राजनीति

  1. नवजोत सिंह सिद्धू

    क्रिकेट का मैदान हो या राजनीति का अखाड़ा, नवजोत सिंह सिद्धू का इतिहास बताता है कि वो अपने कप्तान से बग़ावत करते रहे हैं. उनके उतार चढ़ाव भरे राजनीतिक जीवन पर डालें एक नज़र.

    और पढ़ें
    next
  2. अतुल संगर

    संपादक, बीबीसी पंजाबी सेवा

    कैप्टन अमरिंदर सिंह

    नवजोत सिंह सिद्धू ने वो कर दिया है जो अकाली दल भी नहीं कर सकी. लेकिन अब आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह बड़ी चुनौती बन सकते हैं.

    और पढ़ें
    next
  3. रेहान फ़ज़ल

    बीबीसी संवाददाता

    निज़ाम हैदराबाद

    निज़ाम को टाइम पत्रिका ने दुनिया का सबसे अमीर शख़्स घोषित किया था. लेकिन उनकी कंजूसी के भी बहुत से किस्से मशहूर थे. उन्होंने हैदराबाद को भारत से अलग रखने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया था. लेकिन हसरत अधूरी रही.

    और पढ़ें
    next
  4. Video content

    Video caption: राकेश टिकैत ने असदुद्दीन ओवैसी को बताया बीजेपी का 'चचा जान'

    टिकैत ने कहा कि ओवैसी और बीजेपी, ए-बी टीम हैं और जनता को उनसे संभलकर रहने की ज़रूरत है.

  5. प्रदीप कुमार

    बीबीसी संवाददाता

    राजा महेंद्र प्रताप सिंह

    उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सितंबर, 2019 में राजा महेंद्र सिंह की याद में अलीगढ़ में यूनिवर्सिटी खोलने की घोषणा की थी. लेकिन क्या आप उनकी शख़्सियत के बारे में जानते हैं. इतिहास में राजा महेंद्र प्रताप सिंह का क्या योगदान रहा है.

    और पढ़ें
    next
  6. समीरात्मज मिश्र

    बीबीसी हिंदी के लिए

    महिला किसान

    क्या यूपी के चुनाव में किसान आंदोलन का बीजेपी को मिलेगा फायदा या उठाना पड़ेगा नुकसान?

    और पढ़ें
    next
  7. दिलनवाज़ पाशा

    बीबीसी संवाददाता

    फाइल फोटो

    सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध में चले अभियानों के बीच 'डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व' नाम से हुई इस वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में हिंदुत्व को नफ़रत से प्रेरित विचारधारा बताया गया और इस पर सवाल खड़े किए गए.

    और पढ़ें
    next
  8. प्रदीप कुमार

    बीबीसी संवाददाता

    भूपेंद्र पटेल और विजय रुपाणी

    लो प्रोफ़ाइल होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन के क़रीबी माने जाते हैं भूपेंद्र पटेल. क्या इन्हीं वजहों से पीएम मोदी ने उन्हें गुजरात की सत्ता की रेस में सबसे आगे कर दिया या कोई और वजह भी रही.

    और पढ़ें
    next
  9. टीम बीबीसी गुजराती

    नई दिल्ली

    नरेंद्र मोदी

    विजय रुपाणी के इस्तीफ़े के बाद से यह सवाल एक बार फिर उठने लगा है. नरेंद्र मोदी के केंद्र में पहुंचने के बाद से गुजरात की राजनीति में अस्थिरता क्यों बनी हुई है?

    और पढ़ें
    next
  10. यूपी के विज्ञापन में कोलकाता की तस्वीर: योगी सरकार की खिंचाई, अख़बार ने माँगी माफ़ी

    View more on twitter

    अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस ने अपने अख़बार में छपे उत्तर प्रदेश सरकार के एक विज्ञापन में 'ग़लत तस्वीर' के इस्तेमाल पर माफ़ी मांगी है.

    अख़बार में 'ट्रांसफ़ॉर्मिंग उत्तर प्रदेश अंडर योगी आदित्यनाथ' (योगी आदित्यनाथ के शासन में बदलता उत्तर प्रदेश) शीर्षक के साथ छपे इस फ़ुल पेज विज्ञापन में मुख्यमंत्री की बड़ी सी तस्वीर लगी है.

    योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के नीचे ऊँची इमारतें, फ़्लाईओवर और चमचमाती सड़कें देखी जा सकती हैं.

    विज्ञापन में लिखा गया है- 2017 से पहले निवेश के मामले में बाहर के लोग उत्तर प्रदेश के नाम पर हंसते थे. पिछले साढ़े चार सालों में हमने उत्तर प्रदेश को लेकर बनी नकारात्मक छवि को तोड़ दिया है.

    हालाँकि यह विज्ञापन सामने आने पर कुछ फ़ैक्ट चेकर्स ने ध्यान दिलाया कि ये इमारतें और फ़्लाईओवर उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की हैं.

    इन तस्वीरों में कोलकाता में चलने वाली काली-पीली टैक्सी भी देखी जा सकती है.

    यह बात सामने आने पर उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना होने लगी.

    लोगों ने सवाल किया कि क्या उत्तर प्रदेश के विकास को दिखाने के लिए बीजेपी सरकार के पास अपने किए कामों की कोई तस्वीर भी नहीं है?

    View more on twitter

    तंज़ और तीखी प्रतिक्रियाएं

    तस्वीर पर पत्रकारों और फ़ैक्ट चेकर्स के अलावा राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रिया दी.

    पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने इस पूरे मामले को लेकर चुटकी ली.

    उन्होंने ट्वीट किया,“ठग योगी के यूपी के विज्ञापन में कोलकाता का एमएए फ्लाईओवर है. हमारा जे डब्लू मैरियट और मशहूर पीली टैक्सी है. अपनी नीयत बदलें या फिर एड एजेंसी!”

    मोइत्रा ने यह भी लिखा कि वो अपने ख़िलाफ़ नोएडा में एफआईआर होने का इंतज़ार करेंगी.

    टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने पत्रकार वीर सांघवी का एक ट्वीट रिट्वीट किया जिसमें लिखा था- तो योगीजी यूपी को बंगाल बना देंगे? क्यों नही? अच्छा आइडिया है.

    View more on twitter

    अख़बार की माफ़ी पर भी उठे सवाल

    विवाद बढ़ने पर अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से इसके लिए माफ़ी माँगी.

    इस ट्वीट में लिखा गया है, "अख़बार ने उत्तर प्रदेश सरकार का एक विज्ञापन तैयार किया था जिसमें भूलवश ग़लत तस्वीर छप गई थी."

    ट्वीट में लिखा गया, ''हमें इस ग़लती का गहरा अफ़सोस है और यह तस्वीर अख़बार के सभी ऑनलाइन संस्करणों से हटा ली गई है."

    हालाँकि सोशल मीडिया पर लोगों ने यह सवाल भी किया कि इसके लिए इंडियन एक्सप्रेस माफ़ी क्यों माँग रहा है?

    कई लोगों ने पूछा कि क्या अख़बार के मार्केटिंग विभाग ने यह तस्वीर चुनी थी? और अगर हाँ तो क्या इसे यूपी सरकार की मंज़ूरी के बिना छाप दिया गया?

    लोगों ने पूछा है कि क्या अख़बार ने किसी दबाव में आकर माफ़ी माँगी है. अब यह मामला थमता नज़र नहीं आ रहा है और विवाद जारी है.