आतंकवाद विरोधी

  1. रियाज़ सुहैल

    बीबीसी उर्दू, कराची

    आईएस

    कराची में पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक पुलिस ने एक गिरफ़्तारी की है और चौंकाने वाले दावे किए हैं.

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  2. मोहित कंधारी

    जम्मू से बीबीसी हिन्दी के लिए

    जम्मू

    अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मिली इस सुरंग की लंबाई क़रीब 150 मीटर है और इसकी गहराई लगभग 25 से 30 फुट है.

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  3. श्रीनगर एनकाउंटर में तीन की मौत, परिजनों का दावा चरमपंथी नहीं थे

    सुरक्षाबल

    जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया है कि बुधवार को श्रीनगर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में तीन चरमपंथी मारे गए हैं. पुलिस का कहना है कि तीनों श्रीनगर-बारामुला हाइवे पर बड़ी कार्रवाई की योजना बना रहे थे.

    इस मामले में नया मोड़ तब आ गया जब मारे गए कथित चरमपंथियों के परिजनों ने दावा किया कि वे पिछली शाम तक घर पर थे और उनका नाम चरमपंथियों की सूची में नहीं था.

    जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि शोपियां के ज़ुबैर अहमद और पुलवामा के एजाज़ अहमद गनाई और अतहर मुश्ताक़ ‘चरमपंथी’ थे.

    हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस अख़बार से आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने कहा है कि वे चरमपंथियों की सूची में शामिल नहीं थे.

  4. सांकेतिक तस्वीर

    भारत प्रशासित कश्मीर में एनकाउंटर मामले में मेजर हत्या के दोषी. हाफ़िज़ सईद को साढ़े 15 साल जेल की सज़ा. प्रेस रिव्यू.

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  5. रेहान फ़ज़ल

    बीबीसी संवाददाता

    ओसामा बिन लादेन

    ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में किस तरह मारा गया, बराक ओबामा ने अपनी आत्मकथा 'अ प्रॉमिस्ड लैंड' में उसकी पूरी रणनीति और घटनाक्रम का ज़िक्र किया है.

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  6. शहीद असलम और शहज़ाद मलिक

    बीबीसी उर्दू

    ताज होटल पर हमला

    साल 2008 में मुंबई में हुए भयावह हमले का मुकदमा पाकिस्तान में 12 साल से चल रहा है, जानिए क्या है केस की हालत.

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  7. जम्मू और कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के हमले को लेकर भारत ने दिया पाकिस्तान को कड़ा संदेश

    जम्मू कश्मीर
    Image caption: प्रतीकात्मक तस्वीर

    जम्मू और कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के हमले को लेकर पाकिस्तान को दिए संदेश में भारत ने गंभीर चिंता जताई है.

    भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ जम्मू और कश्मीर के नगरोटा में 19 नवंबर को भारतीय सेना ने एक बड़े आतंकी हमले को नाकाम कर दिया.

    भारत सरकार का कहना है कि शुरुआती रिपोर्ट्स में ये सामने आया है कि हमलावर पाकिस्तान में एक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य थे. कई देशों और संयुक्त राष्ट्र ने इस संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है.

    भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राजदूत को तलब किया और अपना विरोध जताया है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान अपने यहां आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के सहयोग की नीति छोड़ दे.

    भारत सरकार का कहना है कि आतंकवाद से लड़ाई में वो अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है.

  8. हाफ़िज़ सईद

    पाकिस्तान की एक अदालत ने प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा के मुखिया हाफ़िज़ सईद को साढ़े 10 साल क़ैद की सज़ा सुनाई है.

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  9. इमरान ख़ान

    एक दिन पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री और सेना के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर भारत पर गंभीर आरोप लगाये थे. जिस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया है.

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  10. तेहरान में अल-क़ायदा कमांडर की मौत से ईरान ने किया इनकार

    ईरान

    ईरान ने उस रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि इस साल अगस्त में राजधानी तेहरान में अल-क़ायदा से जुड़े एक वरिष्ठ कमांडर की मौत हुई थी.

    अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें दावा किया गया था कि चरपमंथी समूह अल-क़ायदा के दूसरे बड़े नेता अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह को अमेरिका के कहने पर तेहरान की गलियों में इसराइली एजेंटों ने गोली मार दी थी.

    एफ़बीआई के अनुसार अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह को अबु मोहम्मद अल-मसरी और अबु मोहम्मद के नाम से भी जाना जाता है. ईरान ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि उनके देश में अल-क़ायदा का कोई "चरमपंथी" कभी नहीं रहा.

    अब्दुल्लाह पर साल 1998 में अफ्रीका में मौजूद अमेरिकी दूतावासों पर घातक हमलों की साजिश रचने का आरोप हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि सात अगस्त को मोटरसाइकिल पर सवार दो हमलावरों ने अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह ओर उनकी बेटी को गोली मार दी.

    रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने इस ख़बर को पहले छिपाने की कोशिश की. ईरान और लेबनान की मीडिया में इस घटना से जुड़ी जो ख़बरें आई उनमें कहा गया था कि सात अगस्त को लेबनान के इतिहास के एक प्रोफ़ेसर और उनकी बेटी को गोली मार दी गई है.

    शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी ख़बर को खारिज करते हुए कहा, "वक्त-वक्त पर अमेरिका और इसराइल इस तरह के चरमपंथी समूहों के साथ ईरान का नाम जोड़ने की कोशिश करते हैं, वो मीडिया को ग़लत जानकारी देते हैं ताकि इन समूहों और इलाक़े के दूसरे चरमपंथी समूहों की आपराधिक गतिविधियों से ध्यान भटक जाए."

    इसराइल के चैनल 12 ब्रॉडकास्टर ने पश्चिमी ख़ुफ़िया अधिकारियों के हवाले से बाद में रिपोर्ट दी कि अब्दुल्लाह की मौत एक ऐसे अभियान का नतीजा था जो "अमेरिका और इसराइल के हितों में था" क्योंकि वो "दुनिया भर में यहूदियों और इसराइल पर हमले की योजना बना रहे थे."

    अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह
    Image caption: अब्दुल्लाह अहमद अब्दुल्लाह

    अब्दुल्लाह उस जिहादी समूह के संस्थापकों में से एक थे जिसने मध्यपूर्व के पूरा इलाक़े और अफ्रीका में कई हमलों को अंजाम दिया और अमेरिका में हुए 11 सितंबर 2001 के हमले को भी अंजाम दिया. उन पर कीनिया और तंज़ानिया में मौजूद अमेरिकी दूतावासों पर हमलों की योजना बनाने का आरोप है. 1998 के इन हमलों में 224 लोगों की जान गई थी.

    अमेरिकी ख़ुफ़िया अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा था कि साल 2003 से अब्दुल्लाह ईरान में ही थे. पहले वो हाउस अरेस्ट में थे लेकिन फिर बाद में आज़ादी के साथ जीवन बिताने लगे थे. ईरान और अल-क़ायदा के बीच किसी तरह का कोई संबंध होना बेहद असामान्य बात होगी- कई बार दोनों एक दूसरे के ख़िलाफ़ लड़ चुके हैं.

    दोनों देश इस्लाम की दो ऐसी धाराओं को मानते हैं जिनमें हमेशा से टकराव रहा है. ईरान में शिया मुसलमानों की संख्या अधिक है जबकि अल-क़ायदा सुन्नी जिहादी समूह है.

    अब्दुल्लाह अब भी एफ़बीआई की आतंकवादियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल हैं, जहां उनकी जानकारी देने वाले को एक करोड़ डॉलर का ईनाम देने की बात की गई है.