विदेश

  1. वोडाफोन आइडिया में अपनी हिस्सेदारी सरकार को सौंपने के लिए तैयार: कुमार मंगलम बिरला

    वोडाफोन आइडिया लिमिटेड

    आदित्य बिरला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने कर्ज में डूबी कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) में अपनी हिस्सेदारी भारत सरकार को देने की पेशकश की है.

    वीआईएल में 27 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले कुमार मंगलम बिरला ने ये भी कहा है कि भारत सरकार चाहे तो उसकी हिस्सेदारी किसी ऐसे संगठन को भी देने पर विचार कर सकती है जो इस कंपनी को चलाए रखने में सक्षम हो.

    अरबपति कारोबारी कुमार मंगलम बिरला ने कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाउबा को ये चिट्ठी जून में लिखी थी.

    वोडाफोन आइडिया लिमिटेड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कंपनी पर 58,254 करोड़ रुपये की देनदारी (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू लायबिलिटी) है जिसमें से वो 7854.37 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है और 50.399.63 करोड़ रुपये अभी भी कंपनी पर बाक़ी हैं.

    वोडाफोन आइडिया लिमिटेड और एयरटेल ने सरकार के हिसाब किताब में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे ठुकरा दिया.

    कुमार मंगलम बिरला
    Image caption: कुमार मंगलम बिरला

    कुमार मंगलम बिरला का कहना है कि निवेशक वीआईएल में पैसा नहीं लगाने चाहते हैं क्योंकि एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू लायबिलिटी (कंपनी पर देनदारी), स्पेक्ट्रम के भुगतान की देनदारी चुकाने की मोहलत जैसी बातों को लेकर स्पष्टता नहीं है.

    सात जून को लिखी इस चिट्ठी में कुमार मंगलम बिरला ने कहा है कि जुलाई तक इन मुद्दों पर अगर सरकार का सक्रिय सहयोग नहीं मिला तो कंपनी ऐसे मुकाम पर पहुंच जाएगी जहां उसे अपने पैरों पर दोबारा खड़ा करना नामुमकिन हो जाएगा.

    बिरला ने लिखा, "वोडाफोन इंडिया लिमिटेड से जुड़े 27 करोड़ उपभोक्ताओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी की भावना से मैं ये कहता हूं कि मैं कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को किसी भी पब्लिक सेक्टर/सरकारी/घरेलू वित्तीय संस्थान या अन्य किसी को भी जिसे सरकार ये कंपनी को चलाए रखने लायक समझे, सौंपने के लिए तैयार हूं."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ आदित्य बिरला समूह या वोडाफोन आइडिया लिमिटेड की तरफ़ से इस चिट्ठी को लेकर कोई प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है. और ये भी स्पष्ट नहीं है कि सात जून की चिट्ठी के बाद बिरला और सरकार के बीच कोई और संवाद हुआ है या नहीं.

  2. तालिबान ने ओसामा बिन लादेन के लिए पूरे अफ़ग़ानिस्तान को बर्बाद कर दियाः अफ़ग़ान राष्ट्रपति

    अफ़ग़ानिस्तान

    अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने रविवार को एक बार फिर पाकिस्तान पर तालिबान का समर्थन करने का आरोप लगाया और दावा किया कि तालिबान 'पंजाब के इशारे पर' अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध को लंबा खींच रहा है.

    अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण और पश्चिम में तीन प्रमुख शहरों (हेरात, लश्कर गाह और कंधार) में लड़ाई जारी है. तालिबान लड़ाके इन शहरों को सरकारी सुरक्षा बलों से छीनने की कोशिश कर रहे हैं.

    अफ़ग़ान सुरक्षा बलों ने तालिबान के आने की आशंका में लश्कर गाह में अपने सैकड़ों कमांडरों को तैनात कर दिया है. हेलमंद प्रांत में एक सैन्य अधिकारी ने कहा कि वो हवाई हमलों की मदद से तालिबान को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं.

    लेकिन राष्ट्रपति गनी ने तालिबान पर अपने बयान में कहा, "यदि आप अफ़ग़ान हैं, तो आएं और देश के निर्माण में मिलकर काम करें और अगर आपने पंजाबियों और चरमपंथी समूहों के प्रति निष्ठा का वचन दिया है, तो अपने आप को अफ़ग़ान मत कहिए."

    गौरतलब है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस तरह के आरोपों का बार-बार खंडन किया है और कहा है कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में अमन चाहता है और पाकिस्तान अफ़ग़ान हुकूमत के ख़िलाफ़ तालिबान का समर्थन नहीं कर रहा है बल्कि सभी पक्षों के बीच बातचीत में भूमिका निभा रहा है.

    राष्ट्रपति गनी

    राष्ट्रपति गनी ने अपने भाषण में क्या कहा?

    अफ़ग़ान राष्ट्रपति और उनकी सरकार ने तालिबान पर पहले दिन से ही पाकिस्तान का समर्थन करने का आरोप लगाया और अक्सर पाकिस्तान के बजाय पंजाब और पंजाबियों का जिक्र किया.

    राष्ट्रपति गनी ने अपने भाषण में तालिबान पर केवल एक व्यक्ति के कारण पूरे अफ़ग़ानिस्तान को युद्ध में धकेलने का आरोप लगाया.

    उन्होंने अल-कायदा नेटवर्क के नेता ओसामा बिन लादेन का नाम लिया और तालिबान से पूछा, "आपने एक आदमी की खातिर पूरे अफ़ग़ानिस्तान को क्यों बर्बाद कर दिया? एक आदमी अहम था या ढाई करोड़ अफ़ग़ान आवाम?"

    अपने संबोधन में राष्ट्रपति गनी ने पूछा कि तालिबान का मुखिया मुल्ला हेबतुल्ला कहां और किस मांद में है और क्या वह जीवित है?

    राष्ट्रपति गनी ने कहा, "यदि वे जीवित हैं, तो चलिए हेरात के बाज़ारों में और काबुल को चलते हैं."

    तालिबान नेता मुल्ला हेबतुल्लाह और उनके अन्य नेता अज्ञात स्थान से तालिबान का नेतृत्व कर रहे हैं. कई अफ़ग़ान लोगों का ये दावा है कि तालिबान नेतृत्व पाकिस्तान में छिपा है,

    लेकिन खुद अफ़ग़ान तालिबान का दावा है कि उनके सभी नेता अफ़ग़ानिस्तान में ही हैं. राष्ट्रपति गनी ने कहा कि अगर तालिबान लोगों का सम्मान करता है और चुनाव में भाग लेना चाहता है, तो वे छह महीने या एक साल में नए चुनाव करा सकते हैं.

    उन्होंने जोर देकर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में रक्तपात की अनुमति नहीं दी जाएगी और अफ़ग़ान आवाम के पास एक-दूसरे की जान लेने की कोई वजह नहीं है.

    तालिबान

    अफ़ग़ान राष्ट्रपति के बयान पर तालिबान की प्रतिक्रिया

    राष्ट्रपति गनी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तालिबान ने उसे 'बकवास' बताया है.

    तालिबान ने कहा कि राष्ट्रपति गनी अपनी मुश्किल स्थिति को नियंत्रित करना चाहते हैं.

    तालिबान ने कहा कि राष्ट्रपति गनी का वक़्त ख़त्म हो गया है. जंग का एलान करने, आरोप लगाने और गलतबयानी से उन्हें और मोहलत नहीं मिलेगी.

  3. मोहम्मद हारुन रहमानी

    बीबीसी मॉनिटरिंग

    तालिबान

    अमेरिका के नेतृत्व वाली सेना के पीछे हटने को तालिबान के बढ़ते नियंत्रण की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. लेकिन कारण और भी हैं. पढ़िए इस रिपोर्ट में.

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  4. कार्टून

    ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने पर आज का कार्टून.

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  7. अफ़ग़ानिस्तान से टीम पहुँची पाकिस्तान, राजदूत की बेटी के मामले की करेगी जाँच

    सिलसिला नबीख़ेल
    Image caption: पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी सिलसिला नबीख़ेल

    पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से एक टीम पिछले दिनों अफ़ग़ान राजदूत की बेटी के साथ हुई घटना की जाँच के लिए पाकिस्तान पहुँच गई है.

    इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में शेख़ रशीद ने कहा, "अफ़ग़ान टीम इस मामले की जाँच के लिए पहुँच गई है. मैंने आईजी पुलिस को निर्देश दिया है कि वो अपनी जाँच के नतीजे और तथ्यों को अफ़ग़ान जाँच समिति को सौंप दें."

    "पुलिस से मैंने कहा है कि वो विदेश मंत्रालय से मिलकर अपनी सारी फ़ुटेज और वो सारे 11 लोग जिनमें चार टैक्सी ड्राइवर शामिल हैं. उन सब की जानकारी अफ़ग़ान टीम को सौंप दें. वो चाहें तो उन सबसे पूछताछ कर सकते हैं."

    उन्होंने कहा कि पुलिस ने जाँच पूरी कर ली है और वो अफ़ग़ान टीम के किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं.

    पाकिस्तानी मंत्री ने कहा, "वो अपनी जाँच करने के लिए स्वतंत्र हैं. पाकिस्तान एक स्वतंत्र मुल्क़ है. वे विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं."

    शेख़ रशीद
    Image caption: शेख़ रशीद

    शेख़ रशीद के बयानों पर भारत और अफ़ग़ानिस्तान ने जताई थी आपत्ति

    पाकिस्तानी गृह मंत्री शुरू से ही अफग़ान राजदूत की बेटी के मामले में किए गए दावों पर संदेह जताते रहे हैं और इसे लेकर अफ़ग़ानिस्तान ने नाराज़गी भी जताई थी.

    पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद ने दावा किया था कि इस्लामाबाद से अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत की बेटी का अपहरण नहीं हुआ था और इस घटना में भारत का हाथ है.

    इस मामले को लेकर अफ़ग़ानिस्तान और भारत दोनों ने पाकिस्तान के रवैये पर सख़्त एतराज़ जताया था.

    अफ़ग़ानिस्तान में राजदूकत नजीबुल्ला अलीख़ेल ने पिछले महीने ख़ुद ट्वीट कर बताया था कि उनकी बेटी सिलसिला अलीख़ेल को अग़वा किया गया और उनके साथ मारपीट हुई.

    लेकिन पाकिस्तान के इस घटना को लेकर संदेह जताते रहने पर अफ़ग़ान सरकार के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस तरह के पूर्व निर्धारित फ़ैसलों से आपसी अविश्वास बढ़ेगा.

    मंत्रालय ने पिछले महीने एक बयान में कहा,” जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती और लिप्त लोगों को गिरफ़्तार नहीं किया जाता, ऐसे एकतरफ़ा बयानों और ग़ैर-पेशेवर फ़ैसलों से जाँच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे और आपसी अविश्वास बढ़ेगा.”

    वहीं भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक ब्रीफ़िंग में इसे एक हैरान करने वाली घटना बताते हुए कहा था- "चूँकि पाकिस्तान के गृह मंत्री ने भारत को इसमें घसीटा है, तो मैं ये कहना चाहूँगा कि पाकिस्तान के अपने स्तर के हिसाब से भी, इस घटना में पीड़ित की कही बातों को ख़ारिज करना, अपने आप में एक नए तरह की नीच हरकत है."

  8. टोक्यो ओलंपिक: बेलारूस की खिलाड़ी को पोलैंड से क्यों मांगनी पड़ी पनाह

    क्रिस्टीना तिमानोवस्काया

    टोक्यो ओलंपिक में भाग ले रहीं बेलारूस की खिलाड़ी क्रिस्टीना तिमानोवस्काया ने पोलैंड से शरण मांगी है. रिपोर्टों के मुताबिक़ क्रिस्टीना को जल्दी घर लौटने के लिए कहा गया था जिससे उन्होंने इनकार कर दिया.

    क्रिस्टीना तिमानोवस्काया ने जापानी पुलिस की सुरक्षा में बीती रात एक होटल में गुजारी. उनका कहना है कि कोच की ओलचना करने की वजह से उन्हें जबरन एयरपोर्ट पर ले जाया गया था.

    उन्होंने बेलारूस वापस लौटने पर अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी. दूसरी तरफ़ बेलारूस का कहना है कि क्रिस्टीना की मानसिक स्थिति के कारण उन्हें टीम से हटा दिया गया था.

    24 वर्षीय क्रिस्टीना की एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वो टोक्यो स्थित पोलैंड के दूतावास में दाखिल होते हुए दिख रही हैं. बेलारूस में खिलाड़ियों की मदद करने वाले एक विपक्षी समूह ने बीबीसी को बताया कि क्रिस्टीना ने पोलैंड से शरण मांगी है.

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    बेलारूस में लंबे समय से राष्ट्रपति पद पर काबिज़ अलेक्ज़ेंडर लुकाशेन्को के विवादित पुनर्निवाचन को लेकर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान पिछले साल 'बेलारूसीयन स्पोर्ट सॉलिडरिटी फाउंडेशन' का गठन किया गया था.

    इस संगठन का मक़सद खिलाड़ियों की मदद करना है. विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए बेलारूस के सुरक्षा बलों ने असंतुष्टों पर कड़ी कार्रवाई शुरू की.

    इस विरोध प्रदर्शन में कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी शामिल हुए थे जिनकी सरकारी फंडिंग रोक दी गई और उन्हें टीम से निकाल दिया गया. कुछ खिलाड़ी हिरासत में भी लिए गए थे.

    पोलैंड के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी मार्सिन प्रज़ीडैक्ज़ ने बताया था कि क्रिस्टीना को मानवीय आधार पर पोलैंड के वीज़ा की पेशकश की गई थी.

    क्रिस्टीना तिमानोवस्काया

    क्रिस्टीना को सोमवार को महिलाओं की 200 मीटर रेस प्रतिस्पर्धा में भाग लेना था. उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बात की शिकायत की थी कि जब कुछ खिलाड़ी 4x400 मीटर की रीले रेस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के लिए अयोग्य पाए गए तो उनका नाम इस इवेंट में डाल दिया गया और इसके लिए उन्हें मोहलत नहीं दी गई.

    क्रिस्टीना के इस वीडियो मैसेज को लेकर बेलारूस के सरकारी मीडिया में कड़ी आलोचना हुई. एक टेलीविजन चैनल ने कहा कि क्रिस्टीना में टीम भावनी की कमी है.

    क्रिस्टीना ने बताया कि बेलारूस की टीम के अधिकारी उनके कमरे में आए और बैग पैक करने के लिए एक घंटे की मोहलत दी. उन्हें टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर उन्हें जबरन लाया गया. उनका कहना है कि टीम के अधिकारी उन पर घर वापस लौटने के लिए दबाव बना रहे थे. उन्होंने इंटरनेशनल ओलंपिक एसोसिएशन से मदद भी मांगी है.

    क्रिस्टीना तिमानोवस्काया

    बेलारूसीयन स्पोर्ट सॉलिडरिटी फाउंडेशन के टेलीग्राम चैनल पर उन्होंने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कहा, "वे मुझे बिना मेरी इजाजत के देश से बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं."

    फाउंडेशन के एक सदस्य अनातोल कोटाउ ने रविवार को बीबीसी को बताया, "उन्हें डर है कि बेलारूस में उनके परिवार को सताया जाएगा. फिलहाल उनकी चिंता इसी बात को लेकर है."

    ऐसी रिपोर्टें हैं कि क्रिस्टीना के पति बेलारूस छोड़कर यूक्रेन चले गए हैं.

    बेलारूस की ओलंपिक कमेटी का कहना है कि क्रिस्टीना की मानसिक स्थिति के कारण उन्हें टीम से हटाया गया था.

    सोमवार को इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने बताया कि आईओसी ने बेलारूस कमेटी के ख़िलाफ़ कदम उठाए हैं. आईओसी ने कुछ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए हैं जिसमें बेलारूस ओलंपिक कमेटी के अध्यक्ष के बेटे भी शामिल हैं.

  9. पाकिस्तान

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने शनिवार को मुल्तान में ऐसा क्या कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में इसे लेकर विवाद हो गया और पाकिस्तान को अब सफ़ाई देनी पड़ी.

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  10. इसराइल के तेल टैंकर पर हमले के बाद ब्रिटेन और रोमानिया ने ईरान के राजदूत को तलब किया

    मर्सर स्ट्रीट

    ओमान के पास अरब सागर में इसराइली तेल टैंकर 'मर्सर स्ट्रीट' पर हमले का मामला शांत होता हुआ नहीं दिख रहा है. इस घटना के बाद ब्रिटेन और रोमानिया ने तेल टैंकर पर तैनात अपने नागरिकों की मौत के मुद्दे पर नाराज़गी जताते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया किया है.

    इससे पहले इसराइल ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था, फिर अमेरिकी सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि 'मर्सर स्ट्रीट' पर ड्रोन हमला हुआ था.

    ब्रिटेन और अमेरिका का मानना है कि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन बताया है.

    बीते गुरुवार को मर्सर स्ट्रीट पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी जिसमें एक ब्रितानी नागरिक है तो दूसरा रोमानिया का.

    रोमानिया ने भी इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है और बुखारेस्ट में उसके राजदूत को बुलाकर घटना पर तुरंत स्पष्टीकरण देने को कहा है.

    इसराइल, ब्रिटेन और अमेरिका की तरह ही रोमानिया ने भी सबूतों के हवाले से कहा है कि मर्सर स्ट्रीट को जानबूझकर निशाना बनाया गया है और इसकी साज़िश ईरान ने रची थी.

    बीबीसी की पर्सियन सर्विस के मुताबिक़ रोमानिया के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "नागरिकों को निशाना बनाकर जानोमाल को नुक़सान पहुंचाने को किसी भी तरह वाजिब नहीं ठहराया जा सकता है और इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना की जानी चाहिए. रोमानिया की सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय साझीदार देशों के साथ इस घटना का उचित जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखती है."