 
वीरभद्र मिश्रमहंत सकते में
विस्फोट के बाद संकट मोचन मंदिर के महंत वीरभद्र मिश्र की आपबीती.
 
 
वाराणसीसंकट मोचन मंदिर
वाराणसी स्थित संकट मोचन मंदिर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है.
 
 
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>