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रविवार, 07 अक्तूबर, 2007 को 06:46 GMT तक के समाचार
 
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आक्रामक होने के ख़तरे भी हैं
 

 
 
भारतीय गेंदबाज़ श्रीसंत
श्रीसंत का चयन उत्कृष्ट गेंदबाज़ी के लिए हुआ है न कि नाटकबाज़ी के लिए
आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट का कहना है कि भारतीय खिलाड़ियों का व्यवहार उनके बेटे से भी ज्यादा बचकाना है.

गिलक्रिस्ट क्रिकेट जगत में एक बेहतर इंसान के रूप में जाने जाते हैं और उनकी इस टिप्पणी से असहमत होना बेहद मुश्किल हो रहा है, ख़ासकर मैदान में श्रीसंत के व्यवहार को देखते हुए.

हालांकि शांताकुमारन श्रीसंत अकेले ही कई ऐसे काम करते रहे हैं जो दूसरों के लिए असंभव जान पड़ते हैं.

पिछले हफ़्ते एंड्रयू साइमंड्स ने कहा था कि ट्वेंटी-20 विश्व कप जीतने के बाद भारतीय खिलाड़ी खुशी के बहाव में बह गए. हालाँकि जिस देश ने लंबे समय से क्रिकेट प्रतियोगिता न जीती हो वहां ये स्वाभाविक था.

एक आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी का किसी भारतीय को नम्रता और शिष्टाचार का पाठ पढ़ाना बेहद हास्यास्पद था.

हालाँकि कोच्चि वनडे में श्रीसंत का व्यवहार बहुत बुरा था. ख़ासकर उनका साइमंड्स को रन-आउट करना, उसके बाद बचकाना तरीके से चेहरे के पास आकर चिल्लाना, ये ऐसी हरकतें थीं जिनके बचाव में भारतीयों के पास कोई तर्क नहीं है.

श्रीसंत भले ही एक प्रतिभाशाली गेंदबाज़ हों लेकिन वे क्रिकेट की भावना के साथ भद्दा मज़ाक कर रहे हैं.

हर कोई तेंदुलकर नहीं हो सकता

निश्चित तौर पर खेल के लिए स्वच्छंद भावनाओं की ज़रूरत होती है. लेकिन रंगीनियत और अपरिपक्वता के बीच फ़र्क है, आक्रामकता और बंदतमीज़ी के बीच फ़र्क है और ऐसा लगता है कि वो इस फ़र्क से अनजान हैं.

महेंद्र सिंह धोनी को उन्हें ये बताना होगा क्योंकि किसी एक खिलाड़ी को किसी टीम की प्रतिष्ठा धूमिल करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

श्रीसंत
श्रीसंत को अपना व्यवहार बदलना होगा

भारतीय टीम ने सालों से मर्यादित आचरण का परिचय दिया है. यह बहस भी चली थी कि उसे अपने स्वभाव में कुछ आक्रामकता लाने की ज़रूरत है.

सौरभ गांगुली ने अपनी टीम में जीत हासिल करने का जोश भरा था, लेकिन उन्हें ख़राब व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया गया था. 2001 में आस्ट्रेलिया के विरुद्ध घरेलू श्रृंखला में भारतीय टीम मज़बूत थी लेकिन उसके खिलाड़ियों का व्यवहार ख़राब नहीं था.

ये वो टीम थी जिसके ज्य़ादातर खिलाड़ी आक्रामक होने के बावजूद बेहद शांत और सम्मानित थे जैसे, लक्ष्मण, तेंदुलकर और द्रविड़.

मानना पड़ेगा कि हर व्यक्ति तेंदुलकर नहीं हो सकता है. खेल में और ख़ासकर क्रिकेट में हर तरह के लोग होते हैं. इसलिए एक- दूसरे को घूरना और बाउंसर गेंद फेंकना सामान्य बात है.

इससे पहले जब आस्ट्रेलिया टीम कई बार हदें पार कर रही थी, तब भारत की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई गई थी.

शक्तिशाली भारत

धोनी के नए भारत के खिलाड़ी शक्तिशाली और ऊर्जा से भरपूर माने जाते हैं, जो युवा वर्ग में स्वीकार्य हैं. उन्हें ख़ुद को अभिव्यक्त करने की छूट मिलनी चाहिए. लेकिन किसी की ओर बैट दिखाकर उसे डराना ठीक नहीं है.

यदि यह आस्ट्रेलिया को डराने की रणनीति है तो यह ग़लतफ़हमी है. भारत आस्ट्रेलिया को धमकाकर या फिर आक्रामक व्यवहार करके मैच नहीं जीतेगा बल्कि आक्रामक ढंग से खेलकर जीतेगा.

हरभजन सारे दिन किसी को बैट दिखा सकते हैं लेकिन फ़र्क तभी पड़ेगा जब वे विकेट लेंगे.

श्रीसंत मैच रेफ़री का जितना ज़्यादा सामना करेंगे, मीडिया में वे उतनी ही चर्चा में रहेंगे और उनके कप्तान और टीम अपने लक्ष्य से उतनी ही ज्य़ादा भटकेगी.

उन्हें यह याद रखना होगा कि भारतीय टीम में उनका चयन उत्कृष्ट गेंदबाज़ी की बदौलत हुआ है न कि नाटक कर पाने की क्षमता की बदौलत.

 
 
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