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मंगलवार, 08 जनवरी, 2008 को 16:26 GMT तक के समाचार

ऑस्ट्रेलिया दौरा 'फ़िलहाल' जारी रहेगा

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कहा है कि भारतीय टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा 'फ़िलहाल' जारी रहेगा लेकिन हरभजन की सुनवाई के दौरान जो स्थितियाँ सामने आएंगी उनके मुताबिक दौरे की समीक्षा की जाएगी.

मंगलवार को बीसीसीआई की कार्यकारिणी समिति की बैठक में ये फ़ैसला लिया गया.

इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उठे मुद्दों की चर्चा की गई. साथ ही टेस्ट मैचों के दौरान अंपायरिंग के स्तर और मैच रेफ़री द्वारा हरभजन सिंह पर लगाए गए 'अन्यायपूर्ण' और 'अवैध' प्रतिबंध पर बीसीसीआई अध्यक्ष और अन्य बोर्ड अधिकारियों के रूख़ को सही ठहराया गया.

ग़ौरतलब है कि सिडनी टेस्ट के दौरान मैच रेफ़री ने एंड्र्यू साइमंड्स के ख़िलाफ़ कथित नस्लभेदी टिप्पणी के लिए हरभजन सिंह पर तीन टेस्ट मैचों का प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन आईसीसी ने मामले की सुनवाई पूरी होने तक हरभजन को खेलने की अनुमति दे दी है.

कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से दोहराया कि हरभजन पर लगा प्रतिबंध बिल्कुल अस्वीकार्य है.

बैठक में बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार को वो सारे क़दम उठाने के लिए अधिकृत किया गया जिससे हरभजन के ख़िलाफ़ लगाए गए सारे 'आधारहीन' आरोपों को हटाया जा सके.

बीसीसीआई ने कहा है कि वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से अनुरोध करेंगे कि इस मामले में अपील कमिश्नर जल्द से जल्द सुनवाई पूरे करें.

बीसीसीआई ने ये स्पष्ट किया कि हरभजन सिंह को आईसीसी से सिर्फ़ अंतरिम राहत मिली है, इसलिए बोर्ड का रुख़ है कि मामले को अंतिम रुप से सुलझाया जाए और इस फ़िरकी गेंदबाज़ के ख़िलाफ़ लगे 'अनुचित'
आरोपों को वापस लिया जाए.

विवाद

कथित तौर पर नस्लवादी टिप्पणी से उठे विवाद के बाद हरभजन सिंह पर पाबंदी के फ़ैसले से विवाद खड़ा हो गया था और बीसीसीआई ने धमकी दी थी कि अगर हरभजन सिंह पर पाबंदी वाला फ़ैसला बदला नहीं जाता है तो टीम सिरिज़ पूरी किए बिना ही स्वदेश लौट सकती है.

बोर्ड के एक वक्तव्य में कहा गया है कि बोर्ड ने यह शर्त रखी है कि हरभजन सिंह को आरोप से मुक्त किया जाए और उन पर लगा तीन मैचों का प्रतिबंध भी हटाया जाए.

इससे पहले सोमवार को बीसीसीआई ने कहा था कि भारतीय टीम अभ्यास मैच के लिए कैनबरा रवाना नहीं होगी और टीम को सिडनी में ही रुकने के आदेश दिए थे.

इस विवाद की वजह से ही आईसीसी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे टेस्ट के लिए जमैका के अंपायर स्टीव बकनर को हटा दिया और कहा कि हरभजन की अपील की सुनवाई के लिए एक कमिश्नर की नियुक्ति बुधवार को की जाएगी.

साथ ही भारत और ऑस्ट्रेलियाई टीमों के बीच विभिन्न मसलों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ के रूप में रंजन मदुगले की नियुक्ति की घोषणा की गई.

मेलबर्न में एक प्रेस कांफ्रेंस में आईसीसी के अध्यक्ष मैल्कम स्पीड ने बताया कि पर्थ में होने वाले तीसरे टेस्ट में बकनर की जगह न्यूज़ीलैंड के अंपायर बिली बाउडन अंपायरिंग करेंगे.

बिली बाउडन के साथ अंपायरिंग करेंगे असद रऊफ़.

हरभजन की अपील के बारे में स्पीड ने कहा कि बुधवार तक हरभजन की अपील पर सुनवाई के लिए एक कमिश्नर नियुक्त होगा लेकिन ये नहीं बताया कि सुनवाई कब होगी.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पर्थ के टेस्ट मैच शुरू होने यानी 16 जनवरी से पहले तक सुनवाई पूरी नहीं होती है तो हरभजन सिंह टेस्ट मैच में खेल सकेंगे, बशर्ते उन्हें टीम में चुना जाए.

स्पीड का कहना था कि बकनर ने क्रिकेट के हित में आईसीसी के इस फ़ैसले को माना है और बकनर समझते हैं कि इन परिस्थितियों में उनका हटना उचित है.

स्पीड का कहना था, ''बकनर और दूसरे अंपायर मार्क बेन्सन ने भी माना कि सिडनी टेस्ट ठीक नहीं रहा था.''

उन्होंने कहा, ''हमें लगता है कि बकनर के अगले टेस्ट में रहने से मैच पर और ख़ुद बकनर पर बहुत अधिक दबाव रहेगा. इसलिए यह बेहतर होगा कि बकनर उसमें न रहें.''

स्पीड की सफ़ाई

स्पीड ने साफ़ किया कि बकनर को किसी टीम के कहने पर या किसी व्यक्ति विशेष के कहने पर नहीं हटाया गया है.

उनका कहना था, ''मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि अंपायरों की नियुक्ति आईसीसी करता है और इन नियुक्तियों पर आपत्ति करने का किसी टीम को हक़ नहीं है.''

बकनर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे अनुभवी अंपायरों में से एक हैं जिन्होंने रिकॉर्ड 120 टेस्टों में अंपायरिंग की है.

उल्लेखनीय है कि सिडनी में दूसरे टेस्ट में दोनों अंपायरों पर ग़लत फ़ैसले देने के आरोप लगे थे, जिसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी से अपील की थी कि इन ग़लत फ़ैसलों को देखते हुए बकनर को भारत के मैचों में अंपायरिंग न करने दी जाए.

बकनर पहले भी भारत के ख़िलाफ कई ग़लत फ़ैसले दे चुके हैं.

आईसीसी के इन दोनों फ़ैसलों को भारतीय बोर्ड की जीत बताया जा रहा है.

हरभजन पर कथित नस्लवादी टिप्पणियों के कारण तीन टेस्ट मैचों का प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसके ख़िलाफ़ भारतीय बोर्ड ने अपील की थी.