मध्य पूर्व

  1. ईरान में कोरोना

    बीबीसी फ़ारसी सेवा की एक पड़ताल में पता चला है कि ईरान में कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या सरकार के दावे से क़रीब तीन गुना ज़्यादा है.

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  2. ब्रेकिंग न्यूज़ईरानः मध्य पूर्व में कोरोना संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश

    ईरान

    ईरान में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़कर तीन लाख से ज़्यादा हो गई है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को सरकारी टेलीविज़न चैनल पर बताया कि देश में अभी तक 301,530 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

    मध्य पूर्व के देशों में ईरान कोरोना संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित है. 15 अप्रैल के आस-पास जब देश में कोरोना लॉकडाउन से ढील दिए जाने का फ़ैसला किया गया तो मुल्क में संक्रमण और मौत दोनों ही के मामले तेजी से बढ़े.

    पिछले 24 घंटों में ईरान में इस महामारी ने 226 लोगों की जानें ली हैं. कोरोना वायरस के कारण देश में अब तक 16,569 लोगों की जानें जा चुकी हैं.

    ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने शनिवार को लोगों से अपील की थी कि आने वाले मुस्लिम त्योहार के दौरान वे हेल्थ प्रोटोकॉल्स और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करें.

    कोरोना

    बीते दिनों देश के एक प्रमुख धार्मिक शहर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ने का मामला सामने आया था.

    ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री इराज हरीर्ची ने सरकारी टेलीविज़न पर शनिवार को कहा कि लोग उत्तर पूर्वी इलाके के पवित्र शहर मशहद न जाएं.

    वहां पिछले एक महीने में कोरोना संक्रमण के मामले तीन सौ फीसदी की दर से बढ़े हैं. इस महीने के आख़िर में दुनिया भर के मुसलमान बकरीद का त्योहार मना रहे हैं.

    इस साल कोरोना महामारी को देखते हुए सऊदी अरब ने भी हज करने वाले लोगों की संख्या अप्रत्याशित रूप से कम करने का फ़ैसला किया है.

  3. ईरानी मिसाइल

    अमरीकी नौसेना ने ईरान के इस अभ्यास को ग़ैर ज़िम्मेदाराना और लापरवाही भरा बताया है.

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  4. कुवैत में भारतीयों के लिए राहत, नौकरी वाले क़ानून में छूट की घोषणा

    कुवैत

    कुवैत की सरकार ने एक क़ानून का मसौदा तैयार किया है जिसमें विदेशी लोगों को देश में काम करने की इजाज़त दी जाएगी.

    कुवैत अपने नागरिकों और बाहर से आए लोगों के बीच रोज़गार का संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

    अंग्रेज़ी अख़बार 'अरब न्यूज़' के अनुसार, नए क़ानून के तहत घरेलू कामगारों, गल्फ़ कॉर्पोरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के नागरिकों, सरकारी ठेकों में काम करने वाले लोगों, राजनयिकों और कुवैती नागरिकों के रिश्तेदारों को कोटा सिस्टम से बाहर रखा जाएगा.

    स्थानीय अख़बार कुवैत टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क़ानून का मक़सद दूसरे देशों के लोगों को कुवैत में नौकरी हासिल करने से रोकना है.

    हालांकि नियोक्ताओं को एक निश्चित संख्या में विदेशी लोगों को नौकरी देने की छूट दी गई है.

    कुवैत में भारतीयों के लिए राहत, नौकरी वाले क़ानून में छूट की घोषणा

    कुवैत

    प्रस्तावित क़ानून के तहत कुवैत में काम करने वाले भारतीय लोगों के लिए 15 फ़ीसद का कोटा तय किया गया है.

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  5. अरब देशों का संकट: क्या महामारी ने तेल का दौर ख़त्म कर दिया है?

    ओपेक देशों का तेल संकट

    कोरोना वायरस संकट ने दुनिया के तेल बाज़ार को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं.

    इस साल की शुरुआत में ही महामारी ने तेल की रोज़ाना होने वाली खपत को एक तिहाई पर पहुंचा दिया.

    और ये सब कुछ ऐसे वक्त में हुआ जब दुनिया भर में बैटरी से चलने वाली गाड़ियों की मांग तेज़ी से बढ़ रही थी और लोगों का रुझान ऊर्जा के ग़ैरपरंपरागत स्रोतों की तरफ़ बढ़ रहा था.

    ऊर्जा विशेषज्ञ पहले से ही लंबे समय में होने वाली तेल की मांग में कमी आने का संकेत दे रहे थे.

    साठ साल पहले वजूद में ओपेक के कुछ अधिकारियों ने ये सवाल पूछना शुरू कर दिया था कि क्या बदलाव के इस संकेत को स्थाई मान लिया जाए और हालात तेल का दौर ख़त्म होने की ओर बढ़ने लगे तो आपूर्ति का प्रबंधन कैसे किया जाएगा.

    ओपेक देशों का तेल संकट

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स का तेल उद्योग के सूत्रों के हवाले से कहना है, "लोगों को नई हकीकत का एहसास हो रहा है. वे इस दिशा में सोच भी रहे हैं. सबको अंदाज़ा है कि तेल की मांग शायद कभी भी पहले वाले स्तर तक न पहुंच पाए."

    इस साल कच्चे तेल की कीमत 16 डॉलर प्रति बैरल के नीचे तक चली गई थी, इससे ओपेक देशों ने लंबे समय में मांग की संभावनाओं पर फिर से विचार किए जाने की मांग की है.

    महज 12 साल पहले इन्हीं ओपेक देशों में पैसे की बाढ़ आ गई थी जब कच्चे तेल की कीमत 145 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थी.

    लेकिन अब हालात बदल गए हैं और तेल की खपत में कमी का दौर जारी रहने की बात कही जा रही है. ओपेक देश रूस के साथ काम करने की संभावना तलाश रहे हैं ताकि राजस्व में कमी को संभाला जा सके.

    ओपेक देशों का तेल संकट

    हसन क़बाज़र्द साल 2006 से 2013 के बीच ओपेक के रिसर्च विभाग के चीफ़ रह चुके हैं और इन्वेस्टमेंट बैंक्स और हेज फंडों को सलाह देते हैं.

    उनका कहना है, "ग़ैर-ओपेक देशों में तेल का उत्पदान बढ़ने से और तेल की मांग में कमी आने से ओपेक का काम मुश्किल हो जाएगा."

    ओपेक के एक सदस्य देश के तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अतीत में भी तेल की मांग में कमी और उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव के बीच संबंध देखा गया था.

    इस बार भी कुछ अलग नहीं होने जा रहा है. साल 2019 में दुनिया भर में 99.7 मिलियन बैरल तेल की खपत हर रोज़ के हिसाब से हो रही थी और साल 2020 के लिए ओपेक का अनुमान था कि ये बढ़कर 101 मिलियन बैरल प्रति दिन हो जाएगा.

    लेकिन दुनिया भर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण ओपेक ने इस पूर्वानुमान को कम करके 91 मिलियन बैरल प्रति दिन कर दिया है जो 2019 के स्तर से भी कम है.

  6. तुर्की का जहाज़ ओरुक रीज़

    तुर्की भूमध्यसागर के इलाक़े में ड्रिलिंग करना चाहता है जिसका मिस्र और यूनान समेत यूरोप के कई देश विरोध कर रहे हैं.

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  7. स्टीफ़नी हेगार्टी

    बीबीसी न्यूज़ संवाददाता

    प्रवासियों से भरी नाव

    सूडान और लीबिया से हज़ारों लोग भूमध्य सागर पार कर यूरोप पहुंचना चाहते हैं लेकिन कोरोना महामारी के दौर में यहां एनजीओ के बचाव दल नहीं पहुंच पा रहे हैं.

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  8. अमरीका में कोरोना वायरस

    क्या मच्छरों से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता है, या नहीं फैलता है, एक नयी रिपोर्ट का क्या कहना है.

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  9. कोरोना वायरस

    केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन भारत में कोरोना वायरस के कम्युनिटी ट्रांसमिशन की बात स्वीकार करने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं.

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  10. हैकर्स

    ब्रिटेन का कहना है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बना रहे संगठनों पर रूस के हैकर्स हमला कर रहे हैं.

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