दिल्ली हिंसा

  1. हेड कांस्टेबल रतन लाल के मर्डर केस में पांच को ज़मानत, अदालत - 'असहमति जताना मौलिक अधिकार'

    दिल्ली हाइकोर्ट

    दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दंगों के दौरान मारे गए दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में पांच अभियुक्तों आरिफ, शाहबाद, फुरकान, सुवलीन और तबस्सुम को जमानत दी है.

    कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना और अपनी असहमति व्यक्त करना एक मौलिक अधिकार है.

    इस अधिकार का प्रयोग करने वालों की क़ैद को जायज़ ठहराने के लिए इस अधिकार के प्रयोग मात्र को एक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

    जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा है, “भारतीय दंड संहिता की धारा 149 को, विशेषत: जब उसे धारा 302 के साथ पढ़ा जाए, सामान्य आरोपों और अस्पष्ट सबूतों के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता. जब भीड़ से जुड़ा मामला हो तब अदालतों को जमानत देने या ख़ारिज करते समय इस नतीज़े पर पहुंचने में कोताही बरतनी चाहिए कि ग़ैर-कानूनी सभा के सभी सदस्य एक ग़ैर-क़ानूनी साझे उद्देश्य को हासिल करने का साझा इरादा रखते हैं.”

    इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि यह उसका संवैधानिक कर्तव्य है कि राज्य की शक्ति की अधिकता की स्थिति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मनमाने ढंग से न छीना जाए.

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  2. पीएम नरेंद्र मोदी

    भारतीयों को अफ़ग़ानिस्तान से निकाल तो लिया गया, लेकिन उसमें हुई देरी और मुश्किलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. पढ़िए आज के अख़बारों की अहम ख़बरें.

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  3. सलमान रावी

    बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

    दिल्ली पुलिस

    पिछले साल फ़रवरी में दिल्ली में हुए दंगों के दौरान जिस केस की तफ़्तीश में गड़बड़ी को लेकर जुर्माना लगा वो मामला क्या है?

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  4. सोशल मीडिया ध्रुवीकरण कर सकता है- सुप्रीम कोर्ट की फ़ेसबुक मामले में टिप्पणी

    फ़ेसबुक

    सुप्रीम कोर्ट ने फ़ेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष अजीत मोहन की एक याचिका पर फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि सोशल मीडिया में इतनी क्षमता है कि वो लोगों को प्रभावित कर सके, और वहाँ की बहस और पोस्ट से समाज के लोगों का ध्रुवीकरण हो सकता है क्योंकि ज़्यादातर लोगों के लिए उसकी सत्यता को परखना संभव नहीं होता.

    फ़ेसबुक अधिकारी ने अपने ख़िलाफ़ दिल्ली विधानसभा की एक समिति की ओर से दिल्ली दंगों के बारे में जारी किए गए सम्मन को अदालत में चुनौती दी थी.

    सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश जारी करते हुए ये टिप्पणी की.

    अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि दिल्ली विधानसभा फ़ेसबुक और उनके अधिकारियों से दिल्ली दंगों में कथित भूमिका के लिए जानकारी ले सकती है, मगर वो क़ानून-व्यवस्था और अभियोजन के विषय में दख़ल नहीं दे सकती.

  5. राघवेंद्र राव

    बीबीसी संवाददाता

    स्टैन स्वामी

    स्टैन स्वामी के वकील ने इस धारा की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी जिस पर सुनवाई चल रही थी लेकिन उसका फ़ैसला होने से पहले ही उनकी मौत हो गई.

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  6. Video content

    Video caption: इमरजेंसी के दौरान जब तुर्कमान गेट में चले बुलडोज़र Vivechna

    इमरजेंसी के दौरान दिल्ली के तुर्कमान गेट में डीडीए के बुलडोजरों ने सैकड़ों घरों को गिरा दिया. जब लोगों ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने फायरिंग की जिसमें कई लोग मारे गए.

  7. इमरान क़ुरैशी

    बीबीसी हिंदी के लिए

    हबीब

    बेंगलुरु में गोलीबारी की घटना के सिलसिले में वहां से सैकड़ों मील दूर अगरतला के ऑटो ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ़्तार किया. जानिए उनके जेल जाने और रिहा होने की कहानी.

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  8. Video content

    Video caption: देवांगना, नताशा, आसिफ़ जेल से निकल कर क्या बोले?

    देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल तन्हा इन तीन छात्रों को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने जमानत दे दी.

  9. ओवैसी ने नताशा, देवांगना और आसिफ़ को लेकर चिदंबरम को आडे़ हाथों लिया

    ओवैसी

    उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े यूएपीए मामले में पिंजरा तोड़ की कार्यकर्ताओं देवांगना कलिता और नताशा नरवाल और जामिया के छात्र आसिफ़ इक़बाल तन्हा को ज़मानत मिलने पर जब देश के पूर्व गृह मंत्री पी. चिंदबरम ने उनके साहस की प्रशंसा की तो एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चिदंबरम को आड़े हाथों लिया.

    ओवैसी ने ट्वीट करके यूएपीए जैसे कठोर क़ानून बनाने को लेकर पी. चिदंबरम की आलोचना की है.

    ओवैसी ने दो ट्वीट किए हैं. पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “केवल तीन निरर्थक ट्वीट. जो ज़रूरी चीज़ है, उस पर एक शब्द भी नहीं बोला गया. पी. चिदंबरम जादुई शब्द बोलिए: यूएपीए. आपने ही यूएपीए में संशोधन किया जिससे अनगिनत मुसलमानों और आदिवासियों की ज़िंदगियां तबाह हुईं. जब बीजेपी ने यूएपीए में संशोधन कर इसे और बदतर किया तो आपकी पार्टी ने राज्यसभा में साथ देने में कोई देरी नहीं की.''

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    अगले ट्वीट में ओवैसी ने लिखा, “इन तीन युवाओं- नताशा, देवांगना और आसिफ़ से बीजेपी, कांग्रेस को माफ़ी मांगनी चाहिए न कि भारतीयों को प्रताड़ित करने और अनुचित तरीक़े से जेल भेजने के लिए ज़िम्मेदार लोग महज़ औपचारिकता पूरी करें.

    कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने ट्वीट करके नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ़ इक़बाल तन्हा का स्वागत करते हुए कहा था कि ‘आप लोग उदासीनता और जड़ता के रेगिस्तान में आशा की हरियाली हैं.’

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    पी. चिदंबरम ने अगले ट्वीट में लिखा कि ‘यह दुखद है कि अदालतें पुलिस पर जितनी सख़्त कार्रवाई करती हैं, उनके मालिक उतने ही अधिक दमनकारी होते जाते हैं. आख़िरकार सत्य की जीत होती है.’

  10. विशाल शुक्ला

    बीबीसी संवाददाता

    नताशा नरवाल

    बीते साल दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में जेल में बंद तीनों कार्यकर्ता ज़मानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा. जानिए पूरा मामला विस्तार से.

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