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शुक्रवार, 25 अप्रैल, 2008 को 09:45 GMT तक के समाचार

सुशील कुमार झा
बीबीसी संवाददाता, मुंबई

चियरलीडर्स से क्या नाराज़गी है?

इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों में मौजूद चीयरलीडर्स के मुद्दे पर विवाद पैदा हो गया है. कुछ राजनीतिज्ञों ने इस पर रोक लगाने की मांग की तो है कुछ ने इन्हें बार डांसरों से भी भोंडा और वाहियात क़रार दिया है.

लेकिन इन चियरलीडरों से क्या नाराज़गी है?

इस बात में अब कोई शक नहीं रहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों के सबसे बड़े आकर्षण क्रिकेट की जगह बॉलीवुड सितारे और विदेशी चियरलीडर्स बन गए हैं.

इस बात की किसी को फ़िक्र नहीं रहती किस खिलाड़ी ने कितने छक्के मारे या रन बनाए बल्कि सबकी निगाहें शाहरुख खान या फिर प्रीति जिंटा पर लगी रहती हैं.

बॉलीवुड सितारों के बाद स्टेडियम में अगर लोगों का ध्यान किसी पर रहता है तो वो होती हैं अत्यंत कम कपड़ों में नृत्य करती चियरलीडर्स.

मुंबई में बंगलौर रॉयल चैलेंजर्स और मुंबई इंडियन्स के मैच के दौरान कुछ मौके ऐसे भी आए जब कई लोगों को शर्मिन्दगी झेलनी पड़ी होगी.

मैं यह मैच दर्शकों के स्टैंड में बैठ कर देख रहा था और मेरे साथ दो महिला मित्र भी थीं. मैच शुरु होते ही अमरीका से आईं चार चीयरलीडर्स आगे खड़ी हो गईं और नाचना शुरु कर दिया.

कुछ देर तो सब ठीक रहा लेकिन जैसे जैसे मैच आगे बढ़ने लगा. लोग ऊपर की सीढ़ियों से उतर कर नीचे आने लगे और जाली में हाथ निकाल कर चीयरलीडर्स की तरफ इशारा करने लगे.

इन अर्धनग्न लड़कियों के दर्शन के आगे क्रिकेट फीका पड़ चुका था. एक दो बार पुलिसवालों ने इन दर्शकों को हटाया लेकिन भीड़ क्या कभी हटती है?

इस भीड़ में जहाँ नौजवान थे तो कुछ 35 साल के ऊपर के भी लोग थे. आलम ये था कि जब ये लड़कियां न नाचें तो पब्लिक मैच की बजाय भी उनके बदन को घूरते खड़ी दिखी.

जाली में से हाथ निकाल कर मैडम-मैडम कह कर हाथ मिलाने की इच्छा देख कर इन लोगों की कुंठा का अहसास हो रहा था.

एक नौजवान ने तो हद कर दी.

20 साल के इस नौजवान से जब एक लड़की ने हाथ मिला लिया तो उसके बाद पूरे मैच में वो अपना एक हाथ जाली में डाल कर खड़ा रहा इस उम्मीद में कि और कोई लड़की उससे हाथ मिला लेगी.

इनमें से एक नौजवान तो हेलमेट लेकर आया था और जैसे ही कैमरा उसकी तरफ आता वो हेलमेट पहन कर भोंडे इशारे करता.

हर जगह

अश्लील नृत्य और गंदी टिप्पणियों का यह दौर चलता रहा और हम सोचते रहे कि क्या मुंबई के लोग ऐसे हैं लेकिन फिर आने वाले मैचों में ये नज़ारा कई और स्थानों पर भी देखने में आया.

हमारे पीछे की सीट पर एक व्यक्ति अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ बैठे थे.

उनकी नाराज़गी साफ थी. वो बार बार अंग्रेज़ी में चिल्लाते.... अर्धनग्न लड़कियां वापस जाओ...

ज़ाहिर है कि अपने परिवार के साथ उन्हें ये नज़ारा बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था.

उधर जब मुंबई इंडियन्स की तरफ से लड़कियां नृत्य करने आतीं तो भीड़ घट जाती. शायद इसलिए कि वो अपने देश की थीं और उन्होंने विदेशी चियरलीडरों की तुलना में कपड़े भी अधिक पहन रखे थे.

आईपीएल के मैनेजरों का दावा है कि ये मैच पारिवारिक मनोरंजन हैं. हों भी क्यों न, बड़ी संख्या में घरेलू महिलाएँ भी ये मैच देख रही हैं लेकिन अगर चियरलीडर्स के कपड़े ऐसे ही कम रहे तो आने वाले दिनों में आयोजकों को मुश्किल हो सकती है.

वैसे चियरलीडर्स भारतीय जनता के इस रवैये से खुश हैं या दुखी ये कहना मुश्किल है क्योंकि कुछ मौकों पर ये विदेशी लड़कियां डरी हुई दिखीं.

ख़ास कर ऐसे में जब कोई उनका हाथ पकड़ कर छोड़ना ही नहीं चाह रहा हो.

अब बात चियरलीडर्स के विरोध पर आ पहुंची है. यह सही है कि ये लड़कियां कम कपड़े पहनती हैं लेकिन क्या दर्शकों का रवैया उनके प्रति सही है?

किसी भी चीज़ पर प्रतिबंध लगाने से या उसकी आलोचना से पहले यह मैच देखने के लिए जाने वालों की मानसिकता पर भी विचार ज़रुरी है.

यह सही है कि चियरलीडर्स एक सीमा के बाद अश्लील लगती है क्रिकेट के इस तमाशे में क्रिकेट हाशिए पर जा चुका है लेकिन जब आईपीएल क्रिकेट की जगह मनोरंजन का सबसे बड़ा तमाशा है तो फिर भोंडे मनोरंजन पर आपत्ति क्यों?