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गुरुवार, 17 अप्रैल, 2008 को 15:01 GMT तक के समाचार

प्रदीप मैगज़ीन
वरिष्ठ खेल पत्रकार

करिश्मा या क्रिकेट का कबाड़ा

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर इंडियन प्रीमियर लीग के प्रभाव पर अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगा. लेकिन इतना तो कहा ही जा सकता है कि इसके आयोजक इसे सफल बनाने के लिए अपना जी-जान लगा रहे हैं.

आयोजक बॉलीवुड सितारों को ला रहे हैं, मनोरंजन का प्रबंधन कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात कि क्रिकेट भी ट्वेन्टी 20 ओवरों का है.

आयोजक तो यही सोच रहे हैं कि बड़ी भीड़ जुटाई जाएगी और इससे क्रिकेट की नई परिभाषा गढ़ी जाएगी.

अगर आयोजकों का ये दावा मान लें कि यह प्रतियोगिता सफल होगी, तो यह देखना होगा कि साल में कितनी क्रिकेट खेली जाती है. साल में दिन तो 365 ही होते हैं.

लेकिन इसी 365 दिन में टेस्ट क्रिकेट भी होते हैं, एक दिवसीय मैच भी खेले जाते हैं और अब ट्वेन्टी 20 मैच भी इसी दौरान होंगे. चूँकि आईपीएल में इतना पैसा लगा हुआ है और बड़े-बड़े उद्योगपति इसमें शामिल हैं, वे चाहेंगे कि उनका पैसा रिटर्न हो.

कोशिश

इसलिए वे इसे किसी भी क़ीमत पर लोकप्रिय बनाने की कोशिश में जुटे हैं. इसलिए इसमें बॉलीवुड सितारों को लाया जा रहा है. गाना-बजाना होगा.

इन सबके बावजूद उनका प्रमुख उद्देश्य पैसा कमाना है और वे समय के साथ ये भी चाहेंगे कि प्रतियोगिता की अवधि बढ़ा दी जाए.

खिलाड़ियों के नज़रिए से देखें तो उन्हें भी काफ़ी पैसा मिल रहा है और वे यही सोचेंगे कि अगर उन्हें ट्वेन्टी 20 में पैसा मिल रहा है तो वे टेस्ट क्रिकेट क्यों खेलें.

और आख़िरकार इससे टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट पर प्रभाव पड़ेगा. क्योंकि अगर ट्वेन्टी 20 का समय बढ़ा तो टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट का समय कटेगा. इस आधार पर इसका दूरगामी प्रभाव टेस्ट क्रिकेट पर ही दिखता है.

जहाँ तक आईपीएल के मैचों में लोगों के उत्साह की बात है, उसे भी परखने के लिए समय लगेगा. क्योंकि शुरू में तो लोग मनोरंजन और बड़े-बड़े सितारों को देखने आएँगे.

लेकिन 44 दिनों तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में लोगों का उत्साह कैसे बना रहता है, इस पर कई लोगों की नज़र होगी. दूसरी बात कि भारतीय दर्शकों की देश के प्रति वफ़ादारी रहती है.

उत्साह

इस पर भी नज़र होगी कि भारतीय दर्शक आईपीएल से अपने आप को कैसे जोड़ता है. लेकिन दर्शकों का उत्साह मापने का एक पैमाना ये हो सकता है कि हर मैचों में स्टेडियम में कितने दर्शक जुटते हैं और टेलीविज़न की टीआरपी कैसे बढ़ती है.

ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि आयोजक इसमें कितना सफल हो पाते हैं.

प्रमुख बात यही है कि आईपीएल की कमर्शियल सफलता पर ही इसका भविष्य निर्भर है. अगर आईपीएल में शामिल लोगों को लगा कि आईपीएल में कमाई की कम ही संभावना है तो वे इससे जुड़े रहेंगे.

अगर आईपीएल का सकारात्मक पक्ष देखें, तो इससे ट्वेन्टी 20 को काफ़ी फ़ायदा होगा. ट्वेन्टी 20 का विस्तार होगा और लोगों की रुचि भी इस प्रतियोगिता में बढ़ेगी.

लेकिन सबसे बड़ा ख़तरा यही है कि कहीं इसकी बढ़ती लोकप्रियता टेस्ट और वनडे क्रिकेट का कबाड़ा ना कर दे.