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शुक्रवार, 25 अप्रैल, 2008 को 12:36 GMT तक के समाचार

प्रदीप मैगज़ीन
वरिष्ठ खेल पत्रकार

'सुपरहिट आईपीएल' की असलियत

भारत के लिहाज से देखें तो यह सप्ताह खेलों के लिए काफ़ी रोचक रहा. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) या यों कहें कि ललित मोदी ने क्रिकेट में 'क्रांति' की शुरुआत की है.

अगर टेलीविज़न के हिसाब से देखें तो इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के कारण इसमें तेज़ी आ रही है. आप ये सोचेंगे कि दुनिया कुछ और नहीं बल्कि क्रिकेट का एक नया रूप देख रही है.

जिसकी शुरुआत बॉलीवुड के स्टार शो से होती है, बीच में क्रिकेट खेला जाता है और बीच-बीच में कम कपड़े पहनी लड़कियाँ छक्के-चौके या फिर विकेट गिरने का जश्न मनाती रहती हैं.

कहा जा रहा है कि स्टेडियम में दर्शकों की भीड़ जमा हो रही है और इस 'तमाशे' को पहले ही सुपरहिट करार दिया जाने लगा है क्योंकि इसके कारण टीवी सीरियल में दर्शकों की रुचि कम होने लगी है.

हमें तो ये भी बताया जा रहा है कि कई नई फ़िल्मों की रिलीज़ भी इसलिए रोकी जा रही है क्योंकि वितरक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आईपीएल के कारण दर्शक सिनेमाघर तक नहीं आएँगे और बॉक्स ऑफ़िस पर फ़िल्मों को काफ़ी नुक़सान झेलना पड़ सकता है.

कोशिश

आईपीएल को इस सदी की सबसे बड़ी सफलता साबित करने की कोशिशों के बीच हममें से किसी को ये नहीं बताया जा रहा है कि कोलकाता को छोड़कर हर जगह आयोजकों को टिकट बेचने में किस तरह की समस्या आ रही है.

अगर आपने कई स्टेडियम को दर्शकों से भरे देखा है तो उसकी वजह ये है कि मैचों के पास बड़ी उदारता से बाँटे गए हैं.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि कितने दिनों तक बड़ी-बड़ी कंपनियाँ या व्यावसायी लोगों को बिना पैसे या कम पैसे पर स्टेडियम में आने की अनुमति देते रहेंगे.

उन्होंने अपनी-अपनी टीमों में बहुत ज़्यादा पैसा निवेश किया है और ऐसा किया है कमाने के लिए. उन्होंने ऐसा इसलिए नहीं किया है कि दुनिया को ये बताया जा सके कि ट्वेन्टी 20 मैच कितना अच्छा विचार है और भारत ने कैसे इसके माध्यम से क्रिकेट की दुनिया में क्रांति कर दी है.

मीडिया ने भी कैसे इसे हाथों-हाथ लिया है इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि आईपीएल को अख़बारों और टीवी चैनलों में कितनी जगह दी जा रही है.

लेकिन जिस चीज़ से मुझे सबसे ज़्यादा हैरानी हुई वो है चियरलीडर्स के मामले में चैनलों का रवैया. टीवी चैनलों पर जब इस मुद्दे की चर्चा हो रही थी, तो उन्होंने नैतिकता की पहरेदारी पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया.

साथ ही उन्होंने ये मुद्दा भी उठाया कि कैसे राजनेता खेलों को बर्बाद कर रहे हैं. लेकिन किसी भी टीवी चैनल ने इस बात को नहीं उठाया कि चियरलीडर्स ख़ुद कैसा महसूस कर रही हैं.

कैसे उन पर भद्दी-भद्दी टिप्पणियाँ की जा रही हैं. क्या हम नए अमरीका बनने के चक्कर में ये भी भूल गए हैं कि महिलाओं का सम्मान होना चाहिए और लोगों के मनोरंजन के नाम पर उन्हें सामान की तरह नहीं इस्तेमाल करना चाहिए.

मुझे पूरा विश्वास है कि अमरीका में चियरलीडर्स का इस्तेमाल इसलिए नहीं होता कि दर्शक उनके पीछे ही पड़ जाए. तो फिर लगातार आगे बढ़ने वाला भारत ये क्यों नहीं सोच पा रहा कि मैदान पर जो कुछ हो रहा है, वो शर्मनाक है.

'हॉकी फ़ॉर सेल'

क्रिकेट और ग्लैमर का यह नया संगम इतना शक्तिशाली रहा है कि भारतीय खेल का सबसे बड़ा स्कैंडल 'हॉकी फ़ॉर सेल' आईपीएल की चकाचौंध में दब कर रह गया.

हम सभी जानते हैं कि जिस तरह हॉकी को चलाया जा रहा है उसमें काफ़ी ग़लतियाँ हैं. लेकिन आख़िरकार टीवी चैनल आज तक ने अपने स्टिंग ऑपरेशन से इसे साबित करने की कोशिश की है.

टीवी का दावा है कि केपीएस गिल के क़रीबी ज्योति कुमारन को कैमरे पर पैसे लेते दिखाया गया ताकि एक खिलाड़ी को भारतीय टीम में जगह दिलाई जा सके. ज्योतिकुमारन के पास इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था.

लेकिन केपीएस गिल साब के लिए यह ज़रूरी नहीं था. एक व्यक्ति जो 14 साल से भारतीय हॉकी पर राज कर रहा है, उसे एक अधिकारी की तथाकथित ग़लती के लिए क्यों ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

और सभी ये जानते हैं कि गिल साहब हार मानने वाले नहीं हैं. जैसा कि उन्होंने एक अख़बार के संपादक को दिए इंटरव्यू में कहा. उन्होंने इंटरव्यू के दौरान अपना बचाव तो किया ही, साथ ही वो रुख़ भी अपनाया, जो जानता है, देखता है फिर भी कोई बुरा नहीं करता.

मैंने अपने रिपोर्टिंग करियर में मैंने पाया है कि केपीएस गिल के पास सही जगह पर सही लोग हैं, जो हमेशा उनके बचाव के लिए आगे आ जाते हैं. वही एक ऐसे व्यक्ति हैं जो हॉकी समझते हैं और ये भी समझते हैं कि कैसे इस खेल को चलाया जाना चाहिए.

जिस रिपोर्टर ने भी उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, उन्हें इसका नतीजा भुगतना पड़ा है. नए खेल मंत्री एमएस गिल का धन्यवाद, जिन्होंने उनसे इस्तीफ़ा देने को तो कहा.

और इस बार इस मामले में उन्हें काटने से ज़्यादा चबाना पड़ सकता है. बशर्ते आईपीएल के चक्कर में लोग ये ना भूलें कि इस देश में हॉकी भी एक खेल है जिसमें तुरंत बदलाव की आवश्यकता है.