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गुरुवार, 20 दिसंबर, 2007 को 11:39 GMT तक के समाचार
 
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'ऑस्ट्रेलिया में होगा यादगार प्रदर्शन'
 
सौरभ गांगुली
गांगुली अपने टेस्ट करियर में अब तक 99 मैच खेल चुके हैं.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली इस समय शानदार फ़ॉर्म में हैं. जानकारों का मानना है कि कप्तानी से हटने के बाद गांगुली इस समय अपने करियर की बेहतरीन क्रिकेट खेल रहे हैं.

वर्ष 2000-05 के बीच 21 मैचों में जीत दिलाकर भारत में टेस्ट क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान माने जाने वाले सौरभ गांगुली ने बल्लेबाज़ के रूप में फिर से प्रभावशाली वापसी की है.

बीबीसी के खेल संवाददाता राहुल टंडन से बातचीत में सौरभ ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत को जीत दिलाने की उनकी रणनीति क्या होगी. पेश हे उनसे इंटरव्यू के मुख्य अंश:

ये आपका सौंवाँ टेस्ट मैच है. क्या ये आपके लिए भावनात्मक रहेगा?

भावनाओं से ज़्यादा ये ख़ुशी की बात होगी. किसी भी खिलाड़ी के लिए ये ऐतिहासिक क्षण होगा. भावनाओं से ज़्यादा ये संतुष्टि की बात होगी.

हाल के सालों में कुछ ऐसे पल भी आए होंगें जब आपने सोचा होगा कि आप सौवाँ मैच खेले भी पाएँगे या नहीं?

हाँ, ख़ासतौर पर जब मुझे टीम से हटा दिया गया था तब एक ऐसा समय भी आया था जब मुझे लगा कि मै अब नहीं खेल पाऊँगा. ये सही बात है कि कई बार परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं होते, कई बार मैं सोचता था कि शायद मुझे फिर से खेलने का मौक़ा मिले.

वो दौर ज़रूर मुश्किल भरा रहा होगा. आपने कितनी मज़बूती से उसका सामना किया?

 1996 से जब से मैने एक खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की है, हमारे विदेशों में किए जा रहे प्रदर्शनों में ज़बरदस्त सुधार आया है
 
सौरभ गांगुली

मैं मानसिक रूप से मज़बूत और दृढ़ निश्चयी था. मेरा सोचने का तरीक़ा भी अलग है. जब आप 11-12 साल तक जल्दबाज़ी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हैं तो बहुत सी चीज़ें ध्यान में नहीं रहतीं, पर जब एक बार इससे दूर हो जाते हैं तो सोचने का तरीक़ा बदलता है और आप बेहतर रूप में वापसी करते हैं.

अब जिस तरह से आप बल्लेबाज़ी कर रहे हैं उस पर क्रिकेट के जानकारों का कहना है कि आप अब तक का सबसे बेहतर क्रिकेट खेल रहें हैं. पर आप क्या महसूस करते हैं?

मैं पिछले एक साल से अच्छा खेल रहा हूं इससे पहले भी मैने अच्छा खेला है. लेकिन हटाए जाने और फिर से वापसी के बाद अंतर ज़रूर आया है लेकिन इससे पहले भी मैने ऐसा प्रदर्शन किया है.

कप्तानी के दबाव से निकलने के बाद क्या बल्लेबाज़ी पर ध्यान केंद्रित करने का ज़्यादा समय मिल पा रहा है?

निश्चित रूप से, क्योंकि दबाव तो कम हो ही जाता है. क्योंकि एक कप्तान के दृष्टिकोण से टीम या टीम के सदस्यों की चिंता सिर पर नहीं होती. अब सिर्फ़ अपनी फ़िटनेस, अपने प्रशिक्षण और अपने खेल को बेहतर बनाने की ज़िम्मेदारी है. फिर रोज़ मीडिया या अन्य ढेर सवालों के जवाब नहीं देने होते जिससे हल्कापन महसूस होता हैं.

क्या ऑस्ट्रेलिया को ये दौरा मुश्किल भरा है?

बेशक यह एक मुश्किल दौरा है. हमने 2003 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में अच्छा प्रदर्शन किया था और इस बार अगर ईमानदारी से कहें तो मैकग्रा और वॉर्न के बिना मुक़ाबला कुछ अलग हट के रहेगा.

भारत के लिहाज से इस सिरीज़ में क्या अच्छा रहेगा?

अगर हम सिरीज़ जीतते हैं तो ये बहुत अच्छा होगा. ये असंभव नहीं है लेकिन इसके लिए हमें बहुत मेहनत करनी होगी.

माना जा रहा है कि मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई दौरा आपके अलावा, कप्तान कुंबले, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर के लिए आख़िरी दौरा हो सकता है तो क्या ये आपके संकल्प को और मज़बूत बनाता है?

गांगुली
गांगुली ने इस साल कैलेंडर ईयर में एक हज़ार रन पूरे किए हैं.

हां बिल्कुल, लेकिन जब हम हाल में इंग्लैंड खेलने गए थे तो हमें पता है कि हमारा ये आख़िरी दौरा हो सकता है, पर हममें अच्छा खेलने और सिरीज़ जीतने की भावना थी. 1996 से जब से मैने एक खिलाड़ी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की है, हमारे विदेशों में किए जा रहे प्रदर्शनों में ज़बरदस्त सुधार आया है".

इस लिहाज़ से अगर ये आख़िरी सिरीज़ है तो हम ज़्यादा आत्मविश्वास से खेलेंगें और ऑस्ट्रेलिया दौरे को यादगार बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगें.

आपकी वापसी किस लिहाज़ से सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है और कैसे आप आलोचकों को ग़लत साबित करेंगें और अपने आपको साबित करने के लिए क्या तय किया है?

मैने अपने पूरे करियर में अपने आप को दूसरों के सामने साबित करने की कोई कोशिश नहीं की. और संतुष्टि की बात है कि मैं उस दौर से बाहर निकल आया हूँ और उस समय अच्छा प्रदर्शन कर रहा हूं जब टीम को ज़रूरत होती है.

आपको लगता है कि अब कंगारू टीम भी भारत से कुछ डरने लगी है?

मैं इसे डर तो नहीं कहूँगा. लेकिन वो भी अच्छी तरह जानते हैं कि हमारी टीम उन्हें तगड़ी चुनौती देने के साथ साथ हराने का माद्दा रखती है. उनके कुछ खिलाड़ियों से बातचीत में मुझे पता चला कि वो अगर किसी टीम से घबराते हैं तो वो है टीम इंडिया.

आपका सौवां टेस्ट तो सामने है. इसके बाद और क्या लक्ष्य है?

मुझे लगता है कि इस साल के बाद अगले साल तक मैं खेलता रहूँगां और फिर देखते हैं कि आगे क्या होता है.

 
 
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