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सोमवार, 09 मार्च, 2009 को 15:58 GMT तक के समाचार
 
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इंग्लैंड की पहली एशियाई क्रिकेटर इसा
 
इसा गुहा
इसा गुहा इंग्लैंड के लिए 59 एक दिवसीय मैच और सात टेस्ट मैच खेले हैं
इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीम की ओर से खेलनेवाली पहली एशियाई महिला क्रिकेटर हैं - इसा गुहा.

महिलाओं के नवें क्रिकेट विश्व कप में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया गई हुईं इसा गुहा के सामने जब ये सवाल रखा जाता है कि उन्होंने अभी तक कितने मैच खेले हैं, तो वे हड़बड़ा जाती हैं.

कहती हैं,"मुझे ठीक-ठीक पता नहीं, शायद 50 मैच होंगे, मगर सचमुच मुझे पता नहीं".

अब हो सकता है कि आँकड़े उन्हें ना याद हों लेकिन आँकड़े तो दर्ज हो ही चुके हैं और आँकड़े ना केवल संख्या बताते हैं बल्कि वे इसा गुहा के शानदार प्रदर्शन की भी बानगी पेश करते हैं.

इसा गुहा ने अभी तक इंग्लैंड के लिए 59 एक दिवसीय मैच और सात टेस्ट मैच खेले हैं.

2001 से लेकर अब तक उन्होंने एक दिवसीय मैचों में 18.43 के औसत से 86 विकेट और टेस्ट मैचों में 19.32 के औसत से 25 विकेट लिए हैं.

और एक समय में इंग्लैंड के हाई विकोम्ब शहर में अपने घर के बागान में अपने बड़े भाई कौश गुहा के साथ 'बैट-बॉल' खेलनेवाली इसा गुहा के लिए उपलब्धियों की ये एक ऊँची उड़ान है.

विश्व कप

इसा गुहा
इसा गुहा पिछली दो सर्दियों से ऑस्ट्रेलिया जाकर अभ्यास कर रही हैं

ऑस्ट्रेलिया में हो रही महिला विश्व कप क्रिकेट प्रतियोगिता 23 वर्षीया इसा गुहा की दूसरी विश्व कप प्रतियोगिता है.

चार वर्ष पहले दक्षिण अफ़्रीका मे हुए विश्व कप में वे चार मैचों में खेली थीं जहाँ इंग्लैंड की टीम सेमीफ़ाइनल तक पहुँची जहाँ उसे विजेता ऑस्ट्रेलिया ने हरा डाला था.

मगर इस बार इसा गुहा के हौसले बुलंद हैं. वे कहती हैं,"हम अच्छी टीम तो हमेशा से रहे हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हम और मज़बूत होकर उभरे हैं".

वर्ष 2008 में इंग्लैंड की महिला टीम 15 एकदिवसीय और ट्वेंटी-ट्वेंटी मैचों में लगातार अजेय रही.

साथ ही उसने न्यूज़ीलैंड को उनके घर में हुई सिरीज़ में हराया और अपनी ज़मीन पर वेस्टइंडीज़ और दक्षिण अफ़्रीका को पटखनी दी.

लेकिन टीम की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि रही - ऑस्ट्रेलिया को हराकर एशेज पर क़ब्ज़ा बनाए रखना.

तैयारी

इसा गुहा का मानना है कि चाहे इंग्लैंड टीम का उत्साह कितना भी बुलंद हो, विश्व कप को आसानी से नहीं लिया जा सकता क्योंकि वहाँ दूसरा मौक़ा नहीं मिलता.

इसे ध्यान में रखकर ही इसा गुहा ने लगातार दूसरी सर्दी ऑस्ट्रेलिया मे बिताई ताकि वहाँ के मौसम और माहौल में रम सकें.

युनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन में बायोकेमिस्ट्री विषय की पढ़ाई करनेवाली इसा गुहा ने युनिवर्सिटी ऑफ़ सिडनी में एक प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया है जिसके लिए वे हर सप्ताह तीन दिन प्रयोगशालाओं में जाया करती हैं.

जनवरी में भी वे मेलबोर्न गई थीं जहाँ उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस प्रतियोगिता देखी और कुछ दोपहरें उन्होंने समुद्रतट पर भी बिताईं.

लेकिन उनका असल ध्यान क्रिकेट पर लगा रहा. वे कहती हैं,"कभी-कभी आराम करना अच्छा होता है, मैं यहाँ इंग्लैंड के जितना क्रिकेट नहीं खेल पा रही लेकिन इससे ये हो रहा है कि मैं अपने खेल की रणनीति के बारे में ध्यान से सोच पा रही हूँ".

वे अपनी टीम की पिछले साल की उपलब्धियों से ख़ासी उत्साहित हैं और कहती हैं कि एशेज़ विजय के बाद पूरी टीम का ख़ुली बस में लंदन की सड़कों पर गुज़रना और ब्रिटिश प्रधानमंत्री और महारानी से मिलना उनके लिए दिवास्वप्न के समान है.

लेकिन अब उनको लगता है कि उत्साह का ये ज्वार नई बुलंदियों पर पहुँचना चाहिए. और उनको लगता है कि विश्व कप विजय से ये हो सकता है.

 
 
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